राजीव चौहान

आजमगढ़। कहते हैं नाव अभी बनी नहीं और पतवार थामने वालों में पहले ही झगड़ा शुरू हो गया’  और इन दिनों यह कहावत आजमगढ़ की राजनीति पर बिल्कुल फिट बैठ रही है। 1279 करोड़ के दक्षिण-पूर्व बाईपास (रिंग रोड) ने शहर की सियासत में आग लगा दी है। सड़क बनने से पहले ही श्रेय की रेस में नेता आमने-सामने आ गए हैं। मंत्रालय के दो पत्र सामने आते ही सियासी पारा हाई हो गया। अब लड़ाई सड़क पर नहीं, सीधे फेसबुक की दीवारों पर लड़ी जा रही है।

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने आजमगढ़ में 15 किलोमीटर लंबे 4-लेन दक्षिण-पूर्व बाईपास (रिंग रोड)को मंजूरी दी है, जिसकी लागत करीब 1279.13 करोड़ रुपये है। यह सड़क शहर को जाम से राहत दिलाने और विकास की रफ्तार बढ़ाने वाली बताई जा रही है। लेकिन बाईपास बनने से पहले ही इसके श्रेय को लेकर नेताओं में ऐसी खींचतान शुरू हो गई है कि मामला अब सीधे सोशल मीडिया की अदालत में पहुंच चुका है।

पूर्व सांसद दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ और सपा सांसद धर्मेंद्र यादव—दोनों के समर्थक  इस परियोजना का हीरो बताने में जुटे हैं। विवाद तब और भड़क गया जब मंत्रालय के मंत्री नितिन गडकरी के दो अलग-अलग पत्र सामने आए, दोनों की तारीख 2 फरवरी और पत्रांक संख्या 03451 एक जैसी। बस फिर क्या था… सपा समर्थक फेसबुक पर निरहुआ को ‘झूठा’ बताकर पोस्टों की बाढ़ ला रहे हैं, तो वहीं भाजपा समर्थक भी पलटवार में पूरी ताकत झोंक चुके हैं। कमेंट बॉक्स रणभूमि बन गया हैकहीं ‘फर्जी श्रेय’ तो कहीं ‘असली सांसद’ के नारे उड़ रहे हैं। कई तो अति उत्साह में आपत्तिजनक बातों को भी पोस्ट कर दिए है।

पोस्ट पर पोस्ट और कमेंट पर कमेंट  सोशल प्लेटफार्म फेसबुक अब डिजिटल कुश्ती अखाड़ा बन चुका है। हर स्क्रीनशॉट के साथ सियासत और गर्म हो रही है। समर्थक अपने-अपने नेताओं को विकास पुरुष साबित करने में जुटे हैं। यही नही बीती रात दोनों तरफ से कुछ ऐसे लोग भी प्रकट हुए और बयान भी ऐसे दे रहे थे मानों पार्टी ने तुरंत उन्हें प्रवक्ता घोषित कर दिया हो। लेकिन इन सब के बीच आम जनता पूछ रही है। सड़क कब बनेगी ? राजनीति कब थमेगी?

दिलचस्प बात यह है कि दोनों सांसद फिलहाल खामोश हैं, लेकिन उनके समर्थक ऐसे भिड़े हुए हैं जैसे जंग के मैदान में उतर आए हों। कोई किसी से कम नहीं है। कोई पोस्ट को जीत बता रहा है, तो कोई कमेंट को करारा जवाब मान रहा है। हालात ऐसे हैं मानो फेसबुक पर नहीं, सियासी युद्धभूमि में ट्रॉफी की लड़ाई चल रही हो। हर समर्थक अपने नेता को विजेता घोषित करने में लगा है, भले ही सड़क अभी कागजों में ही दौड़ रही हो। आजमगढ़ में रिंग रोड भले बनना शुरू नहीं हुआ हो, लेकिन सोशल मीडिया पर सपा–भाजपा समर्थक जीत का जश्न अभी से मनाते दिख रहे हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि समर्थकों की सोशल लड़ाई कब शांत होती है और रिंग रोड कब बनना शुरू होता है।

कारण, अभी तो ये अंगड़ाई है, आगे शिलान्यास और उदघाटन की लड़ाई बाकी है।