रिपोर्ट: आशीष निषाद
अतरौलिया (आजमगढ़)। एक बार फिर सरकारी एंबुलेंस सेवा की साख पर सवाल खड़े हो गए हैं। मंगलवार को क्षेत्र के सिकंदरपुर चौराहे के पास स्थित एक निजी अस्पताल में सरकारी एंबुलेंस से कई महिलाओं को उतरते देखा गया। यह नजारा देखकर स्थानीय लोगों ने एंबुलेंस चालक को रोकने की कोशिश की, लेकिन वह एंबुलेंस लेकर तेज़ी से भाग निकला। घटना ने पूरे क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। सरकारी एंबुलेंस से निजी अस्पतालों में मरीज भेजना अब आम बात हो गई है। आए दिन सरकारी सुविधा का इस तरह दुरुपयोग होता है, और जब कोई नागरिक इसका विरोध करता है, तो निजी अस्पताल के लोग धमकी और मारपीट तक पर उतर आते हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, मंगलवार को एक सरकारी एंबुलेंस से 5–6 महिलाएं उतरीं और सीधे एक निजी हॉस्पिटल में दाखिल हो गईं। यह पूरा घटनाक्रम राष्ट्रीय राजमार्ग किनारे मौजूद उस अस्पताल के बाहर देखा गया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि योजनाबद्ध ‘सेटिंग’ का हिस्सा है।
सेटिंग का खुला खेल, गरीबों के अधिकारों पर कुठाराघात
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ एंबुलेंस चालकों की निजी अस्पतालों से कमीशन की सेटिंग है। मरीज जब एंबुलेंस सेवा पर कॉल करता है, तो चालक उन्हें सरकारी अस्पताल में ना दिखाकर, सीधे निजी हॉस्पिटल ले जाता है जहां उनकी फीस और दवाएं बेहद महंगी होती हैं। इससे न सिर्फ गरीबों की जेब पर भारी बोझ पड़ता है, बल्कि गंभीर मामलों में उनकी जान भी जोखिम में पड़ जाती है।
इस खेल का सबसे खतरनाक पहलू यह है कि इन प्राइवेट अस्पतालों में झोलाछाप डॉक्टर और बिना लाइसेंस वाले संस्थान भी शामिल होते हैं। खासकर प्रसव के मामलों में कई महिलाओं की जान जा चुकी है या उनकी हालत गंभीर हो चुकी है, जिसकी खबरें पहले भी सामने आती रही हैं।
स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी और जांच की मांग
जब इस पूरे मामले पर
एसीएमओ डॉ. अलिंद्र कुमार से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कहा कि एंबुलेंस द्वारा एक प्रसूता को पीहू हॉस्पिटल में भर्ती कराने का वीडियो और फोटो हमें मिला है। पूरे मामले की जानकारी सीएमओ को दे दी गई है।
स्थानीय नागरिकों ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि सरकारी संसाधनों का इस तरह निजी लाभ के लिए उपयोग, न केवल भ्रष्टाचार है बल्कि यह जरूरतमंदों के जीवन के साथ खिलवाड़ है।
