आजमगढ़। हरिऔध कला केन्द्र  में मनरेगा योजनान्तर्गत तमसा नदी के जीर्णोद्धार को लेकर एक महत्वपूर्ण कार्यशाला आयोजित की गई, जिसका शुभारंभ जिलाधिकारी श्री रविन्द्र कुमार ने दीप प्रज्वलित कर किया।

तमसा: आजमगढ़ की जीवनरेखा

जिलाधिकारी ने अपने संबोधन में बताया कि तमसा नदी का प्रवेश जनपद के अहिरौला विकास खंड की ग्राम पंचायत असलई से होता है और इसका अंतिम छोर ग्राम पंचायत मिर्जापुर, विकास खंड सठियांव में है।
तमसा की कुल लंबाई 89 किमी है और यह 111 ग्राम पंचायतों से होकर बहती है। नदी के किनारे चन्द्रमा ऋषि, दुर्वासा ऋषि, दत्तात्रेय ऋषि और द्रोणाचार्य जैसे ऋषियों के आश्रम स्थित हैं, जिससे इसका धार्मिक और पौराणिक महत्व भी अत्यधिक है।

नदी में प्रदूषण की गंभीर स्थिति

जिलाधिकारी ने बताया कि तमसा नदी के कई स्थानों पर गंभीर प्रदूषण है। अघुलनशील अपशिष्ट, प्लास्टिक, कचरा, कपड़े आदि के कारण नदी की धारा अवरुद्ध हो रही है। इन समस्याओं से निपटने हेतु विशेष अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें नदी की सफाई, गाद निकासी, वृक्षारोपण एवं जनजागरूकता पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

111 ग्राम पंचायतों की भूमिका अहम

कार्यशाला में सभी 111 ग्राम पंचायतों के ग्राम प्रधान, सचिव, तकनीकी सहायक और रोजगार सेवक शामिल हुए। उन्हें अभियान की रणनीति, प्रशिक्षण और सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया गया।जिलाधिकारी ने कहा कि यदि सभी प्रधानगण यह जिम्मेदारी लें तो अधिकतम दो महीनों में तमसा नदी को जनपद के भीतर पूरी तरह साफ किया जा सकता है।

स्थायी समाधान के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP)

नदी को दीर्घकालिक रूप से स्वच्छ रखने के लिए शहर से बहने वाले नालों पर एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) लगाए जाने की कार्यवाही प्रारंभ कर दी गई है। जल्द ही इसका एस्टीमेट शासन को भेजा जाएगा ताकि शहरी गंदगी का प्रवाह नदी में रोका जा सके।

धार्मिक आस्था से जोड़ें अभियान

जिलाधिकारी ने कहा कि यदि लोगों को धार्मिक आस्था से जोड़कर नदी की सफाई कराई जाए, तो लोग अधिक उत्साह से जुड़ेंगे। उन्होंने आग्रह किया कि पूजा के बाद सामग्रियों को नदी में न डालें, बल्कि डस्टबिन की व्यवस्था करें।

नदी तटों पर वृक्षारोपण की योजना

बाढ़ के सीजन को ध्यान में रखते हुए जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि नदी के दोनों किनारों पर अर्जुन, पाकड़, पीपल, बरगद, नीम, जामुन जैसे पौधे बाढ़ के जलस्तर से ऊपर लगाए जाएं। उन्होंने कहा कि बाढ़ समाप्त होने के बाद पौधे लगाए जाएं ताकि वृक्ष बाढ़ में बहें नहीं।

ग्राम असलई और देवकली तारन पर विशेष योजना

ग्राम असलई (जहां से तमसा नदी जनपद में प्रवेश करती है) और ग्राम देवकली तारन (जहां से निकलती है) पर स्टेनलेस स्टील की मजबूत जालियां लगाकर बाहरी गंदगी को रोका जाएगा। यह कार्य नदी की सफाई के बाद शुरू किया जाएगा।

स्वच्छ भारत मिशन से समन्वय

नदी की सफाई में स्वच्छ भारत मिशन की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि शौचालय प्रयोग के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाए और लोग किसी भी प्रकार का अपशिष्ट नदी में न फेंकें। उन्होंने प्रधानों से कहा कि स्वच्छ भारत मिशन का पैसा स्वच्छ मन से खर्च करें।

नदी आपकी है, जुड़िए और संकल्प लीजिए

जिलाधिकारी ने भावुक अपील करते हुए कहा कि —’नदी आपकी है, इससे जुड़ें और इसे साफ रखने में सहयोग करें। यदि ग्राम प्रधान स्वेच्छा से जिम्मेदारी लें, तो दो महीनों में नदी पूरी तरह साफ हो सकती है। जाली लगाकर कचरा रोकें, पौधे लगाएं और नदी को निर्मल बनाएं।’

नदी सफाई: एक स्थायी परिवर्तन की दिशा में

जिलाधिकारी ने अंत में कहा कि हमें ऐसे कार्य करने हैं जो लंबे समय तक सकारात्मक प्रभाव डालें — जैसे पौधारोपण, नियमित सफाई, जन भागीदारी। यदि ग्रामवासी और ग्राम प्रधान साथ आएं तो तमसा जैसी जीवनदायिनी नदी को फिर से निर्मल और अविरल बनाया जा सकता है।