समुद्र मंथन की ऐतिहासिक कथा हुई जीवंत
झांकी में समुद्र मंथन की ऐतिहासिक कथा को जीवंत किया गया, जहां नागवासुकी मंदराचल पर्वत पर लिपटे हुए नजर आए। भगवान विष्णु कच्छप अवतार में मंदराचल को धारण करते हुए दिखे। देवता और राक्षस मिलकर अमृत के लिए समुद्र मंथन कर रहे थे। झांकी के अगले भाग में शंखनाद करते संत और सिर पर कलश लिए महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में झूमती-गाती दिखाई दीं। कवि वीरेन्द्र वत्स का लिखा गीत झांकी की विशेषता रही, जिसमें संस्कृत और हिंदी का सुंदर समावेश किया गया था।
गीत में संस्कृत-हिंदी समावेशस्वर्गलोक की आभा उतरी तीर्थराज के आंगन में
झूम रहे हैं साधु-संत जन, पुलक भरा है तन-मन में
भव्योदिव्यो महाकुम्भ: सर्वसिद्धिप्रदायक :। प्रयागराजस्तीर्थानां प्रमुखो लोकविश्रुत :।।
सांस्कृतिक जड़ों और प्रगति के प्रतीक के रूप में उत्तर प्रदेश को एक नई पहचानइस झांकी ने महाकुम्भ की आध्यात्मिक महिमा को दर्शाया है। साथ ही भारत की सांस्कृतिक जड़ों और प्रगति के प्रतीक के रूप में उत्तर प्रदेश को एक नई पहचान दी है। दर्शकों ने झांकी को अद्वितीय और प्रेरणादायक बताया। उत्तर प्रदेश की झांकी कई बार राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार जीत चुकी है। इस बार भी महाकुम्भ पर आधारित यह झांकी देशवासियों के लिए गर्व का प्रतीक बनी है।
]]>