आजमगढ़। जिले के जहानागंज थाना क्षेत्र के कुंजी गांव निवासी एक दिव्यांग दंपति की करुण कहानी ने जिले के प्रशासनिक तंत्र की संवेदनहीनता को एक बार फिर उजागर कर दिया है। मंगलवार को चिलचिलाती धूप, उमस भरी गर्मी और ज़मीन पर झुलसाता तापमान, इन सबके बीच एक दिव्यांग पति अशोक अपनी विकलांग पत्नी को पीठ पर लादे, घसीटते हुए डीएम कार्यालय पहुँचा। उसके चेहरे पर पसीना ही नहीं, बेबसी और टूटे आत्मविश्वास की लकीरें भी साफ़ नज़र आ रही थीं। कारण,  घर तक रास्ता न होना, और प्रशासन की बेरुखी।

दंपति का कहना है कि गांव में चकबंदी का कार्य चल रहा है और इसी प्रक्रिया में उनके घर तक जाने वाला इकलौता रास्ता पूरी तरह से खत्म हो गया है। अब हालात ऐसे हो गए हैं कि बरसात हो या धूप, कीचड़ और दलदल में फँसकर रह जाना उनकी नियति बन गई है। और जब ज़रूरत पड़ी तो पत्नी को पीठ पर लादकर कलेक्ट्रेट आना पड़ा।


पति अशोक की करुण पुकार थी कि हम क्या करें साहब? पहले भी कई बार यहाँ आ चुके हैं। हर बार आश्वासन मिलता है, लेकिन अब तक कोई रास्ता नहीं निकला। अब तो मजबूरी में धूप में घसीटते हुए पत्नी को लाना पड़ा।


जिस वक्त यह दंपति डीएम कार्यालय की ओर बढ़ रहा था, उस समय उमस और गर्मी की स्थिति ऐसी थी कि आम व्यक्ति का भी बाहर निकलना मुश्किल था। लेकिन मजबूरी ऐसी कि यह दिव्यांग पति अपनी पत्नी को अपने कंधों और पीठ पर ढोते हुए तवे की तरह तप रही फर्श पर गमछा को रखकर डीएम की चौखट की तरफ न्याय की गुहार लेकर आया। यह दृश्य प्रशासन की आत्मा को झकझोरने का काम किया है या नहीं ,यह तो भविष्य बताएगा। मगर यह तय है कि यह तस्वीर हर संवेदनशील हृदय को भीतर तक हिला देती है।

“सीआरओ संजीव ओझा ने बताया कि प्रार्थना पत्र के आधार पर मालूम होता है कि पीड़ित को घर के सामने रास्ता चाहिए। वर्तमान में चकबंदी की प्रक्रिया चल रही है। हमने एसओसी को मार्क किया है कि अगर संभव हो तो नियम के अंदर उनके घर तक रास्ता दे दिया जाय।”