राजीव चौहान

आज़मगढ़ । जिले में शहर से लेकर गांव तक ‘फैमिली रेस्टोरेंट’ के नाम पर चल रहे अनैतिक देह व्यापार का खेल अब किसी से छिपा नहीं है। यह भी नहीं कहा जा सकता कि इसकी जानकारी स्थानीय पुलिस को नहीं है।

समय-समय पर ऐसे मामलों का खुलासा होता रहा है, छापेमारी भी की जाती रही है, लेकिन अधिकतर मामलों में कार्रवाई अधूरी रह जाती है। नतीजा यह होता है कि कुछ दिन माहौल शांत रहता है और फिर वही गंदा धंधा उसी रफ्तार से दोबारा शुरू हो जाता है। कप्तानगंज का ताज़ा मामला पूरे सिस्टम, उसकी कमजोरियों और अंदरूनी सच्चाई को सामने लाता है।

कप्तानगंज क्षेत्र के जिस रेस्टोरेंट पर सोमवार को पुलिस ने छापेमारी कर देह व्यापार का पर्दाफाश किया, वह कोई नया मामला नहीं है। इससे पहले 13 सितंबर को ट्रेनी सीओ अरुण परासर के नेतृत्व में इसी रेस्टोरेंट पर छापा पड़ा था। उस दौरान रेस्टोरेंट में संदिग्ध गतिविधियां पाई गई थीं, लेकिन आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार केवल एक नाबालिग किशोरी की बरामदगी दर्शाई गई। इसके बाद रेस्टोरेंट संचालक को चेतावनी देकर छोड़ दिया गया।

उस समय स्थानीय लोगों को उम्मीद थी कि अब इस रेस्टोरेंट में चल रहा गंदा धंधा बंद हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

पहली छापेमारी के बाद भी रेस्टोरेंट संचालक ने अपना धंधा बेरोकटोक जारी रखा। स्थानीय लोगों का आरोप है कि लगातार शिकायतें की जाती रहीं, लेकिन स्थानीय पुलिस की ओर से कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई।

  सोमवार को एक बार फिर सीओ के नेतृत्व में छापेमारी हुई, जहां चार जोड़े आपत्तिजनक हालत में मिले। इस बार पुलिस ने रेस्टोरेंट संचालक समेत कुल नौ लोगों को गिरफ्तार किया। पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई आईजीआरएस पोर्टल पर की गई शिकायत के आधार पर की गई

अगर दोनों छापेमारियों पर नजर डाली जाए तो एक बात साफ दिखती है कि दोनों ही बार कार्रवाई सीओ के नेतृत्व में हुई, जबकि स्थानीय पुलिस ने शिकायतों के बावजूद कोई पहल नहीं की। यह मानना मुश्किल है कि स्थानीय पुलिस को इस रेस्टोरेंट में लंबे समय से चल रहे अवैध धंधे की जानकारी नहीं थी। यह स्थिति कई सवाल खड़े करती है।


हकीकत यह है कि ऐसे रेस्टोरेंट संचालक अक्सर दबंग माने जाते हैं और स्थानीय लोगों का आरोप है कि उन्हें राजनीतिक संरक्षण भी हासिल रहता है। यही कारण बताया जाता है कि स्थानीय पुलिस सीधे कार्रवाई करने से बचती रही। सबसे गंभीर पहलू यह है कि जब भी कोई व्यक्ति ऐसे रेस्टोरेंट के खिलाफ थाने में शिकायत करता है, तो उसे डराने-धमकाने के आरोप लगते रहे हैं। कई मामलों में शिकायतकर्ताओं पर जानलेवा हमले तक होने की बातें सामने आई हैं।


इसी सगड़ी तहसील के एक नगर पंचायत में कुछ माह पहले सत्तारूढ़ दल के एक सक्रिय पदाधिकारी ने एक रेस्टोरेंट संचालक के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत दर्ज होते ही उस पर जानलेवा हमला हुआ। रेस्टोरेंट पर कार्रवाई तो छोड़िए  मामले में  भाजपा कार्यकर्ताओं पर जानलेवा हमला करने वाले आरोपियों पर भी कार्रवाई में आनाकानी की गईं। पीड़ित भाजपा पदाधिकारी ने पुलिस पर रेस्टोरेंट संचालकों से मिलीभगत के आरोप लगाए और सोशल मीडिया पर पुलिस के खिलाफ अभियान भी छेड़ा, लेकिन कहा जाता है कि मजबूत राजनीतिक संरक्षण के चलते उस मामले में भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी।


कप्तानगंज का रेस्टोरेंट संचालक भी इसी श्रेणी में गिना जा रहा है। जब स्थानीय स्तर पर शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई, तो शिकायतकर्ता ने आईजीआरएस पोर्टल का सहारा लिया। साथ ही बताया जा रहा है कि राजनीतिक स्तर पर भी पैरवी कराई गई। सत्ता में मजबूत पकड़ रखने वाले एक जनप्रतिनिधि के हस्तक्षेप के बाद पुलिस हरकत में आई और छापेमारी हुई। नतीजा यह निकला कि शिकायतकर्ता की शिकायत पूरी तरह सही साबित हुई।


यह मामला सिर्फ एक रेस्टोरेंट तक सीमित नहीं है। शहर से लेकर गांव तक ऐसे कई रेस्टोरेंट खुलेआम चल रहे हैं, जहां फैमिली रेस्टोरेंट की आड़ में अनैतिक देह व्यापार का गंदा खेल जारी होने के आरोप लगते रहे हैं। सवाल यह है कि क्या कार्रवाई सिर्फ शिकायत और दबाव के बाद ही होगी, या फिर सिस्टम खुद आगे बढ़कर ऐसे गोरखधंधों पर स्थायी लगाम लगाएगा।