आजमगढ़। जिले में रंगमंच और ललित कलाओं को समर्पित हुनर सामाजिक, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था द्वारा आयोजित हुनर रंग महोत्सव के तीसरे दिन सांस्कृतिक रंग खूब जमे। श्री अग्रसेन महिला महाविद्यालय में चल रहे इस महोत्सव में दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन हुआ, जहां नृत्य और नाट्य प्रस्तुतियों ने दर्शकों को भावनात्मक और वैचारिक रूप से जोड़े रखा।
रंगमंच एवं ललित कलाओं के क्षेत्र में समर्पित हुनर सामाजिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक संस्था द्वारा पिछले 24 वर्षों से लगातार आयोजित हो रहे हुनर रंग महोत्सव के तीसरे दिन का उद्घाटन माँ सरस्वती की प्रतिमा के सम्मुख दीप प्रज्वलित कर किया गया। उद्घाटन संयुक्त रूप से सदर विधायक दुर्गा प्रसाद यादव सर्वोदय ग्रुप ऑफ एजुकेशनल इंस्टिट्यूट के डायरेक्टर राजेंद्र प्रसाद यादव, देवेंद्र प्रताप सिंह (सहायक खाद्य संभागीय अधिकारी), दीपक सिंह (असिस्टेंट रजिस्ट्रार, चिट फंड), रवि प्रताप सिंह (एडवोकेट) एवं अध्यक्ष नगर पालिका परिषद, आजमगढ़ ने किया।
पूर्वांचल के शिक्षाविद पंडित बजरंग त्रिपाठी की स्मृति में आयोजित यह महोत्सव श्री अग्रसेन महिला महाविद्यालय में चल रहा है, जिसका आज तीसरा दिन रहा।
महोत्सव के पहले सत्र में मनमोहक समूह नृत्य प्रस्तुतियां हुईं। बिहार के कैमूर से आई श्रवण डांस एकेडमी ने श्रवण रॉक के निर्देशन में काली नृत्य का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। वहीं आर.पीपीएस डांस ग्रुप, उत्तराखंड ने गढ़वाली नृत्य प्रस्तुत किया। स्थानीय तपस्या क्रिएटिव स्कूल, भास्कर एवं रॉबी सोनकर द्वारा ग्रुप डांस की प्रस्तुति दी गई। मिर्जापुर से आए रॉकस्टार डांस ग्रुप के कलाकारों ने धमाकेदार वेस्टर्न ग्रुप डांस से दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।
दूसरे सत्र में पहली नाट्य प्रस्तुति के रूप में “एक दिन का गांधी” मंचित किया गया। इस नाटक के लेखक डॉ. आनंद कश्यप तथा निर्देशक रितेश सिंह हैं। एंटीक इंडियन, धनबाद (झारखंड) द्वारा प्रस्तुत इस नाटक के माध्यम से समाज को यह सोचने पर मजबूर किया गया कि क्या हम अपने महान स्वतंत्रता सेनानियों को केवल मूर्ति बनाकर याद कर रहे हैं और क्या ऐसा समाज भविष्य में फिर से गुलामी की ओर नहीं बढ़ेगा।
दूसरी नाट्य प्रस्तुति “जादू का सूट” रही, जिसके लेखक अलकनंदन और निर्देशक अनिल सिंह हैं। यह नाटक राजनीतिक व्यवस्था पर करारा व्यंग्य प्रस्तुत करता है, जिसमें दिखाया गया कि यदि शासक वर्ग सही निर्णय न ले पाए तो देश को इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
इस अवसर पर संस्थान के पदाधिकारी अनूप अग्रवाल, सुनील अग्रवाल, रमाकांत वर्मा, प्रमोद कुमार सिंह, गजराज प्रसाद, सुनील कुमार मोर, साथ ही रिमझिम प्रजापति, आस्था दुबे, तारा, रितिका, डॉ. पंकज सिंह, संतोष कुमार सिंह, अभिषेक राय ‘तोशी’, कमलेश सोनकर, राज पासवान, दीपक जायसवाल, रवि गोंड समेत बड़ी संख्या में रंगकर्मी, साहित्यकार और दर्शक उपस्थित रहे।
