आज़मगढ़। यूक्रेन–रूस युद्ध की आग भले ही हजारों किलोमीटर दूर धधक रही हो, लेकिन उसकी तपिश आज़मगढ़ और आसपास के जिलों तक महसूस की जा रही है। बेहतर भविष्य और मोटी तनख्वाह के सपने दिखाकर रूस भेजे गए पूर्वांचल के कई युवा आज या तो जान गंवा चुके हैं, या फिर लापता हैं। बीते करीब 10 महीनों से परिजन अपनों की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं, लेकिन तीन युवाओं का अब तक कोई सुराग नहीं मिल सका है। युद्ध की विभीषिका के बीच आज़मगढ़ और मऊ के ये परिवार आज भी उम्मीद की एक किरण थामे बैठे हैं।


यूक्रेन–रूस युद्ध लगातार भयावह रूप लेता जा रहा है। इस युद्ध में उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ और मऊ जनपद के युवाओं के फंसे होने का मामला सामने आने के बाद से परिजनों की चिंता थमने का नाम नहीं ले रही है। करीब 10 महीने पहले यह खुलासा हुआ था कि कुछ युवाओं को रूस में सुरक्षा गार्ड, सहायक और रसोइये की नौकरी का झांसा देकर भेजा गया था। हर महीने करीब दो लाख रुपये वेतन का वादा किया गया, लेकिन रूस पहुंचते ही उन्हें जबरन युद्ध के मैदान में उतार दिया गया।


इस युद्ध में आज़मगढ़ के कन्हैया यादव और मऊ के श्यामसुंदर व सुनील यादव की मौत हो चुकी है। वहीं आज़मगढ़ के राकेश यादव और मऊ के बृजेश यादव युद्ध में घायल होने के बाद किसी तरह स्वदेश लौट आए और फिलहाल अपने घर पर हैं।


हालांकि, इस पूरे मामले में अब भी तीन युवा लापता हैं, जिनका अब तक कोई पता नहीं चल सका है। इनमें आज़मगढ़ शहर के किला क्षेत्र के निवासी अजहरुद्दीन, खोजापुर माधोपट्टी गांव के योगेंद्र यादव और सठियांव क्षेत्र के रहने वाले हुमेश्वर प्रसाद शामिल हैं। परिजन इनकी तलाश में आज़मगढ़ से लेकर दिल्ली तक के चक्कर काट चुके हैं। विदेश मंत्रालय से लेकर रूस तक गुहार लगाई गई, लेकिन अब तक कोई ठोस जानकारी नहीं मिल पाई है।
अजहरुद्दीन के भाई खुद रूस जाकर भी अपने भाई की खोज कर चुके हैं, लेकिन उन्हें भी निराश होकर लौटना पड़ा। तीनों युवाओं की कोई आधिकारिक जानकारी न मिलने से परिवारों की बेचैनी लगातार बढ़ती जा रही है।


हुमेश्वर प्रसाद के पिता इंदू प्रसाद का दर्द छलक उठता है। वे कहते है कि हम लोग हुमेश्वर की सुरक्षित वापसी को लेकर काफी प्रयास किया लेकिन अब तक हमारी कहीं भी सुनवाई नहीं हुई। हमें इस बात का भी पता नहीं चल पा रहा है कि वह सुरक्षित है या नहीं, इसे लेकर हम काफी चिंतित हैं। हमें आजमगढ़ से लेकर दिल्ली तक इसके लिए प्रयास कर चुके हैं लेकिन कुछ नहीं बता रहे हैं। पूरा परिवार काफी चिंतित है।