आजमगढ़। सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में आजमगढ़ जनपद की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। हादसों के आंकड़ों में आजमगढ़ प्रदेश में 20वें और देश में 98वें स्थान पर पहुंच चुका है, जो यातायात व्यवस्था और सड़क सुरक्षा को लेकर प्रशासन व आमजन दोनों के लिए बड़ी चेतावनी मानी जा रही है।
नवंबर माह में जनपद में कुल 88 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें करीब 49 लोगों की मौत हो गई, जबकि 54 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। वहीं बीते 11 महीनों में सड़क हादसों में कुल 350 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि सैकड़ों लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
ये आंकड़े न सिर्फ चौंकाने वाले हैं, बल्कि प्रशासन और आम जनता दोनों के लिए गंभीर चेतावनी भी हैं। जानकारों के अनुसार सड़क दुर्घटनाओं की मुख्य वजह तेज रफ्तार, यातायात नियमों की अनदेखी, ओवरलोडिंग, खराब सड़कों की स्थिति और पर्याप्त ट्रैफिक व्यवस्था का अभाव है।
कई प्रमुख मार्गों पर न तो स्पीड ब्रेकर हैं और न ही चेतावनी संकेतक लगे हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा और बढ़ जाता है। बार-बार हादसों के बावजूद ठोस और स्थायी कदम न उठाए जाने से आमजन में नाराजगी भी बढ़ रही है।
शासन के निर्देश पर जिले में यातायात व्यवस्था को मजबूत करने और सड़क हादसों की रोकथाम के उद्देश्य से गठित क्रिटिकल कॉरिडोर (सीसी) टीम भी अभी तक पूरी तरह कारगर साबित नहीं हो पा रही है।
सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर सुधारने के लिए पीडब्ल्यूडी और एनएचएआई को ठोस पहल करनी होगी। सड़कों पर सफेद पट्टी, चेतावनी संकेतक, अंधे मोड़ों और घुमावदार मार्गों पर झाड़ियों की कटाई-छंटाई जैसे कार्य जल्द से जल्द पूरे कराए जाने की आवश्यकता है।
हादसों में जनहानि को न्यूनतम करने के लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की शून्य मृत्यु जिला कार्यक्रम (जेडएफडी) योजना के तहत इंटीग्रेटेड रोड एक्सीडेंट डेटाबेस के माध्यम से वर्ष 2023 व 2024 में घटित सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़ों के आधार पर आजमगढ़ को एक्सीडेंटल डेथ रिडक्शन डिस्ट्रिक्ट के रूप में चिह्नित किया गया है।
एसपी यातायात विवेक त्रिपाठी ने बताया कि विगत दो माह में हुई सभी दुर्घटनाओं के कारणों की विवेचना की जा रही है। दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए यातायात पुलिस शून्य मृत्यु जिला कार्यक्रम के तहत लगातार कार्रवाई कर रही है। अब तक 50 हजार से अधिक वाहनों पर रिफ्लेक्टर टेप लगाया जा चुका है और अभियान चलाकर लोगों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
