आजमगढ़ । नगर के हरिऔध कला केंद्र में सोमवार को अंतरराष्ट्रीय भोजपुरी संगम का भव्य आयोजन हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य भोजपुरी भाषा, साहित्य और लोक संस्कृति को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाना रहा, जिसमें देश-विदेश से आए विद्वानों और अतिथियों ने सहभागिता की।

उद्घाटन सत्र की मुख्य अतिथि मॉरीशस से आईं भोजपुरी स्पीकिंग यूनियन की चेयरपर्सन डॉ. वर्षा रानी विशेश्वर ‘दुल्चा’ ने कहा कि जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी महान होती है। उन्होंने बताया कि उनके पूर्वज लगभग पांच पीढ़ी पहले मॉरीशस गए थे, लेकिन आज भी वहां भारतीय, विशेषकर भोजपुरी संस्कृति जीवंत रूप में संरक्षित है।
डॉ. वर्षा रानी ने भोजपुरी भाषा को संरचनात्मक मजबूती देने और वैश्विक मान्यता की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि मॉरीशस में स्कूलों के पाठ्यक्रम में भोजपुरी को अनिवार्य विषय के रूप में शामिल करने की तैयारी चल रही है, जो भाषा के इतिहास में बड़ी उपलब्धि होगी। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी के जुड़ाव के बिना भाषा का समुचित विकास संभव नहीं है।
मुख्य अतिथि नेपाल के मधेशी आयोग के प्रथम प्रमुख आयुक्त डॉ. विजय कुमार दत्त ने कहा कि आजमगढ़ ऋषि-मुनियों की तपोस्थली रही है और इसका संबंध भगवान श्रीराम से भी जुड़ा है। उन्होंने भोजपुरी को लोक संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बताते हुए कहा कि नेपाल में अधिकांश लोग भोजपुरी समझते हैं, भले ही बोल न पाते हों, और भाषा के माध्यम से भारत-नेपाल के संबंध अत्यंत आत्मीय हैं।
लीबिया के पूर्व प्रोफेसर अनिल के प्रसाद ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भोजपुरी की पहचान पर अपने विचार रखे। विशिष्ट अतिथि एवं मदन मोहन मालवीय हिन्दी पत्रकारिता संस्थान के पूर्व निदेशक प्रो. ओम प्रकाश सिंह ने कहा कि भोजपुरी हमारी पहचान है। महापौर गोरखपुर डॉ. मंगलेश कुमार श्रीवास्तव, भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष सहजानंद राय और सूरज प्रकाश श्रीवास्तव ने भी अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम में प्रो. जगदंबा दुबे, प्रकाश प्रियांशु, भोजपुरी साहित्यकार राम बहादुर राय, प्रो. गीता सिंह सहित अन्य विद्वानों ने भोजपुरी के विविध पक्षों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम संयोजक डॉ. अरविंद चित्रांश ने अतिथियों का स्वागत किया, अध्यक्षता डॉ. निर्मल श्रीवास्तव ने की तथा संचालन डॉ. ईश्वर चंद्र त्रिपाठी और प्रिया तिवारी ने किया।