यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति अनिल कुमार-एक्स की खंडपीठ ने आजमगढ़ निवासी अजीत यादव की याचिका पर दिया है। मामला जहानागंज थाना क्षेत्र का है। 10 मई, 2025 को युद्धविराम समझौते के बाद याची ने सोशल मीडिया पर पीएम मोदी की अलोचना की। अपनी पोस्ट में अशोभनीय जैसी कई टिप्पणियां कीं। मामले की एफआईआर जहानगंज थाने में तैनात उपनिरीक्षक लाल बहादुर मौर्य ने दर्ज कराई थी। इसके खिलाफ याची ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
याची के वकील ने दलील दिया कि पोस्ट भावनाओं में बहकर लिखी थीं। उनका उद्देश्य किसी को व्यक्तिगत रूप से अपमानित करना नहीं था। कोर्ट ने याची की दलील का सिरे से खारिज कर दिया।
]]>मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति संजय कुमार सिंह की अदालत कर रही है। मामला आजमगढ़ जिले के अहरौला थाना क्षेत्र का है। माहुल कस्बे में 21 फरवरी 2022 को जहरीली शराब पीने से 9 लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना के एक दिन बाद 22 फरवरी 2022 को माहुल कस्बे में स्थित देशी शराब के ठेके पर छापा मारकर पुलिस ने चार पेटी मिलावटी शराब बरामद की थी।
इस मामले की तीन एफआईआर दर्ज हुई थी। जिसमें पहली एफआईआर विजय सोनकर ने 21 फरवरी, 2022 को, दूसरी नीरज सिंह ने 22 फरवरी, 2022 व तीसरी राजेंद्र प्रसाद ने 22 फरवरी, 2022 को दर्ज कराई थी। सपा विधायक रमाकांत यादव का नाम शराब कांड के 14वें आरोपी के रूप में सात महीने बाद शामिल किया गया। इन पर शराब कांड के अभियुक्त रंगेश यादव को सपा नेता का रिश्तेदार बताते हुए उसे संरक्षण देने का आरोप लगा था।
एक ही मामले में दर्ज तीन मुकदमों व उसके लंबित अपराधिक कार्यवाही की वैधानिकता को चुनौती देते हुए सपा नेता ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने दलील दी कि तीनों मामलों का ट्रायल साक्ष्य के स्तर पर है। लिहाजा, इस स्तर पर याची किसी राहत का हकदार नहीं है। कोर्ट ने सरकार से चार हफ्ते में जवाब तलब करते हुए स्पष्ट किया है कि इस दौरान ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर कोई रोक नहीं रहेगी।
]]>यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की अदालत ने प्रकाश इलेक्ट्रिकल्स की ओर से दाखिल याचिका पर दिया है। याची के अधिवक्ता अनूप बर्नवाल ने दलील दी कि एन.आई एक्ट के तहत नूरूल हसन के खिलाफ इस्तगासा दायर किया गया था। कोर्ट ने सम्मन जारी किया। हाजिर नहीं होने पर कई बार जमानती वारंट जारी किया, लेकिन नूरूल हसन पेश नहीं किया जा सका। तीन साल से अधिक समय बीता, 20 तारीखें लगीं। जबकि, केस नियमानुसार छह माह में तय हो जाना चाहिए।
इससे पहले कोर्ट ने एसपी से व्यक्तिगत हलफनामा तलब कर वारंट तमील नहीं होने का कारण पूछा था। इस पर आजमगढ़ के एसपी ने हलफनामा दाखिल कर बताया कि 26 जुलाई 24 को जारी वारंट संग कांस्टेबल को मुल्जिम के लखनऊ के पते पर भेजा गया था। लेकिन, उसका पता नहीं चल सका।
कोर्ट ने इस हलफनामे को संतोषजनक नहीं माना। जिला जज से रिपोर्ट मांगी। जिला जज ने बताया कि पांच मार्च 24 को पुलिस पैरोकार को वारंट दिया गया था। एसएचओ ने तामील की कोई रिपोर्ट नहीं दी। एसएचओ से सफाई मांगी गई है। कोर्ट पाया कि जिला जज की रिपोर्ट के मुताबिक एसपी ने हाईकोर्ट को भ्रामक और गलत जानकारी दी है या उनके अधीनस्थ अधिकारी ने उन्हें गुमराह किया है।
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