केंद्र सरकार की ओर से बिजली (ग्राहकों के अधिकार) नियम, 2020 में अवश्यक संशोधन कर टाइम ऑफ डे (टीओडी) टैरिफ की व्यवस्था लागू करने की बात कही गई है। इसमें दिन और रात की बिजली दर अलग- अलग रखने का नियम है। लघु एवं भारी उद्योग श्रेणी के उपभोक्ताओं पर यह व्यवस्था लागू की जा चुकी है। एक अप्रैल 2025 से सभी उपभोक्ताओं पर लागू होनी है। हालांकि इसमें किसानों को अलग रखा गया है। ऐसे में नियामक आयोग की ओर से जारी मल्टी ईयर टैरिफ रेगुलेशन 2025 के मसौदे में टीओडी टैरिफ लागू करने की बात कही गई है। अभी प्रदेश में कुल 3.45 करोड़ उपभोक्ता है, जिसमें 2.85 करोड़ घरेलू और 15 लाख किसान उपभोक्ता हैं।
टीओडी की व्यवस्था को वर्ष 2023 में भी लागू करने का प्रयास किया गया था, लेकिन उपभोक्ता परिषद ने याचिका लगा दी थी। पूरे मामले में कोर्ट जाने की धमकी दी थी। ऐसे में प्रस्ताव को स्थगित कर दिया गया था। मल्टी ईयर टैरिफ रेगुलेशन 2025 के मसौदे के जरिए इसे लागू करने की तैयारी है। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि इस व्यवस्था को किसी भी कीमत पर लागू नहीं होने दिया जाएगा। इसके लिए कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी।
आमतौर पर घरेलु उपभोक्ता रात में ज्यादा बिजली खर्च करते हैं। क्योंकि दिन में वे कार्यालय अथवा अन्य स्थानों पर रहते हैं। रात में पूरा परिवार घर में होता है। ऐसे में लाइट, पंखे, कूलर, एसी सहित अन्य भौतिक संसाधनों का प्रयोग होता है। यही वजह है कि बिजली का पीक ऑवर (सर्वाधिक खर्च ) हमेशा रात 10 से 11.30 बजे के बीच होता है। रात में ज्यादा मूल्य वसूले जाने पर घरेलु उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त भार पड़ेगा।
ऊर्जा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने टीओडी टैरिफ को उपभोक्ताओं के लिए फायदेमंद बताया। उनका तर्क है कि बिजली की पीक ऑर्वस में उपभोक्ता इलेक्ट्रिक चीजें कम चलाकर बिजली खर्च बचा सकेंगे। इससे कोयला आधारित बिजली संयंत्रों से बनी बिजली की मांग कम होगी। ग्राहक खपत प्रबंधन करेंगे तो बिल में 20 फीसदी तक की बचत भी हो सकती है।
टीओडी टैरिफ से कृषि कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं को अलग रखा गया है। प्रदेश में करीब 15 लाख से अधिक इस श्रेणी के उपभोक्ता हैं।
दिन और रात के समय बिजली की दर अलग-अलग रखे जाने को टाइम ऑफ़ डे (टीओडी) टैरिफ़ कहते हैं। इस टैरिफ़ के तहत, दिन के समय बिजली की दर कम और रात के समय बिजली की दर ज़्यादा होती है। उपभोक्ता दिन के अलग-अलग समय के हिसाब से अलग-अलग बिजली बिल चुकाएंगे।
प्रदेश में 18 जून की रात 10 से 11 बजे के बीच 35 मिनट तक 30618 मेगावाट बिजली आपूर्ति की गई। यह अब तक की सर्वाधिक आपूर्ति है। इस दिन की अधिकतम खपत 65.35 करोड़ यूनिट थी।
]]>लखनऊ। मल्टी ईयर टैरिफ रेगुलेशन 2025 का मसौदा लागू हुआ तो बिजली चोरी, घपले, वाणिज्यिक नुकसान सहित अन्य मामलों में विद्युत निगमों को होने वाले घाटे का खामियाजा आम उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ेगा। उन्हें महंगी बिजली दर चुकानी होगी। इसके लिए उपभोक्ता परिषद ने कानूनी लड़ाई की तैयारी शुरू कर दी है। उपभोक्ता परिषद ने एलान किया है कि शनिवार को प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं से इस मुद्दे पर ऑनलाइन राय ली जाएगी। इसके बाद संघर्ष का एलान किया जाएगा।
प्रदेश में मल्टी ईयर टैरिफ रेगुलेशन का कार्यकाल पूरा हो गया है। अब इसे नए सिरे से तैयार किया जा रहा है। नियामक आयोग ने बृहस्पतिवार को मल्टी ईयर टैरिफ रेगुलेशन 2025 का मसौदा जारी करते हुए प्रदेश के उपभोक्ताओं से 13 फरवरी तक आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं। नए मसौदे में पहले से चल रहे टैरिफ निर्धारण कानून में कई बदलाव का प्रस्ताव है। उपभोक्ता परिषद का आरोप है कि प्रस्तावित ड्राफ्ट पूर्ण तरीके से निजी घरानों व बिजली निगमों को लाभ देने वाला है। इस ड्राफ्ट में विद्युत नियामक आयोग ने अपनी सांविधानिक गरिमा की भी चिंता नहीं की, जो नियामकीय रूपरेखा में काले अध्याय के रूप में देखा जाएगा।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि मसौदे में यह व्यवस्था की गई है कि निगमों में होने वाली बिजली चोरी, वाणिज्यिक नुकसान, भ्रष्टाचार से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए उपभोक्ताओं से भी हिस्सा लिया जाएगा। जबकि पूर्व में लागू कानून में यह व्यवस्था थी कि बिजली चोरी सहित अन्य प्रकरण का खामियाजा उपभोक्ता नहीं उठाएंगे, क्योंकि इसके लिए विजिलेंस विंग, बिजली थाना एवं अन्य व्यवस्था भी है। इसी तरह मसौदे में मरम्मत संबंधी और कार्मिक लागत सहित अन्य सभी प्रकरण में बदलाव कर रहा है। इन सभी खर्चों को किसी न किसी रूप में उपभोक्ताओं पर डालने की तैयारी है।
निजी घराने कर रहे हैं गुमराह
विद्युत नियामक आयोग ने प्रस्तावित मसौदे में भविष्य में आने वाली निजी कंपनियों के लिए भी एक रूपरेखा तैयार कर दी है। आयोग को यह नहीं भूलना चाहिए कि भविष्य की बात कानून में कैसे ला सकते हैं? परिषद ने आरोप लगाया कि इससे स्पष्ट है कि निजी घराने अब काॅर्पोरेशन के साथ ही नियामक आयोग को भी गुमराह कर रहे हैं। यह विद्युत उपभोक्ताओं के साथ धोखा है।