आजमगढ़। सऊदी अरबिया के अबहा शहर में काम करने गए भारत के 161 श्रमिक पिछले तीन माह से वेतन और खुराकी न मिलने के कारण गंभीर संकट में फंसे हुए हैं। हालत यह है कि मजदूर घर से पैसे मंगाकर किसी तरह पेट पाल रहे हैं। सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर श्रमिकों ने भारत सरकार से सकुशल वतन वापसी की गुहार लगाई है। इनमें आजमगढ़ जिले के चार युवक भी शामिल हैं, जिनके परिजन गांवों में बेसब्री से उनके लौटने की राह देख रहे हैं।

सऊदी अरबिया के अबहा शहर में अलीसार कंस्ट्रक्शन कंपनी में काम कर रहे भारत के 161 श्रमिक बीते तीन माह से बिना वेतन और खुराकी के जीवन गुजारने को मजबूर हैं। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि मजदूर अपने परिवारों से रुपये मंगाकर किसी तरह गुजर-बसर कर रहे हैं। विदेश में सपने सजाकर गए ये श्रमिक आज दाने-दाने को मोहताज हो गए हैं।
इसी बीच श्रमिकों ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर भारत सरकार से सुरक्षित वतन वापसी की अपील की है। इनमें आजमगढ़ जिले के चार युवक भी शामिल हैं।


महाराजगंज थाना क्षेत्र के कुढ़ई गांव निवासी जयसिंह साहनी दिसंबर 2024 में सऊदी अरब गए थे। उन्हें अलीसार कंस्ट्रक्शन कंपनी में पेंटिंग का काम मिला था। कंपनी द्वारा तय किया गया था कि छह माह बाद वीजा रिन्यू कर दिया जाएगा। शुरुआती छह माह तक उन्हें प्रतिमाह 1300 रियाल बेसिक मजदूरी और 300 रियाल खुराकी मिलती रही, लेकिन जैसे ही छह माह पूरे हुए, कंपनी ने 161 भारतीय श्रमिकों की मजदूरी रोक दी।
जब मजदूरों ने कंपनी से बात की तो उन्हें टाल दिया गया। इसके बाद से बीते तीन माह से किसी को एक रुपया भी नहीं मिला है। श्रमिक कंपनी के क्वार्टर में रह तो रहे हैं, लेकिन खाने-पीने का खर्च घर से मंगाए गए पैसों से चल रहा है।
जयसिंह साहनी ने बताया कि उन्होंने सऊदी अरब के लेबर कोर्ट और पुलिस थाने में भी शिकायत की, लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई।


इधर कुढ़ई गांव में जयसिंह की पत्नी नीलम तीन बच्चों के साथ पति की सलामती की दुआ कर रही है। परिवार की आर्थिक हालत बेहद कमजोर है। जयसिंह पांच भाइयों में तीसरे नंबर पर हैं और अलग रहते हैं। पत्नी नीलम ने बताया कि पति से बात होती रहती है और खाने-पीने के लिए यहां से मोबाइल पर पैसे भेजे जा रहे हैं। उन्होंने सरकार से जल्द पति की सुरक्षित वापसी कराने की मांग की है।


इसी तरह रौनापार थाना क्षेत्र के गोड़ियाना अराजी देवारा नैनीजोर गांव निवासी योगेंद्र साहनी भी रोजी-रोटी की तलाश में सऊदी अरब गए थे। चार माह बाद ही कंपनी में काम बंद हो गया, जिससे वह बीते कई महीनों से बेरोजगार बैठे हैं।


योगेंद्र के घर पर पिता राम वचन साहनी, माता किसवा देवी, छोटा भाई दीपक साहनी, भाभी अंजनी (पत्नी सुरेंद्र), पिंकी (पत्नी सोनू) और छोटे बच्चे रहते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से ही कमजोर है। योगेंद्र के दो भाई सोनू और सुरेंद्र भी बाहर काम करने गए हैं।
मां किसवा देवी ने बताया कि बेटा लगभग 13 माह से सऊदी अरब में है, लेकिन केवल चार माह ही काम मिला। पिता और भाई ने बताया कि चार दिन पहले खाने-पीने के लिए 5000 रुपये भेजे गए हैं।


वहीं सुरहन मार्टीनगंज निवासी घनश्याम राजभर 18 नवंबर 2023 को सऊदी अरब गए थे। पत्नी सविता ने बताया कि पति को वहां दो साल हो चुके हैं। गांव में वह सास-ससुर और दो बेटियों के साथ रहती हैं।


इसी प्रकार बनगांव मार्टिनगंज निवासी सोनू पिछले छह वर्षों से सऊदी अरब में रह रहा है। घर पर पत्नी सरिता देवी, मां दुर्गावती और तीन बेटियां हैं। पिता हरिनाथ ने बताया कि दो दिन पहले बेटे से बात हुई थी।
विदेश में फंसे इन मजदूरों और उनके परिवारों की हालत लगातार बिगड़ती जा रही है। सभी ने केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय से जल्द हस्तक्षेप कर सकुशल भारत वापसी कराने की मांग की है।