आजमगढ़। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव से पहले जिले में निर्वाचन नामावली के पुनरीक्षण के दौरान राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से एआई ( आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) तकनीक के माध्यम से 7 लाख 90 हजार 775 डी डुप्लीकेट मतदाता पाए गए हैं। प्रशासन ने इनकी सूची सभी 22 विकास खंडों में भेजकर सत्यापन शुरू कर दिया है।


राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी सूची में डुप्लीकेट मतदाताओं की संख्या इतनी अधिक मिली है कि जिले के प्रशासनिक अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतनी पड़ रही है। एआई आधारित सर्वे के जरिए बीएलओ को घर-घर जाकर इन मतदाताओं का सत्यापन करने का निर्देश दिया गया है। नोडल अधिकारियों की निगरानी में सत्यापन का काम तेजी से चल रहा है। जांच पूरी होने के बाद सही पाए गए डुप्लीकेट मतदाताओं की रिपोर्ट राज्य निर्वाचन आयोग को भेजी जाएगी।

जानकारी के अनुसार वर्ष 2021 में जिले की 1811 ग्राम पंचायतों में कुल 37 लाख 20 हजार 84 मतदाता शामिल थे। तब 22820 ग्राम पंचायत सदस्य, 2104 क्षेत्र पंचायत सदस्य और 84 जिला पंचायत सदस्य पदों के लिए चुनाव हुआ था। इस बार मतदाता पुनरीक्षण अभियान 18 अगस्त से शुरू किया गया है। इसके लिए जिले में 2180 बीएलओ की ड्यूटी लगाई गई है। अभियान के दौरान एआई तकनीक की मदद से डुप्लीकेट मतदाताओं की पहचान की गई।

जिला पंचस्थानीय निर्वाचन कार्यालय ने सूची को ब्लॉक स्तर पर भेजते हुए बीएलओ को सत्यापन का काम सौंपा है। सॉफ्टवेयर ने एक ही नाम, उम्र, पते या हुलिए के आधार पर डुप्लीकेट मतदाताओं की पहचान की है। प्रशासन अब मतदाता सूची में आवश्यक संशोधन कर रहा है। पंचायत नियमावली के तहत मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने का काम भी किया जा रहा है।

ब्लॉकवार डी डुप्लीकेट मतदाता इस प्रकार पाए गए हैं – रानी की सराय में 32,189, तहबरपुर में 34,990, मिर्जापुर में 31,415, मुहम्मदपुर में 31,211, पल्हनी में 48,998, लालगंज में 46,566, ठेकमा में 50,718, तरवां में 48,637, मेंहनगर में 41,212, जहानागंज में 30,858, सठियांव में 34,933, बिलरियागंज में 29,540, अजमतगढ़ में 39,336, महराजगंज में 37,318, हरैया में 39,196, फूलपुर में 36,681, पवई में 41,227, मार्टीनगंज में 21,169, कोयलसा में 31,168, अतरौलिया में 20,524, अहरौला में 39,459 और पल्हना में 23,430 डुप्लीकेट मतदाता पाए गए हैं

पंचस्थानीय सहायक निर्वाचन अधिकारी राजाराम वर्मा ने बताया कि राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा विकसित सॉफ्टवेयर एक ही नाम, उम्र, पता या हुलिए के आधार पर डुप्लीकेट मतदाताओं की पहचान कर रहा है। बीएलओ घर-घर जाकर सत्यापन कर रहे हैं और सूची को दुरुस्त करने का कार्य पंचायत नियमावली के अनुसार किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट राज्य निर्वाचन आयोग को भेजी जाएगी।

………….तो बदल जाएगा गांव का चुनावी परिदृश्य


पंचायताें का चुनाव सबसे कठिन माना जाता है। यहां एक-एक वोट की अहमियत होती है। पिछले चुनाव में कई गांवों में जीत-हार का फैसला बेहद मामूली वोटों से हुआ था। कुछ जगहों पर टॉस से विजेता तय करने की नौबत आई थी। ऐसी स्थिति में हजारों की संख्या में नाम हटाए जाने का असर चुनावी परिदृश्य पर पड़ना तय है। हालांकि सिर्फ वही नाम हटाए जाने हैं, जो एक ही व्यक्ति के हैं और एक से अधिक स्थानों पर दर्ज है। नाम काटने से पहले उनसे पुख्ता प्रमाण मांगे जाएंगे। फिर भी डुप्लीकेट वोटरों का सत्यापन शुरू होने के बाद कई संभावित दावेदारों की चिंताएं बढ़ने लगी हैं। चुनाव में लाभ के लिए ही कई संभावित दावेदार अपने पक्ष के लोगों के नाम सूची में शामिल करा लेते हैं।