आपातकाल का मुख्य कारण इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक फैसले था । उस फैसले में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को चुनाव प्रचार अभियान में कदाचार का दोषी करार दिया गया था।1971 के चुनाव में इन्दीरा गांधी के प्रतिद्वंद्वी राजनारायण ने इंदिरा की जीत पर सवाल उठाते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया। राजनारायण ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि इंदिरा गांधी ने चुनाव जीतने के लिए गलत तरीकों का इस्तेमाल किया है। मामले की सुनवाई हुई और इंदिरा गांधी के चुनाव को कोर्ट ने निरस्त कर दिया। 25 जून 1975 को घोषणा के बाद 21 मार्च 1977 तक यानी की करीब 21 महीने तक भारत में आपातकाल लागू रहा।आपातकाल के दौरान देशभर में चुनाव स्थगित हो गए थे।आपातकाल की घोषणा के साथ हर नागरिक के मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए। लोगों के पास न तो अभिव्यक्ति की आजादी का अधिकार था, न ही जीवन का अधिकार।
विपक्ष के सभी नेताओं को जेल में डाल दिया गया । अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, जयप्रकाश नारायण जैसे बड़े नेताओं को जेल भेज दिया गया।इतनी बड़ी संख्या में लोगों को जेल में डाला गया था कि जेलों में जगह ही नहीं बची।प्रेस पर सेंसरशिप लगा दी गई। हर अखबार में सेंसर अधिकारी रख दिये गये थे। उस सेंसर अधिकारी की अनुमति के बिना कोई खबर छप ही नहीं सकती थी। अगर किसी ने सरकार के खिलाफ खबर छापी तो उसे गिरफ्तारी झेलनी पड़ी।
आपातकाल के दौरान प्रशासन और पुलिस ने लोगों को प्रताड़ित किया गया। आज जो लोग संविधान की कापी लेकर घूमते हैं उनसे पूछा जाना चाहिए कि खुद की कुर्सी बचाने के लिए आपातकाल क्यों लगाया गया।संजय गांधी जो उस समय किसी संवैधानिक पद पर नहीं थे वह किस अधिकार से देश के फैसले ले रहे थे लाखों लोगों की जबरन नसबंदी क्यों कराइ गई। यह इंदिरा की तानाशाही थी जिसे देश पर इमरजेंसी के रूप में थोपा गया था।
इस अवसर पर जिलाध्यक्ष आजमगढ़ सदर ध्रुव सिंह श्रीकृष्ण पाल, घनश्याम पटेल हरिवंश मिश्रा, ऋषिकेश दूबे, सुजीत सिंह , आनन्द सिंह, विभा बर्नवाल पूनम सिंह, बबिता जसरासरिया, निखिल राय, विवेक निषाद, लोकतंत्र सेनानी चन्द्र विनोद सिंह, भृगुनाथ, नागेन्द्र राय, रामनयन सिंह रामपुर साधु हरिश्चंद्र राम रविंद्र नाथ राम ओम प्रकाश बंशीधर पांडे जयसवाल सुभाष चंद्र गुप्ता बाल मुकुंद पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे।
आजमगढ़ । 25 जून 1975 को आपातकाल की घोषणा की गई थी। उक्त के क्रम में आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर आज हरिऔध कला केन्द्र आजमगढ़ में मुख्य विकास अधिकारी परीक्षित खटाना की उपस्थिति में आपातकाल दिवस मनाया गया। इस अवसर पर आपातकाल से संबंधित लघु फिल्म को देखा गया।
मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि शासन के निर्देशानुसार आज आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ मनायी जा रही है। उन्होने कहा कि आपातकाल के समय लोकतंत्र सेनानियों ने बहुत सारी यातनाएं झेली हैं एवं लोकतंत्र को जीवित रखने में उनका बहुत बड़ा योगदान रहा है, यह हमारे लिए अनुकरणीय हैं। उन्होने कहा कि युवा पीढ़ी को उनके बारे में जानने का यह सुनहरा मौका है। मुख्य विकास अधिकारी द्वारा लोकतंत्र सेनानियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गयी।
इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी द्वारा 15 लोकतंत्र सेनानियों-प्रभुनाथ सिंह, पतिराम यादव, हरिश्चन्द्र राय, ओमप्रकाश राय, सुभाष चन्द, वशिष्ठ पाण्डेय, बालमुकुन्द जायसवाल, कपिलदेव, नागेन्द्र राय, सिंहासन यादव, चन्द्रविनोद सिंह, रामफेर कानू, भृगुनाथ, रामनयन सिंह, रविन्द्रनाथ राय को प्रतिकात्मक रूप से माला पहनाकर एवं अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया गया।
इसके पश्चात मुख्य विकास अधिकारी द्वारा आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग, आजमगढ़ द्वारा लगायी गयी प्रदर्शनी का अवलोकन किया गया।
इस अवसर पर उप जिलाधिकारी सदर नरेन्द्र गंगवार, डीसी मनरेगा राम उदरेज यादव, लोकतंत्र सेनानी एवं आम जनमानस उपस्थित रहे।