मिली जानकारी के अनुसार मुबारकपुर थाना क्षेत्र के ग्राम अतरडीहा निवासी महातम पाल पुत्र राम लखन भेड़ पालन का व्यवसाय करते हैं। वह अपनी भेड़ों के झुंड को चराने के बाद ग्राम बरडीहा उर्फ गड़ेरूआ स्थित एक हाते में ठहराए हुए थे। सोमवार की भोर में आधा दर्जन से अधिक आवारा कुत्तों ने एक साथ भेड़ों पर हमला कर दिया।
अचानक हुए हमले से भेड़ों में अफरा-तफरी मच गई और वे इधर-उधर भागने लगीं। कुत्तों के झुंड ने कई भेड़ों को नोच डाला। जब तक पालक और आसपास के लोग मौके पर पहुंचते, तब तक 50 भेड़ों की मौत हो चुकी थी। वहीं करीब एक दर्जन भेड़ें गंभीर रूप से घायल हो गईं, जिनमें से कुछ की हालत नाजुक बताई जा रही है।
पीड़ित पालक महातम पाल ने बताया कि घटना से उन्हें लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। भेड़ पालन ही उनके परिवार की आजीविका का मुख्य साधन है। पीड़ित पालक ने प्रशासन से उचित मुआवजा दिए जाने की मांग की है।
घटना की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और जांच-पड़ताल शुरू कर दी है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जिला अस्पताल की ओपीडी में फिलहाल 288 एंटी रेबीज वायल उपलब्ध हैं, जबकि स्टोर में 7840 वायल का स्टॉक मौजूद है। इसके बावजूद बढ़ती संख्या को देखते हुए स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।
दूसरी ओर, प्रशासन द्वारा आवारा कुत्तों को पकड़ने, उनकी नसबंदी कराने और सुरक्षित स्थानों पर छोड़ने की योजनाएं कई बार बनाई गईं, लेकिन न तो नियमित अभियान चलाया गया और न ही प्रभावी निगरानी व्यवस्था लागू की जा सकी।
योजनाओं के अमल में कमी का नतीजा यह है कि आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है और आमजन उनके हमलों का शिकार हो रहा है।
बीएसए राजीव कुमार पाठक का कहना है कि शासन द्वारा आवारा कुत्तों की पहचान और नियंत्रण के लिए सभी विभागों को निर्देश दिए गए हैं। इसी क्रम में परिषदीय विद्यालयों सहित शहरी क्षेत्रों के शैक्षणिक संस्थानों में आवारा कुत्तों से प्रभावित स्थलों का चिह्नित कराया जा रहा है। नगर निकाय से समन्वय स्थापित कर सूची तैयार कर शासन को भेजी जाएगी, ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।