आज़मगढ़।  जिले के पवई विकास खंड में सामने आई वित्तीय अनियमितताओं के मामले में जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी ने मुतकल्लीपुर और मकसुदिया गांव के ग्राम प्रधानों के वित्तीय व प्रशासनिक अधिकार सीज कर दिए हैं। साथ ही दोनों मामलों में अंतिम जांच के आदेश दिए गए हैं, जबकि संबंधित ग्राम सचिवों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है। जल्द ही निलंबन की कार्रवाई भी हो सकती है।


पवई विकास खंड क्षेत्र के मकसुदिया गांव निवासी राधिका चौहान पत्नी मदन चंद्र, अभिषेक कुमार, तेज बहादुर चौहान, सीताराम आदि की शिकायत पर जिलाधिकारी ने 25 अगस्त 2025 को जिला उद्यान अधिकारी को जांच अधिकारी नामित किया था। सहयोग के लिए अधिशासी अभियंता जल निगम ग्रामीण को तकनीकी अधिकारी बनाया गया। जांच पूरी होने के बाद 18 नवंबर 2025 को रिपोर्ट डीएम को सौंपी गई। रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर 2 दिसंबर 2025 को ग्राम प्रधान सुदामा देवी व सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। 19 दिसंबर 2025 को प्रस्तुत स्पष्टीकरण संतोषजनक न होने पर डीएम ने ग्राम प्रधान के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार सीज कर दिए और परियोजना निदेशक जिला ग्राम्य विकास अभिकरण को अंतिम जांच अधिकारी नामित किया।


इसी क्रम में पवई विकास खंड के मुतकल्लीपुर गांव में दिलीप कुमार मौर्य व महेंद्र प्रताप श्रीवास्तव की शिकायत पर 1 मई 2025 को जिला उद्यान अधिकारी को जांच अधिकारी तथा अधिशासी अभियंता प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग को तकनीकी अधिकारी नियुक्त किया गया था। जांच रिपोर्ट 4 सितंबर 2025 को प्रस्तुत की गई। दोषी पाए जाने पर 15 अक्तूबर 2025 को ग्राम प्रधान कमला प्रसाद मौर्य को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, लेकिन स्पष्टीकरण न देने पर डीएम ने उनके भी वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार सीज करते हुए परियोजना निदेशक जिला ग्राम्य विकास अभिकरण को अंतिम जांच अधिकारी नामित कर दिया।

डीपीआरओ पवन कुमार ने बताया कि
ग्रामीणों की शिकायत पर कमेटी गठित कर पवई ब्लॉक के मकसुदिया व मुतकल्लीपुर में शिकायतों की जांच कराई गई, जहां शिकायतें सही पाई गई थीं। इसमें ग्राम प्रधान व सचिव की मिलीभगत उजागर हुई। वित्तीय अनियमितता के मामले में दोनों ग्राम प्रधानों के अधिकार सीज करते हुए सचिवों के विरुद्ध नोटिस जारी कर विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है।