आजमगढ़। महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय आजमगढ़ के प्रशासनिक भवन स्थित कुलपति सभागार में रागेय राघव शोधपीठ के तत्वावधान में वृहद साहित्यिक समारोह का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में मां विंध्यवासिनी विश्वविद्यालय, मिर्जापुर की कुलपति प्रो. शोभा गौड़ उपस्थित रहीं। समारोह में रागेय राघव के साहित्यिक अवदान, सामाजिक सरोकारों और हिंदी साहित्य में उनकी विशिष्ट भूमिका पर गहन विमर्श हुआ।
मिली जानकारी के अनुसार, कार्यक्रम का शुभारंभ कुलपति प्रो. संजीव कुमार और मुख्य अतिथि प्रो. शोभा गौड़ द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पित कर एवं दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। अपने उद्बोधन में प्रो. शोभा गौड़ ने कहा कि रागेय राघव के साहित्य पर “साहित्य समाज का दर्पण है” की उक्ति पूरी तरह सटीक बैठती है। अहिंदी भाषी परिवेश में पले-बढ़े रागेय राघव ने काव्य, उपन्यास, कहानी और रिपोर्ताज सहित गद्य-पद्य की विविध विधाओं में सशक्त लेखन किया। उनका साहित्य यथार्थपरक था, जिसमें जनसामान्य के संघर्ष, सामाजिक विषमताएं और मानवीय संवेदनाएं ही नहीं, बल्कि उनके समाधान के संकेत भी मिलते हैं।
अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने कहा कि रागेय राघव संपूर्ण साहित्यकार थे, जिन्हें किसी एक विधा में सीमित नहीं किया जा सकता। आगरा विश्वविद्यालय से जुड़ाव, ब्रजभाषा पर अद्भुत पकड़, अल्पायु में कालजयी कृतियों की रचना और शेक्सपियर के नाटकों का सरल हिंदी अनुवाद उन्हें विशिष्ट बनाता है। उन्होंने छुआछूत, जातिगत भेदभाव, नारी दुर्दशा और सामाजिक कुरीतियों पर निर्भीक टिप्पणी की, जिससे उनका साहित्य आज भी प्रासंगिक है। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
कार्यक्रम में विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया।
स्वागत कार्यक्रम प्रभारी प्रो. सुजीत कुमार श्रीवास्तव एवं डॉ. विजय प्रकाश उपाध्याय ने किया, जबकि संचालन डॉ. त्रशिका श्रीवास्तव ने किया।
