आजमगढ़। जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार ने तमसा नदी के किनारे स्थित महर्षि चन्द्रमा आश्रम का  मंगलवार को भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने आम जनमानस के साथ आश्रम परिसर एवं नदी तट पर श्रमदान कर स्वच्छता का संदेश दिया।
जिलाधिकारी ने बताया कि तमसा नदी जनपद में लगभग 89 किलोमीटर क्षेत्र में बहती है और 111 ग्राम पंचायतों से होकर गुजरती है। उन्होंने कहा कि तमसा नदी का न केवल जनजीवन में महत्व है, बल्कि इसका पौराणिक और धार्मिक महत्व भी अत्यंत विशेष है। मान्यता है कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम ने 14 वर्ष के वनवास के दौरान पहली रात्रि तमसा नदी के तट पर ही विश्राम किया था।
उन्होंने बताया कि तमसा नदी के किनारे महर्षि दुर्वासा, महर्षि दत्तात्रेय एवं महर्षि चन्द्रमा के आश्रम स्थित हैं। महर्षि चन्द्रमा आश्रम में वर्ष भर श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं। यहां पूजा-पाठ, तर्पण एवं धार्मिक अनुष्ठान होते हैं। महाशिवरात्रि, सावन, छठ पर्व, कार्तिक पूर्णिमा सहित कई अवसरों पर यहां मेले का आयोजन होता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु भाग लेते हैं। सावन और महाशिवरात्रि में लोग तमसा नदी का जल लेकर मंदिरों में अर्पित करते हैं।
जिलाधिकारी ने कहा कि रोजमर्रा के जीवन में भी लोग इस नदी के जल का उपयोग स्नान, कपड़े धोने, पशुओं को नहलाने, सिंचाई एवं पेयजल के रूप में करते हैं। ऐसे में नदी को स्वच्छ रखना सभी की जिम्मेदारी है। इसी उद्देश्य से बीते वर्ष हरिऔध कला केंद्र में 111 ग्राम पंचायतों के ग्राम प्रधानों एवं कर्मचारियों के साथ कार्यशाला आयोजित कर जनजागरूकता अभियान चलाया गया।
उन्होंने बताया कि अभियान के तहत नदी की सफाई कराई गई, सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाया गया तथा जनसहयोग से फलदार वृक्षों का रोपण किया गया। नदी की अविरलता और निर्मलता बनाए रखने के लिए मानसून से पहले और बाद में चरणबद्ध सफाई कराई गई है।
जिलाधिकारी ने कहा कि नदी तट पर सूचना बोर्ड और डस्टबिन लगाए गए हैं। प्रशासन एवं जनसहयोग से भविष्य में भी यह अभियान जारी रहेगा, जिससे एक दिन तमसा नदी पूरी तरह स्वच्छ और निर्मल स्वरूप में दिखाई देगी।