आजमगढ़। जिले के मुबारकपुर थाना क्षेत्र में शिया-सुन्नी दंगे के दौरान हुए अली अकबर हत्याकांड में 27 साल बाद अदालत ने फैसला सुनाया है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश जय प्रकाश पांडेय की अदालत ने मंगलवार को तीन सगे भाइयों समेत 12 लोगों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास और प्रत्येक को 66 हज़ार 500 का अर्थदंड भी लगाया है। सुनवाई के दौरान चार आरोपियों की पहले ही मौत हो चुकी है।

अभियोजन पक्ष के अनुसार मुबारकपुर थाना क्षेत्र के गांव पूरा सोफी में 10 फीट जमीन के लिए शिया और सुन्नी समुदाय के लोगों में विवाद चल रहा था। 27 अप्रैल 1999 को शिया समुदाय के लोग मोहर्रम का जुलूस निकाल रहे थे। इसी दौरान दूसरे पक्ष की ओर से जुलूस रोकने पर विवाद हो गया। पथराव भी हुआ था। पुलिस प्रशासन ने किसी तरह हालात काबू किए थे। शाम को पूरा ख्वाजा के अली अकबर ताजिया दफन करने हैदराबाद स्थित शाह के पंजे पर गए थे। इसके बाद वह लापता हो गए थे। अली अकबर के पुत्र जैगम ने 28 अप्रैल को थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई थी। 30 अप्रैल को अली अकबर की सिर कटी लाश राजा भाट के पोखरे में मिली थी लेकिन सिर आज तक नहीं मिल सका। 30 अप्रैल को ही भतीजे नासिर हुसैन ने मुबारकपुर थाने में हत्या की प्राथमिकी कराई थी। पुलिस की विवेचना में सामने आया कि मोहर्रम के जुलूस से लौटते समय अली अकबर की पीटकर हत्या कर दी गई थी।

इस मामले में पुलिस ने 16 लोगों के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की थी। सुनवाई के दौरान हाजी मोहम्मद सुलेमान, नजीबुल्लाह, हमीदुल्लाह उर्फ झीनक और हाजी अब्दुल खालिक की मौत हो चुकी है।

अभियोजन पक्ष की ओर से डीजीसी फौजदारी एवं एडीजीसी ने 9 गवाहों की न्यायालय में गवाही कराई। अदालत ने 13 फरवरी को ही 12 आरोपियों को दोषी करार दिया और अदालत ने सजा के बिंदु पर सुनवाई के लिए 17 फरवरी मंगलवार की तिथि तय की थी ।

मंगलवार आज सजा पर सुनवाई करते हुए जिला एवं सत्र न्यायाधीश जय प्रकाश पांडेय की अदालत ने हुसैन अहमद निवासी हैदराबाद, मोहम्मद अयूब फैजी, फहीम अख्तर, असरार अहमद, मोहम्मद याकूब सभी निवासी दुल्हनपूरा, अली जहीर, इरशाद निवासी पूरा सोफी, मोहम्मद असद, अफजाल, अलाउद्दीन, दिलशाद व वसीम निवासी हैदराबाद को आजीवन कारावास की सजा और प्रत्येक को 66 हज़ार 500 रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। इनमें मोहम्मद अयूब फैजी, फहीम अख्तर और मोहम्मद याकूब सगे भाई हैं।