आज़मगढ़। आज़मगढ़ विकास प्राधिकरण (एडीए) के खिलाफ गुरुवार को ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने सियासी हलकों में हलचल मचा दी। खास बात यह रही कि भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए धरने की अगुवाई भारतीय जनता पार्टी के नेता ने ही की। अपनी ही सरकार में एडीए की कार्यशैली से नाराज भाजपा नेताओं के साथ ही पहले ही दिन कई राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने भी एडीए के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
भारतीय जनता पार्टी आजमगढ़ के नेता व उत्तर प्रदेश अभिभावक महासंघ के सचिव गोविन्द दुबे के नेतृत्व में डॉ. अम्बेडकर पार्क में गुरुवार को एडीए के खिलाफ जोरदार धरना-प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने एडीए में व्याप्त भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और तानाशाही रवैये को लेकर जमकर नारेबाजी की।
धरने को संबोधित करते हुए गोविन्द दुबे ने तीखे तेवर दिखाते हुए कहा कि योगी सरकार भ्रष्टाचार मुक्त उत्तर प्रदेश का सपना देख रही है, लेकिन आज़मगढ़ विकास प्राधिकरण उसी सरकार की छवि को धूमिल करने पर तुला है। उन्होंने कहा कि एडीए की कार्यशैली अब इतनी बदहाल हो चुकी है कि वह भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का पर्याय बन गया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भू-उपयोग परिवर्तन, नक्शा पास कराने, अवैध निर्माण को संरक्षण देने और नियमों के खुले उल्लंघन में एडीए की भूमिका संदिग्ध है। आम जनता को नोटिस और दबाव के जरिए परेशान कर शोषण किया जा रहा है। दुबे ने साफ कहा कि जब तक इस भ्रष्ट तंत्र पर लगाम नहीं लगेगी, तब तक एडीए के खिलाफ संघर्ष जारी रहेगा।
धरने में शामिल शर्मानंद पाण्डेय ने एडीए पर दोहरी नीति अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि तहसील सदर के नीबी क्षेत्र में गाटा संख्या 139 को कृषिगत हरित जोन बताकर उसकी बाउंड्री और अस्थायी निर्माण को ध्वस्त कर दिया गया, जबकि उसी गाटे की अन्य 12 रजिस्ट्री पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने कहा कि इस तरह की एकपक्षीय कार्रवाई से जनता में भारी रोष है।
पाण्डेय ने बताया कि धरने के जरिए चार सूत्री मांगें रखी गई हैं, जिनमें एडीए के सभी संदिग्ध कार्यों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच, दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों पर कठोर कार्रवाई, नक्शा स्वीकृति और निर्माण प्रक्रिया को पारदर्शी, ऑनलाइन व ट्रैक योग्य बनाना तथा आम लोगों की शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण शामिल है।
समाजसेवी डीएन सिंह ने कहा कि कानून की व्यवस्थाएं लोकहित में होती हैं, लेकिन एडीए के अधिकारी, कर्मचारी और चतुर्थ श्रेणी कर्मी अपने नियम खुद बनाकर खुलेआम धनउगाही कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि जनता के शोषण को अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
धरने की सबसे अहम बात यह रही कि पहले ही दिन भाजपा नेताओं के साथ कई अन्य राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के लोग भी एडीए के खिलाफ खुलकर सामने आ गए। इससे संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में एडीए के खिलाफ आंदोलन और तेज हो सकता है।
धरने में डॉ. राकेश राय, अरुण चौरसिया, अनिल तिवारी, सुजीत मिश्रा, देवनारायण सिंह, बलबीर सिंह, युधिष्ठिर दूबे, संदीप सिंह रिंकू, आशीष तिवारी, दिना मिश्रा सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
