आजमगढ़। धरती माता बचाओ अभियान के अंतर्गत नैनो उर्वरकों के महत्व व उपयोग पर आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन कृषि भवन सभागार, आजमगढ़ में किया गया।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संयुक्त कृषि निदेशक आजमगढ़ मंडल गोपाल दास रहे।
कार्यक्रम में जिला कृषि अधिकारी डॉ. गगनदीप सिंह, इफको गोरखपुर के वरिष्ठ क्षेत्रीय प्रबंधक डॉ. विनोद कुमार सिंह, क्षेत्र प्रबंधक इफको आजमगढ़ जियाउद्दीन सिद्दीकी सहित कृषि विभाग के अधिकारी, एडीओ कृषि, एडीओ पीपी एवं लगभग 100 केंद्र प्रभारियों ने सहभागिता की।
संयुक्त कृषि निदेशक ने कहा कि नैनो उर्वरक मृदा में पोषक तत्वों के अनावश्यक जमाव को रोकते हैं, जिससे भूमि की उर्वराशक्ति लंबे समय तक बनी रहती है। इससे फसलों में पोषक तत्वों की बर्बादी कम होती है, पौधों की सहनशीलता बढ़ती है और जल उपयोग दक्षता में सुधार आता है।
जिला कृषि अधिकारी डॉ. गगनदीप सिंह ने किसानों से रासायनिक खादों का संतुलित प्रयोग करने, फसल अवशेषों को मिट्टी में मिलाने, जैविक खाद अपनाने तथा फसल चक्र अपनाने की अपील की। उन्होंने नैनो तकनीक आधारित उर्वरकों के व्यापक प्रचार-प्रसार पर जोर दिया।
इफको के वरिष्ठ क्षेत्रीय प्रबंधक डॉ. विनोद कुमार सिंह ने बताया कि नैनो यूरिया पौधों द्वारा तेजी से अवशोषित होता है, जिससे कम मात्रा में भी आवश्यक नाइट्रोजन उपलब्ध हो जाती है। वहीं नैनो डीएपी बीज शोधन के दौरान प्रारंभिक वृद्धि में सहायक सिद्ध होता है।
कार्यक्रम का संचालन क्षेत्र प्रबंधक इफको आजमगढ़ ने किया। उन्होंने नैनो उर्वरकों की वैज्ञानिक अवधारणा, कार्यप्रणाली एवं व्यावहारिक उपयोग पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह तकनीक पर्यावरण अनुकूल होने के साथ किसानों के लिए लागत प्रभावी भी है।
