आजमगढ़। विधान परिषद में आयुष और स्वास्थ्य विभाग के बीच लंबे समय से अटके चिकित्सकों के पदोन्नति प्रकरण का मुद्दा गूंजा। एमएलसी विजय बहादुर पाठक ने सदन में इस पर चर्चा कराने की मांग की।
विधान परिषद सदस्य विजय बहादुर पाठक ने बुधवार को नियम 111 के तहत प्रदेश में कार्यरत चिकित्साधिकारी सामुदायिक स्वास्थ्य सेवा से जुड़े सेवा संबंधी विषय को सदन में उठाया। उन्होंने बताया कि आयुष और स्वास्थ्य विभाग के बीच अधिकार क्षेत्र और प्रशासनिक नियंत्रण को लेकर 900 से अधिक चिकित्सकों का पदोन्नति प्रकरण वर्षों से उलझा हुआ है।
इन चिकित्सकों को न तो पदोन्नति मिल पा रही है और न ही प्रोन्नत वेतनमान का लाभ। वर्ष 1990 में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एमबीबीएस चिकित्सकों की कमी को देखते हुए आयुष विभाग के बीएमएस चिकित्सकों की तैनाती की गई थी।
तैनाती के तुरंत बाद ही पदोन्नति और एसीपी को लेकर विवाद शुरू हो गया। आयुष विभाग से चयन होने के कारण स्वास्थ्य विभाग पदोन्नति देने से बचता रहा, जबकि नियुक्ति से लेकर वेतन भुगतान तक की समस्त जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग निभाता रहा है।
दो विभागों के बीच गतिरोध के चलते 900 से अधिक चिकित्सकों की प्रोन्नति पर संकट खड़ा हो गया है। हालात ऐसे हैं कि अधिकांश चिकित्सक जिस पद पर नियुक्त होते हैं, उसी पद से सेवानिवृत्त हो जाते हैं। पदोन्नति न मिलने से जहां चिकित्सकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है, वहीं इसे लेकर उनमें भारी आक्रोश भी व्याप्त है।
