लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट द्वारा टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) को अनिवार्य करने के फैसले के खिलाफ योगी सरकार रिवीजन याचिका दाखिल करेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बेसिक शिक्षा विभाग को इसका आदेश दिया है। सरकार का कहना है कि अनुभवी शिक्षकों की योग्यता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर को देशभर में टीचर्स के लिए टीईटी अनिवार्यता का फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि जो शिक्षक TET पास नहीं करेंगे, उन्हें नौकरी छोड़नी होगी या कंपल्सरी रिटायरमेंट लेना होगा। इस फैसले से लाखों शिक्षकों की चिंता बढ़ गई है, खासकर उन शिक्षकों की जिनके रिटायरमेंट में कुछ ही साल बचे हैं।
यूपी पहला राज्य है जो इस फैसले के खिलाफ रिवीजन याचिका दाखिल कर रहा है। एक अनुमान के मुताबिक प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग में करीब 2 लाख शिक्षक ऐसे हैं, जो TET पास नहीं हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का आदेश उनकी नौकरी पर संकट बन गया है।
टीईटी के डर से प्रदेश में दो शिक्षकों ने आत्महत्या कर ली है। शनिवार को हमीरपुर में 52 वर्षीय शिक्षक ने सुसाइड कर लिया, जबकि सोमवार को महोबा में 49 वर्षीय शिक्षक ने फंदे से लटककर जान दे दी। दोनों परिवारों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद से शिक्षक मानसिक दबाव में थे।
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने सुनवाई के बाद आदेश दिया कि जिन शिक्षकों की सेवा में 5 साल से अधिक समय बाकी है, उन्हें TET क्वॉलिफाई करना अनिवार्य होगा। अन्यथा उन्हें नौकरी छोड़नी होगी।
इस आदेश के बाद प्रदेश भर में शिक्षकों में दहशत का माहौल है और योगी सरकार ने उनके हित में रिवीजन याचिका दाखिल करने का निर्णय लिया है।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद पूरे देश में करीब 10 लाख टीचर प्रभावित होंगे। अकेले यूपी में 2 लाख शिक्षकों पर असर पड़ेगा। कोर्ट ने अपने इस निर्देश में कहा कि माइनॉरिटी इंस्टीट्यूशंस पर यह फैसला लागू होगा या नहीं, इसका फैसला बड़ी बेंच करेगी।
