राजीव चौहान
आजमगढ़। नौ दिन चले अढ़ाई कोस, लेकिन आज़मगढ़ प्रशासन दो साल में भी अढ़ाई कोस नहीं चल सका। जी हां, मार्टीनगंज तहसील से जुड़े वायरल वीडियो ने प्रशासन के भीतर बयानबाज़ी का ऐसा रंग दिखाया है कि लोगों की ज़ुबान पर एक ही कहावत तैरने लगी है
‘न खाता न बही, जो हम कहें वही सही।‘
एक तरफ जिला मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी चेंबर में शराब पी रहे ऑपरेटर की सेवा समाप्त कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ एसडीएम पूरे मामले को पुराना और पहले ही निपटाया हुआ बता रही हैं। होली से पहले उठे इस विवाद ने प्रशासनिक व्यवस्था के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दरअसल पूरा मामला यह है कि दैनिक समाचार पत्र अमर उजाला ने 28 फरवरी के अंक में एसडीएम के चेंबर में जाम छलकाने की खबर प्रकाशित की। बाद में इसी खबर का अनुसरण अन्य लोगों ने वीडियो/फोटो के माध्यम से किया। वायरल वीडियो एसडीएम के चेंबर के भीतर का बताया जा रहा था, जिसमें मेज पर एक शराब की बोतल, तीन पानी की बोतलें, एक नमकीन का पैकेट और तीन गिलास रखे दिखाई दे रहे हैं। साथ ही एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति से सिगरेट लेते हुए भी नजर आ रहा है। सरकारी कार्यालय के भीतर इस तरह की गतिविधि सामने आने से प्रशासन की छवि पर सवाल खड़े हुए। प्रकाशित खबर में एसडीएम का पक्ष भी अजीब था। या तो उन्होंने वीडियो को देखा नहीं या कहें हड़बड़ी में बयान दिया कि बिजली चले जाने के बाद किसी ने चेंबर में शराब की बोतल आदि रखकर वीडियो शूट कर वायरल किया।
इधर शनिवार को होली की छुट्टी होने वाली थी। दोपहर बाद अधिकारी-कर्मचारी होली के उल्लास में डूबे थे, लेकिन जिला मुख्यालय से लेकर मार्टीनगंज तक प्रशासनिक महकमे में कुछ अलग ही कहानी लिखी जा रही थी। जिला मुख्यालय पर एडीएम प्रशासन राहुल विश्वकर्मा ने बताया कि मार्टीनगंज तहसील में तैनात संविदाकर्मी अंकित सिंह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो की गंभीरता को देखते हुए उसका संज्ञान लिया गया और प्रारंभिक जांच के बाद संबंधित संविदाकर्मी की सेवा तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई।
वहीं शाम करीब 6 बजे सूचना विभाग ने एसडीएम मार्टीनगंज का एक वीडियो/बयान जारी किया। इसमें एसडीएम दिव्या सिकरवार ने कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो करीब दो वर्ष पुराना है और मार्च 2024 का है। उनके अनुसार, उस समय पूरे मामले की जांच कराई जा चुकी थी और आख्या उच्चाधिकारियों को भेज दी गई थी। एसडीएम ने लोगों से अपील की कि पुराने वीडियो को दोबारा वायरल न किया जाए।
अब सवाल यह उठ रहा है कि अगर जांच और कार्रवाई पहले ही हो चुकी थी, तो जिला मुख्यालय से दोषी ऑपरेटर पर अब कार्रवाई की बात क्यों सामने आई?
इसी विरोधाभास के चलते लोग कहने लगे हैं।
न खाता न बही, जो हम कहें वही सही।
बहरहाल, अब क्या दूध, क्या दही, क्या गलत, क्या सही। सभी को रंग के त्योहार होली की शुभकामनाएं।
