आजमगढ़। शिक्षा विभाग में वर्ष 2016 की फर्जी नियुक्तियों का मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक नवल किशोर ने सोमवार की रात शहर कोतवाली में तहरीर देकर अपने कार्यालय के तत्कालीन वरिष्ठ सहायक मनीष कुमार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है।
जानकारी के अनुसार वरिष्ठ सहायक मनीष कुमार पर अभिलेख गायब करने और फर्जी नियुक्ति प्रकरण में संलिप्तता के आरोप लगाए गए हैं। मनीष कुमार वर्तमान में संयुक्त शिक्षा निदेशक कार्यालय आजमगढ़ में प्रशासनिक अधिकारी के पद पर तैनात हैं।
यह मामला राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में 22 सहायक अध्यापकों की फर्जी नियुक्तियों से जुड़ा है। जांच में पाया गया कि इन अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र और अंकपत्र फर्जी थे, जिसके बाद उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं। इनमें से 14 अभ्यर्थियों ने अब उच्च न्यायालय में याचिकाएं दाखिल की हैं, जिनमें राज्य सरकार और शिक्षा विभाग को पक्षकार बनाया गया है।
गौरतलब है कि वर्ष 2014 में जारी विज्ञापन के तहत हुई इस भर्ती में वर्ष 2015 से 2016 के बीच तीन चयन सूचियां निकली थीं। जांच में यह खुलासा हुआ कि द्वितीय और तृतीय चयन सूची में गुणांक में गड़बड़ी की गई थी। उस दौरान संयुक्त शिक्षा निदेशक बदलते रहे, लेकिन कार्यालय के सहायक मनीष कुमार और संजय कुमार सिंह लगातार पद पर बने रहे। वर्ष 2024 में संजय कुमार सिंह की मृत्यु हो गई।
संयुक्त शिक्षा निदेशक नवल किशोर ने बताया कि मूल आवेदन पत्र और संलग्न अभिलेख गायब हैं, जिनके अभाव में फर्जी नियुक्ति की जांच अधूरी रह गई है। 15 अक्तूबर को मनीष कुमार को दो दिन में अभिलेख प्रस्तुत करने का नोटिस दिया गया था, लेकिन उन्होंने 12 दिन बाद भी दस्तावेज नहीं सौंपे।
एडी नवल किशोर ने कहा, अभ्यर्थियों ने कार्यालय कर्मचारियों की मिलीभगत से अपने मूल आवेदन गायब कराए और काउंसलिंग के समय दूसरे प्रमाणपत्र लगाए। अधिकारियों ने संबंधित बाबू के खिलाफ फर्जीवाड़ा, अभिलेख छिपाने और साक्ष्य नष्ट करने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया है।
