आजमगढ़। करीब आठ वर्ष पूर्व घर में सो रही 13 वर्षीय मासूम बालिका के साथ छेड़खानी के मुकदमे में सुनवाई पूरी करने के बाद अदालत ने एक दोषी को तीन वर्ष के कठोर कारावास तथा बीस हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई। यह फैसला विशेष न्यायाधीश पोक्सो कोर्ट की जज शैलजा राठी ने शुक्रवार को सुनाया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार देवगांव थाना क्षेत्र के एक गांव में 15 अप्रैल 2017 की रात पीड़िता अपने घर में सो रही थी। पीड़िता के पिता और भाई उसे दिन घर पर नहीं थे। इस बात को जानते हुए गांव का ही चंद्रशेखर पीड़िता के घर में घुस गया और उसके साथ गलत हरकत करने लगा। पीड़िता के चिल्लाने पर आरोपी चंद्रशेखर वहां से भाग गया। पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद चार्जशीट न्यायालय में प्रेषित किया। अभियोजन पक्ष की तरफ से विशेष लोक अभियोजक अवधेश कुमार मिश्रा तथा सहायक शासकीय अधिवक्ता दौलत राम यादव ने कुल पांच गवाहों को न्यायालय में परीक्षित कराया। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने चंद्रशेखर को दोषी पाते हुए तीन वर्ष के कठोर कारावास तथा बीस हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई।
]]>एडीजे विशेष डकैती इंदिरा सिंह की अदालत में सुबह 11.30 बजे दोषी कप्तान सिंह, रामसेवक और रामपाल को मैनपुरी जिला कारागार से भारी सुरक्षा के बीच लाकर पेश किया गया। इनकी पेशी के बाद 12.30 बजे करीब फिर से इनको दीवानी की अदालत में भेज दिया गया।
लंच बाद कोर्ट से फिर इनकी पुकार हुई। दोपहर 3 बजे तीनों दोषियों को फिर से पुलिस ने कोर्ट में पेश किया। कोर्ट में अभियोजन की ओर से रोहित शुक्ला ने तमाम दलीलें पेश करते हुए नरसंहार के साक्ष्यों और गवाही का हवाला देते हुए फांसी की मांग की।
कोर्ट ने साक्ष्यों और गवाही के आधार पर उस भयावह नरसंहार के दोषी कप्तान सिंह, रामसेवक और रामपाल को फांसी की सजा सुनाई। कप्तान सिंह, रामसेवक को दो-दो लाख और रामपाल को एक लाख रुपये के जुर्माने से भी दंडित किया गया। सजा सुनते ही तीनों के चेहरों पर मायूसी छा गई। यह रोने लगे। कोर्ट के बाहर इनके परिजन भी मौजूद थे, वह भी रोने लगे। इसके बाद पुलिस ने इन्हें जेल ले जाकर दाखिल कर दिया।
]]>अभियोजन पक्ष के अनुसार 18 जुलाई 2017 की रात लगभग सवा ग्यारह बजे तत्कालीन पुलिस अधीक्षक अजय साहनी को वायरलेस के जरिए सूचना मिली कि सिधारी थाना क्षेत्र के भदुली में दो बदमाशो एक व्यक्ति को घायल कर उसके मोटरसाइकिल लूट ली हैं।तब पुलिस अधीक्षक ने अपने अधीनस्थ अधिकारियों को चेकिंग करने का निर्देश दिया और खुद क्षेत्र चेकिंग के लिए निकल पड़े। रात लगभग पौने दो बजे रोडवेज बाईपास पर बदमाशो से मुठभेड़ हो गई।बदमाशों की तरफ से पुलिस पार्टी पर फायरिंग की गई।तभी दूसरी तरफ से एसपी ग्रामीण नरेंद्र प्रताप सिंह आ गए। बदमाशों ने एसपी ग्रामीण को लक्ष्य कर फायर कर दिया। इस हमले में एसपी ग्रामीण के हाथ में गोली लगी। पुलिस पुलिस ने घेराबंदी करते हुए एक बदमाश को पकड़ लिया। पकड़े गए आरोपी ने अपना नाम सागर उर्फ भीम पुत्र राजदेव निवासी उबारपुर थाना गंभीरपुर बताया।पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद आरोपी के विरुद्ध चार्जशीट न्यायालय में प्रेषित किया। अभियोजन पक्ष की तरफ से शासकीय अधिवक्ता जगदंबा पांडेय ने तत्कालीन पुलिस अधीक्षक अजय कुमार साहनी, तत्कालीन अपर पुलिस अधीक्षक नरेंद्र प्रताप सिंह, इंस्पेक्टर कोतवाली योगेंद्र बहादुर सिंह समेत कुल 16 गवाहों को न्यायालय में परीक्षित कराया। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने आरोपी भीम उर्फ सागर को सात वर्ष के कठोर कारावास तथा तीन हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई।
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