आजमगढ़। जिले में टेंडर घोटाले के मामले ने तूल पकड़ लिया है। जिला पंचायत अध्यक्ष विजय यादव के खिलाफ लगे आरोपों पर शासन ने संज्ञान लेते हुए नोटिस जारी किया है। राज्यपाल के निर्देश पर 30 दिन के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है, जवाब न देने की स्थिति में पद से हटाने तक की कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
आज़मगढ़ के लालगंज के भाजपा निवर्तमान जिलाध्यक्ष सूरज प्रकाश श्रीवास्तव ने सिविल लाइन स्थित कैंप कार्यालय में प्रेसवार्ता कर बताया कि जिला पंचायत अध्यक्ष विजय यादव पर टेंडर घोटाले के आरोपों को शासन ने गंभीरता से लिया है। राज्यपाल के निर्देश पर प्रमुख सचिव अनिल कुमार की ओर से नोटिस जारी करते हुए 30 दिन में जवाब मांगा गया है। उन्होंने कहा कि संतोषजनक स्पष्टीकरण न मिलने पर जिला पंचायत अधिनियम 1961 की धारा 29 के तहत अध्यक्ष को हटाने की कार्रवाई की जाएगी।
बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2023-24 में ऐसे कार्यों के टेंडर प्रकाशित किए गए, जिनका निर्माण पहले ही अन्य कार्यदायी संस्थाओं या स्वयं जिला पंचायत द्वारा कराया जा चुका था। मामले की जांच के लिए मुख्य विकास अधिकारी के निर्देश पर जिला विकास अधिकारी संजय कुमार सिंह और मुख्य कोषाधिकारी अनुराग श्रीवास्तव के नेतृत्व में नौ सदस्यीय जांच समिति गठित की गई। समिति ने आठ कार्यों की जांच की, जिसमें सात कार्यों में पूर्व में निर्माण होने की शिकायत सही पाई गई। जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी गई, जिसे बाद में शासन को भेज दिया गया।
इसके बाद पंचायती राज समिति, विधान परिषद उत्तर प्रदेश में सदस्य विधान परिषद एवं भाजपा प्रदेश महामंत्री अनूप गुप्ता ने इस प्रकरण को उठाया, जिससे मामला और गंभीर हो गया। आरोप है कि पहले से बने कार्यों पर दोबारा टेंडर निकालकर अपने ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई। जांच में सामने आया कि सात सड़कें टेंडर प्रक्रिया से पहले ही बनी हुई थीं और करीब 1 करोड़ 27 लाख 78 हजार रुपये के भ्रष्टाचार का मामला उजागर हुआ।
सूरज प्रकाश श्रीवास्तव ने दावा किया कि पूर्व की जिला स्तरीय जांच में अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत विद्या शंकर पांडेय, प्रभारी अभियंता रविंद्र यादव और अवर अभियंता गणेश पाल को प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर निलंबित किया जा चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि जिला पंचायत अध्यक्ष इस पूरे मामले में बराबर के दोषी पाए गए हैं। नोटिस में यह भी उल्लेख है कि अध्यक्ष द्वारा वित्तीय एवं प्रशासनिक शक्तियों का दुरुपयोग किया गया और जिला पंचायत अपने कर्तव्यों के निर्वहन में असमर्थ रही। यदि 30 दिन के भीतर स्पष्टीकरण नहीं दिया गया तो वित्तीय शक्तियों पर रोक के साथ पद से हटाने और तीन वर्षों तक चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध की कार्रवाई भी हो सकती है।
प्रभारी जिलाधिकारी परीक्षित खटाना ने बताया कि सप्ताह भर पहले शासन से पत्र आया था। जिला पंचायत अध्यक्ष को पत्र रिसीव करा दिया गया है। रिसीविंग लेटर शासन को भेज दिया गया है ।
