आजमगढ़। जिले में मंगलवार की भोर में मौसम के बदले मिजाज के बीच भी श्रद्धा और आस्था का जज़्बा कम नहीं हुआ। हल्की बुंदाबांदी और ठंडी हवाओं के बावजूद लाखों व्रती महिलाओं ने पुत्रों की दीर्घायु और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के साथ नदियों, सरोवरों और नहरों के तट पर उदीयमान भगवान भाष्कर को अर्घ्य अर्पित किया। कई स्थानों पर बारिश के बीच श्रद्धालु भी भीगते हुए घाटों तक पहुंचे और छठ मैया की आराधना में लीन रहे।

सूर्य उपासना के चार दिवसीय महापर्व डाला छठ के अंतिम दिन मंगलवार की सुबह श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। बुंदाबांदी के बावजूद व्रती महिलाओं ने पूरी श्रद्धा से भगवान भाष्कर को अर्घ्य देकर चार दिनी षष्ठी व्रत का पारण किया। इस दौरान घाटों से लेकर गलियों तक छठ मैया के गीतों से पूरा जिला गुंजायमान रहा।
सोमवार की शाम अस्ताचलगामी सूर्य को पहला अर्घ्य देने के बाद व्रती महिलाओं ने रातभर पूजन-सामग्री तैयार की। छठ पर्व के धार्मिक और पौराणिक महत्व की कथाएं एक-दूसरे को सुनाईं। उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने की प्रतीक्षा में महिलाएं पूरी रात जागती रहीं। मंगलवार की भोर में लगभग तीन बजे से ही ठंड और हल्की बारिश के बीच गाजे-बाजे के साथ घाटों की ओर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा।

लगभग चार बजे तक तमसा नदी के सभी घाटों पर तिल रखने की भी जगह नहीं बची थी। ठंडे पानी में कमरभर तक डूबी व्रती महिलाएं अपनी वेदियों के सामने भगवान भाष्कर के उदय की प्रतीक्षा में ध्यानमग्न रहीं। आसमान में बादलों के डेरा जमाने के कारण सूरज की किरण क्षितिज पर दिखाई नहीं दी। लेकिन समय के देखकर व्रती महिलाओं ने अर्घ्य दिय्य।
भगवान भाष्कर का पूजन-अर्चन कर महिलाओं ने पूजा बेदी पर दीप प्रज्वलित किया और प्रसाद चढ़ाया। घाटों पर महिलाओं, बच्चों और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस व महिला पुलिस बल मुस्तैद रहा। अर्घ्य के उपरांत पूजा पंडालों में प्रसाद वितरण के दौरान श्रद्धालुओं में प्रसाद ग्रहण करने की होड़ मच गई। घाटों से घर लौटने के बाद व्रती महिलाओं ने विधिवत व्रत का पारण किया और घर-घर प्रसाद वितरण कर छठ मैया का धन्यवाद ज्ञापित किया।
