आजमगढ़। जिले में पंचायत स्तर पर वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर मामले सामने आने के बाद जिला पंचायत राज अधिकारी ने दो ग्राम पंचायतों के प्रधानों के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार तत्काल प्रभाव से सीज कर दिए हैं। दोनों मामलों में अलग-अलग जांच अधिकारियों की नियुक्ति कर त्वरित अंतिम जांच के आदेश जारी किए गए हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम सिधौना में प्रारंभिक जांच में कुल 12 बिंदुओं पर 28,750 रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया जाना पाया गया। जांच में सामने आया कि एक ही मजदूर को एक ही दिन में मनरेगा मस्टर रोल और ग्राम पंचायत/राज्य वित्त मस्टर रोल में हाजिरी दिखाकर दोहरा भुगतान किया गया था।
जांच अधिकारी ने तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव धर्मेंद्र सरोज को मुख्य रूप से जिम्मेदार बताया और पूरी राशि की वसूली की संस्तुति की। वहीं ग्राम प्रधान अंजू देवी के वित्तीय अधिकार सीज कर दिए गए हैं तथा उपायुक्त श्रम रोजगार को जांच अधिकारी और लघु सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता को तकनीकी सहयोगी नियुक्त किया गया है। इस मामले में शिकायतकर्ता संजीव कुमार सिंह द्वारा शपथपत्र सहित विस्तृत साक्ष्य प्रस्तुत किए गए थे।
दूसरे मामले में विकास खंड तरवां के ग्राम पंचायत बहलोलपुर में प्रधान अजय सिंह पर मनरेगा कार्यों में तालाब खुदाई में घटिया काम, प्राक्कलन के विपरीत कार्य, गाइडलाइन उल्लंघन और लगभग 3.66 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता के आरोप प्रथम दृष्टया सत्य पाए गए। संबंधित जांच में तत्कालीन सचिव, तकनीकी सहायक, रोजगार सेवक सहित अन्य अधिकारियों को भी दोषी माना गया है।
नियमों के तहत प्रधान अजय सिंह के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार सीज कर दिए गए हैं। अंतिम जांच के लिए उप निदेशक कृषि आजमगढ़ को जांच अधिकारी और अधिशासी अभियंता, विद्युत खंड कप्तानगंज को तकनीकी सहयोगी नियुक्त किया गया है। इस मामले में शिकायतकर्ता बृजराज यादव तथा अन्य ग्रामीणों ने कई बार जिलाधिकारी, भारत सरकार पोर्टल और जनसुनवाई में शिकायतें दर्ज कराई थीं।
