इसके पहले यूपी बोर्ड परीक्षा केंद्रों के निर्धारण में मनमानी और अवैध वसूली की शिकायतें भी जिलाधिकारी रविंद्र कुमार को मिली थीं। इस पर कार्रवाई करते हुए डीएम ने जिला विद्यालय निरीक्षक उपेंद्र कुमार को परीक्षा संबंधी कार्यों से अलग कर दिया था।
डीएम की इस कार्रवाई के बाद जिला विद्यालय निरीक्षक मेडिकल अवकाश पर चले गए थे। जिलाधिकारी द्वारा शासन को भेजी गई रिपोर्ट के आधार पर शासन ने तत्काल प्रभाव से उपेंद्र कुमार को आजमगढ़ से हटाकर प्रयागराज से अटैच कर दिया है।
आजमगढ़। जिले के माध्यमिक शिक्षा विभाग में इन दिनों कार्यप्रणाली को लेकर असामान्य स्थिति बनी हुई है। एक माह के अवकाश के बाद जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) उपेंद्र कुमार ने पुनः कार्यभार ग्रहण कर लिया है।
हालांकि, पूर्व में प्रभारी डीआईओएस के रूप में कार्य देख रहे वीरेंद्र प्रताप सिंह की सक्रियता अभी भी बनी हुई है, जिससे विभागीय कर्मचारियों के बीच भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई है। डीआईओएस उपेंद्र के बगल में ही वीरेंद्र की भी कुर्सी लगी हुई है।
जानकारी के मुताबिक, उपेंद्र कुमार 12 दिसंबर को अवकाश पर चले गए थे। उनके अवकाश पर रहने के दौरान वीरेंद्र प्रताप सिंह को प्रभारी डीआईओएस का दायित्व सौंपा गया था। अब 24 जनवरी को उपेंद्र कुमार के लौटने और कार्यभार संभालने के बाद भी कार्यालय की कार्यप्रणाली को लेकर स्पष्टता नहीं बन पा रही है।
बताया जा रहा है कि प्रभार सौंपे जाने के बावजूद वीरेंद्र प्रताप सिंह ने कार्यालय के कर्मचारियों की एक बैठक बुलाई, जिसमें निर्देश दिया गया कि किसी भी फाइल पर उपेंद्र कुमार के हस्ताक्षर न कराए जाएं और सभी कार्य उनके माध्यम से ही संपादित किए जाएं। इस घटनाक्रम से विभाग में उहापोह की स्थिति बन गई है। कर्मचारी यह समझ नहीं पा रहे हैं कि आधिकारिक आदेशों के तहत अंतिम निर्णय और हस्ताक्षर का अधिकार किसके पास है। परिणामस्वरूप फाइलों के निस्तारण और अन्य प्रशासनिक कार्यों पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
मामले को लेकर संयुक्त शिक्षा निदेशक नवल किशोर ने बताया कि उपेंद्र कुमार अवकाश पर गए थे। वहां से आने के बाद उपेंद्र ने कार्यभार ग्रहण करने के बाद डीएम को इसकी कोई सूचना नहीं दी। इस वजह से वीरेंद्र प्रताप को ही डीआईओएस के रूप में कार्य करने के लिए कहा गया है।
]]>माध्यमिक शिक्षा परिषद की 18 फरवरी से शुरू होने वाली बोर्ड परीक्षा के लिए 30 नवंबर को 230 केंद्रों की प्रस्तावित सूची जारी की गई थी, जिस पर 4 दिसंबर तक 418 आपत्तियां मिलीं। इनमें 384 ऑनलाइन और 34 ऑफलाइन थीं। अभी तक आपत्तियों का निस्तारण नहीं हो सका है। संशोधित सूची 17 दिसंबर को और अंतिम सूची 30 दिसंबर को जारी होनी है।
पहले भी केंद्र निर्धारण में गड़बड़ी की जांच में आरोप सही पाए गए थे, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई थी। वर्तमान शिकायतों को गंभीर मानते हुए डीएम ने खुद मोर्चा संभाल लिया है और प्रशासनिक टीम से परीक्षा केंद्रों की जांच कराई जा रही है, ताकि किसी तरह की अनियमितता न हो।
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