यूपी बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष कुंवर बासित अली ने भी बीजेपी को मुस्लिमों का वोट मिलने का दावा किया। उन्होंने एक्स पर प्रतिक्रिया दी और कहा कि ‘हिंदू मुस्लिम मिल गया, कुंदरकी में कमल खिल गया’. जिसकी वजह से रामवीर सिंह की जीत हुई हैं। इसके साथ ही उन्होंने अल्पसंख्यक मतदाताओं को उनकी मेहनत के लिए धन्यवाद और शुभकामनाएं दीं हैं।
65 प्रतिशत मुस्लिम आबादी
कुंदरकी सीट पर 31 साल से बीजेपी चुनाव जीत नहीं पाई थी। 65 प्रतिशत मुस्लिम मतदाताओं के होने की वजह से इस सीट पर कभी सपा तो कभी बसपा चुनाव जीतती रही है। लेकिन अब बीजेपी ने इस सूखे को खत्म कर दिया है।
रामवीर पर भाजपा ने चौथी बार लगाया था दांव
कुंदरकी विधानसभा क्षेत्र से भाजपा ने रामवीर सिंह पर चौथी बार दांव लगाया था। भाजपा ने उन्हें कुंदरकी विधानसभा क्षेत्र से तीसरी बार प्रत्याशी बनाया था। एक बार देहात विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ चुके हैं। हालांकि, तीनों बार वह विधानसभा पहुंचने में नाकामयाब रहे हैं। अब उनपर 31 साल से चला आ रहा भाजपा की हार का सूखा समाप्त करने की चुनौती थी।
]]>यूपी बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष कुंवर बासित अली ने भी बीजेपी को मुस्लिमों का वोट मिलने का दावा किया। उन्होंने एक्स पर प्रतिक्रिया दी और कहा कि ‘हिंदू मुस्लिम मिल गया, कुंदरकी में कमल खिल गया’. जिसकी वजह से रामवीर सिंह की जीत हुई हैं। इसके साथ ही उन्होंने अल्पसंख्यक मतदाताओं को उनकी मेहनत के लिए धन्यवाद और शुभकामनाएं दीं हैं।
65 प्रतिशत मुस्लिम आबादी
कुंदरकी सीट पर 31 साल से बीजेपी चुनाव जीत नहीं पाई थी। 65 प्रतिशत मुस्लिम मतदाताओं के होने की वजह से इस सीट पर कभी सपा तो कभी बसपा चुनाव जीतती रही है। लेकिन अब बीजेपी ने इस सूखे को खत्म कर दिया है।
रामवीर पर भाजपा ने चौथी बार लगाया था दांव
कुंदरकी विधानसभा क्षेत्र से भाजपा ने रामवीर सिंह पर चौथी बार दांव लगाया था। भाजपा ने उन्हें कुंदरकी विधानसभा क्षेत्र से तीसरी बार प्रत्याशी बनाया था। एक बार देहात विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ चुके हैं। हालांकि, तीनों बार वह विधानसभा पहुंचने में नाकामयाब रहे हैं। अब उनपर 31 साल से चला आ रहा भाजपा की हार का सूखा समाप्त करने की चुनौती थी।
]]>कुंदरकी सीट पर शुरुआत में तो समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार हाजी रिजवान ने आगे निकलते दिखाई दिए थे लेकिन, तीसरे राउंड के बाद बीजेपी प्रत्याशी रामवीर सिंह ने बढ़त बनाना शुरू कर दिया। इसके बाद तो हर राउंड के साथ वो अपने बढ़त को और बढ़ाते गए और सपा को इतना पीछे छोड़ दिया कि सपा की जीत को असंभव कर दिया और बड़े मार्जिन से सपा के हाजी रिजवान को हरा दिया।
कुंदरकी सीट मुस्लिम बहुल सीट मानी जाती है। इस सीट पर लंबे समय से समाजवादी पार्टी का कब्जा रहा है। लेकिन इस बार यहां एकतरफा बीजेपी की लहर दिखाई दी। बीजेपी इस सीट पर एक लाख से ज्यादा के अंतर से चुनाव जीत गई। इस सीट पर सपा और बीजेपी के बीच जिस तरह का मुकाबला देखने को मिला उसके बाद ये माना जा रहा कि इस बार मुस्लिम वोटरों ने भी बीजेपी को खुलकर समर्थन किया।
‘हिंदू मुस्लिम मिल गया, कुंदरकी में कमल खिल गया’
यूपी बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष कुंवर बासित अली ने भी बीजेपी को मुस्लिमों का वोट मिलने का दावा किया। उन्होंने एक्स पर प्रतिक्रिया दी और कहा कि ‘हिंदू मुस्लिम मिल गया, कुंदरकी में कमल खिल गया’. जिसकी वजह से रामवीर सिंह की जीत हुई हैं। इसके साथ ही उन्होंने अल्पसंख्यक मतदाताओं को उनकी मेहनत के लिए धन्यवाद और शुभकामनाएं दीं हैं।
65 प्रतिशत मुस्लिम आबादी
कुंदरकी सीट पर 31 साल से बीजेपी चुनाव जीत नहीं पाई थी। 65 प्रतिशत मुस्लिम मतदाताओं के होने की वजह से इस सीट पर कभी सपा तो कभी बसपा चुनाव जीतती रही है। लेकिन अब बीजेपी ने इस सूखे को खत्म कर दिया है।
रामवीर पर भाजपा ने चौथी बार लगाया था दांव
कुंदरकी विधानसभा क्षेत्र से भाजपा ने रामवीर सिंह पर चौथी बार दांव लगाया था। भाजपा ने उन्हें कुंदरकी विधानसभा क्षेत्र से तीसरी बार प्रत्याशी बनाया था। एक बार देहात विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ चुके हैं। हालांकि, तीनों बार वह विधानसभा पहुंचने में नाकामयाब रहे हैं। अब उनपर 31 साल से चला आ रहा भाजपा की हार का सूखा समाप्त करने की चुनौती थी।
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लखनऊ। उपचुनाव में मिली जीत के बाद भाजपा कार्यालय में प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। सीएम योगी आदित्यनाथ कुछ देर में पत्रकार वार्ता को संबोधित किया। इससे पहले भाजपा कार्यालय में पहुंचने पर प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी, उप मुख्यमंत्री केशव मौर्य व उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने सीएम का स्वागत किया।
सीएम योगी ने कहा कि नौ में से सात सीटों पर जीत का श्रेय पीएम मोदी को जाता है। पीएम पर लोगों को अटूट विश्वास है। ये जीत उसी का प्रमाण है। हम सब जनता का आभार व्यक्त करते हैं। सपा और इंडी की लूट और झूठ की राजनीति की समाप्ति की शुरुआत का ये परिणाम है।
कहा कि जो जनादेश महाराष्ट्र में मिला, ये राम और राष्ट्र के आराधक नए भारत की जीत है। आंबेडकर का अपमान करने वालों की पराजय है। आज फिर से स्पष्ट हुआ है कि देश की जनता को मोदी की नीति, नीयत और निर्णय पर अटूट विश्वास है। तुष्टिकरण और सांप्रदायिकता के शॉर्टकट से सरकार बनाने का सपना देख रहे इंडी गठबंधन की ये पराजय है।
यूपी उपचुनाव के बारे में सपा ने मतदान के दिन से जो प्रलाप किया, उस पर जनता ने जो जवाब दिया है, कुंदरकी उसका उदाहरण है। सपा की जमानत जब्त होने वाली है। सपा सीसामाऊ के चुनाव को रद्द कराना चाहती थी। अब सिर्फ आठ हजार से जीत पाए हैं। करहल में सपा सिर्फ 14 हजार वोट से जीती है। जो केशव मौर्य ने कहा है उस ओर हम बढ़ रहे हैं।
सीएम ने दोहराया बटेंगे तो कटेंगे, एक रहेंगे तो सेफ रहेंगे। ये देश की जनता ने माना है। कुंदरकी पर कहा कि राष्ट्रवाद, जड़ और मूल की जीत सबको अपना गोत्र याद आया। अपनी जीत याद आती है।
इससे पहले सीएम योगी ने सोशल मीडिया अकाउंट ‘एक्स’ पर पोस्ट किया। लिखा कि उत्तर प्रदेश के विधानसभा उपचुनावों में भाजपा-एनडीए की विजय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन पर जनता-जनार्दन के अटूट विश्वास की मुहर है। ये जीत डबल इंजन सरकार की सुरक्षा-सुशासन एवं जन-कल्याणकारी नीतियों तथा समर्पित कार्यकर्ताओं के अथक परिश्रम का सफल है।
मुख्यमंत्री ने लिखा कि उत्तर प्रदेश के सुशासन और विकास को अपना मत देने वाले उत्तर प्रदेश के सम्मानित मतदाताओं का आभार। सभी विजयी प्रत्याशियों को हार्दिक बधाई। उन्होंने एक बार फिर सचेत किया कि बटेंगे तो कटेंगे। एक रहेंगे-सेफ रहेंगे।
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लखनऊ। प्रदेश की नौ सीटों पर हुए चुनावों के परिणामों ने एक बात साबित कर दी कि दलित लोकसभा चुनाव से उलट पूरी तरह से सपा के पाले में नहीं गया है। दलित बंटे हुए दिखाई दिए। कुछ प्रतिशत मायावती को जरूर मिला लेकिन बड़ी संख्या में वोट बीजेपी के पाले में जाता हुआ दिखा। कांग्रेस के इस चुनाव में न उतरने का नुकसान भी इंडिया गठबंधन को हुआ। पारंपरिक दलित वोटरों ने साइकिल के सिंबल का दबाने से परहेज किया।
लोकसभा चुनाव में हुआ था फायदा
2024 में ही हुए लोकसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस ने मिलकर चुनाव लड़ा। संविधान बचाने और जातीय जनगणना के मुद्दे पर दलित वोट बैंक बड़े स्तर पर सपा और कांग्रेस के साथ गया। अनुमानों के विपरीत सपा प्रदेश में 37 सीटें जीतने में सफल रही। कांग्रेस को छह सीटें मिलीं। राजनीतिक टीकाकारों के अनुसार उस समय बड़ी संख्या में दलित वोटरों ने सपा और कांग्रेस के पक्ष में मतदान किया था। इस बार वह असर गायब दिखा। चुनाव परिणाम इस बात का इशारा कर रहे हैं कि सपा दलितों को फिर से अपने पाले में रखने में नकामयाब रही है।
कांग्रेस ने बनाई दूरी
लोकसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस के बीच जबर्दस्त जुगलबंदी देखने को मिली। कई सीटों पर राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने संयुक्त जनसभाएं कीं। इस चुनाव में गठबंधन में सही सीटें न मिल पाने की वजह से कांग्रेस ने चुनावों से किनारा कर लिया। कांग्रेस चार सीटें मांग रही थी लेकिन सपा ने उसे दो सीटें दीं। जब यह गठबंधन नहीं हुआ तो कांग्रेस की तरफ से यह कहा गया कि ये प्रत्याशी सपा के प्रत्याशी न होकर इंडिया गठबंधन के प्रत्याशी हैं और कांग्रेस भी इनका चुनाव प्रचार करेंगी। पर ऐसा नहीं हुआ। राहुल और प्रियंका ने पूरी तरह से यूपी से दूरी बनाई। राहुल की एक भी जनसभा सपा प्रत्याशी के समर्थन में नहीं हुई। केंद्रीय नेतृत्व के साथ-साथ राज्य की लीडरशिप भी इन चुनावों में सपा प्रत्याशियों से दूर दिखी।
जातीय जनगणना का मुद्दा भी हुआ फेल
जातीय जनगणना लोकसभा चुनाव में बड़ा मुद्दा बनकर उभरी। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपनी हर सभा में इस मुद्दे को उठाया। सपा भी जातीय जनगणना की बात कहती रही लेकिन इन चुनावों में जातीय जनगणना की बात सिरे से गायब दिखी। जाति जनगणना के साथ-साथ संविधान बचाने का मुद्दा भी इन चुनावों में नहीं दिखा।
नहीं चला पीडीए का दांव
अभी तक के रुझानों में सपा जिन दो सीटों पर आगे चल रही है उनमें एक सीट अखिलेश यादव के द्वारा छोड़ी गई करहल है और दूसरी मुस्लिम बाहुल्य सीट सीसमाऊ है। इन दोनों सीटों में सपा के आगे चलने के अलग समीकरण हैं। इन दो सीटों की बात को छोड़ दें तो बाकी सीटों पर सपा का पीडीए फॉर्मूला साथ देता हुआ नहीं दिखा। यादव के अलावा बाकी ओबीसी जातियां उस तरह से सपा के पाले में नहीं आईं जैसा लोकसभा के चुनावों में हुआ था।
इन चुनावों में कांग्रेस ने एक रणनीतिक दूरी बनाई। कांग्रेस खुद को दूर रखकर यह देखना भी चाह रही थी कि बिना गठबंधन के सपा कैसा परफॉर्म करती है। चुनाव परिणामों ने एक बात साफ कर दी है फिलहाल सपा और कांग्रेस दोनों को एक दूसरे की जरूरत है।
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