रिपोर्ट: आशीष निषाद

अतरौलिया, आज़मगढ़। कभी विकास की नई सुबह का सपना दिखाने वाला अहरौला का पराग मिल्क प्लांट आज खंडहर में तब्दील होता जा रहा है। समाजवादी पार्टी के कार्यकाल में बड़ी उम्मीदों के साथ शुरू हुई यह परियोजना आज सवालों के घेरे में है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने और किसानों की आमदनी बढ़ाने का वादा कर शुरू किया गया यह प्लांट अब सरकार की नाकामी और दिखावटी राजनीति का प्रतीक बन चुका है।

क्षेत्र के विधायक डॉ. संग्राम यादव ने खुद इस फैक्ट्री का दौरा कर इसकी जमीनी हकीकत देखी और गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा यह सिर्फ एक प्लांट नहीं, किसानों की उम्मीदों का केंद्र था। आज इसकी बदहाली दर्शाती है कि भाजपा सरकार ने केवल दिखावा किया, ठोस योजनाएं कभी अमल में नहीं लाई गईं।

विधायक डॉ. यादव ने  कहा कि जब यह प्लांट शुरू हुआ था, तब किसानों को भरोसा था कि उन्हें दूध का सही मूल्य मिलेगा, और बिचौलियों से मुक्ति मिलेगी। लेकिन कुछ सालों में ही यह परियोजना लापरवाही, भ्रष्टाचार और राजनीतिक उदासीनता की भेंट चढ़ गई।

लेदौरा गांव स्थित इस पराग मिल्क प्लांट की हालत यह है कि मशीनें जंग खा रही हैं, उत्पादन पूरी तरह ठप है और कर्मचारी भविष्य को लेकर चिंतित हैं। हजारों दुग्ध उत्पादकों की आजीविका पर संकट मंडरा रहा है। यह हाल तब है जब सरकारें लगातार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने, रोजगार पैदा करने और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की बात करती हैं। सवाल यह उठता है कि जब एक पहले से स्थापित परियोजना को बचाया नहीं जा सका, तो नए वादों पर कैसे भरोसा किया जाए?

विधायक डॉ0 संग्राम यादव ने इस मामले में भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि यह पूरा प्रकरण बताता है कि  भाजपा सरकार सिर्फ चुनावी वादों में विकास बेचता है, लेकिन जमीनी कार्य में पूरी तरह फेल है। उन्होंने कहा जो सरकार  शुरू की गई योजनाओं को जीवित नहीं रख सकी, उसकी नीयत और नीति दोनों पर सवाल उठाना लाज़मी है।

विधायक ने सरकार से मांग की है कि इस मिल्क प्लांट को पुनर्जीवित करने के लिए शीघ्र उच्चस्तरीय हस्तक्षेप किया जाए ताकि क्षेत्र के किसान और युवा फिर से विकास की मुख्यधारा में जुड़ सकें।