आजमगढ़ । जिले में एक शादी सादगी की मिसाल बन गई है जहां शादियों के सीजन में दहेज और फिजूलखर्ची की होड़ लगातार बढ़ती हुई देखी जा रही है। वहीं जिले के कप्तानगंज थानाक्षेत्र के लखमीपुर गांव के रहने वाले रविंद्र यादव और उनकी महाविद्यालय की प्रबंधक पत्नी गीता यादव ने समाज के सामने एक सराहनीय मिसाल पेश की है। उन्होंने अपने बेटे की शादी में मात्र 101 रुपये का कन्यादान लेकर शादी की रस्मे सम्पूर्ण कराई हैं। उन्होंने ये शादी पूरी सादगी से संपन्न की और दहेज संस्कृति पर बड़ा संदेश दिया।
जानकारी के मुताबिक कप्तानगंज थानाक्षेत्र के लखमीपुर गांव के रहने वाले रविंद्र यादव ग्राम पंचायत अधिकारी हैं। उनकी पत्नी गीता देवी मां चनरमी देवी पीजी कॉलेज की प्रबंधक हैं। उनके बेटे भी उच्च शिक्षा ग्रहण करने के बाद अध्यापन का कार्य करते हैं। 12 मार्च को उनके बेटे की बारात अंबेडकर नगर के मालीपुर के पास बीवीपुर भूसौली गांव मे रमेश यादव के गई। जहां पर आदित्य यादव और रेखा यादव की विवाह रस्में मात्र 101 कन्यादान लेकर संपन्न की गईं।
ग्राम पंचायत अधिकारी रविंद्र यादव ने कहा कि जिस तरह से समाज मे शादी में फिजूलखर्ची होती है उसकी कोई जरूरत नहीं है। समाज को दहेज रूपी बुराई से बाहर लाने के लिए किसी को तो पहल करनी ही होगी। पैसे के दिखावे में उड़ाने के बजाय इसे बच्चों की शिक्षा और अच्छे कार्यों में लगाना चाहिए। जरूरतमंदों की मदद करनी चाहिए और गरीब बेटियों की शादी करवानी चाहिए। इससे लोगों को सहूलियत मिल सके।
प्रबंधक गीता यादव ने बताया कि उनका बेटा आदित्य यादव भी इस दहेज प्रथा के खिलाफ है। शुरू से ही उसका भी यही मन था कि जिस जगह उसकी शादी होगी तो वो बिना दहेज के उस घर की बेटी को अपनी बहू के रूप में स्वीकार करेगा।
इस फिजूलखर्ची के खिलाफ व युवाओं में और लोगों को भी जागरूक करेगा ताकि समाज को एक सही दिशा मिले। उनकी इस सोच की पूरे क्षेत्र में प्रशंसा हो रही है।
अतरौलिया के विधायक डा. संग्राम यादव ने भी इस कदम को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि दहेज प्रथा समाज के लिए नासूर है। ऐसे कार्यों से समाज में चेतना बढ़ेगी और लोग दहेज जैसी कुप्रथा को दूर भगाएंगे।
