आजमगढ़ । जिले के देवगांव थाना क्षेत्र में तीन वर्षीय बालक की संदिग्ध मौत के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर हत्या का मुकदमा दर्ज कर एक महिला को गिरफ्तार किया गया है। मामले में आगे की विधिक कार्रवाई जारी है।
देवगांव थाना क्षेत्र के ग्राम चेवारपुर पूरब (मुसऊपुर) में बीते 13 दिसंबर को एक तीन वर्षीय बालक अयान का शव उस स्थान पर मिला था, जहां भैंसें बांधी जाती हैं। परिजनों ने प्रारंभ में आशंका जताई थी कि भैंस के खुर लगने से बालक को चोट आई, जिससे उसकी मौत हो गई। इसी कारण बिना पुलिस को सूचना दिए और बिना पोस्टमार्टम कराए शव को दफना दिया गया था।
कुछ दिनों बाद मृतक की माता रिबिका पत्नी गुलाबचन्द्र ने आशंका जताई कि उनके पुत्र की हत्या कर शव को वहां लाकर फेंका गया था। इस संबंध में उन्होंने डीएम और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र दिया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए देवगांव पुलिस ने जिलाधिकारी से शव को कब्र से की अनुमति ली। आदेश मिलने के बाद 14 जनवरी को मजिस्ट्रेट और क्षेत्राधिकारी की मौजूदगी में वीडियोग्राफी कराते हुए शव को बाहर निकाला गया और पोस्टमार्टम के लिए जिला मोर्चरी भेजा गया। डॉक्टरों के पैनल द्वारा वीडियोग्राफी के साथ पोस्टमार्टम किया गया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर थाना देवगांव में प्रिया पुत्री राजेश निवासी ग्राम चेवार पूरब (मुसऊपुर) के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।
शुक्रवार को प्रभारी निरीक्षक विमल प्रकाश राय के नेतृत्व में पुलिस टीम ने अभियुक्ता प्रिया को उसके घर के सामने से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार मामले में अन्य अग्रिम विधिक कार्रवाई की जा रही है।
समाचार लिखे जाने तक पुलिस ने यह नहीं बताया कि आखिर युवती ने मासूम की हत्या क्यों की।
]]>आजमगढ़। जिले के देवगांव थाना क्षेत्र में पुलिस ने चोरी की गाड़ी पर फर्जी नम्बर प्लेट लगाकर उसे बेचने वाले दो शातिर अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। मामले में धोखाधड़ी, जालसाजी और जान से मारने की धमकी जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं। देवगांव पुलिस की इस कार्रवाई से वाहन ठगी के एक संगठित गिरोह का खुलासा हुआ है।
थाना देवगांव पुलिस को एक आवेदक ने तहरीर देकर अवगत कराया था कि अभियुक्तों द्वारा चोरी की गाड़ी पर फर्जी नम्बर प्लेट लगाकर उसे बिक्री कर दी गई। वाहन के कागजात मांगने पर अभियुक्तों ने कोई दस्तावेज नहीं दिए। बाद में जांच करने पर गाड़ी पर लगी नम्बर प्लेट फर्जी पाई गई।
पीड़ित द्वारा लालगंज क्षेत्र में अभियुक्तों से कागजात अथवा धनराशि वापस मांगने पर आरोप है कि अभियुक्तों ने गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी दी। इस संबंध में थाना देवगांव पर मुकदमा पंजीकृत किया गया।
उप निरीक्षक सुभाष तिवारी पुलिस टीम के साथ मोलनापुर ब्रिज क्षेत्र में गश्त पर थे। मुखबिर से सूचना मिलने पर मोलनापुर ब्रिज की पश्चिमी पटरी के पास खड़ी गाड़ी के समीप खड़े दो व्यक्तियों को घेराबंदी कर दबिश दी गई। दोनों अभियुक्तों को हिरासत में लेकर गिरफ्तार किया गया।गिरफ्तार अभियुक्तों में अजय कुमार पटेल पुत्र अशोक पटेल निवासी दबिलहा, थाना बरसठी, जनपद जौनपुर तथा इरफ़ान पुत्र मलिक शेख मन्सूर निवासी महुआरी, थाना मड़िहान, जनपद मिर्जापुर शामिल है।
]]>आज़मगढ़। जिले के देवगांव थाना क्षेत्र में पीड़ित से अवैध धनराशि मांगने के गंभीर आरोप पर एसएसपी डॉ. अनिल कुमार ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच में दोषी पाए गए उपनिरीक्षक के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर उसे निलंबित कर दिया गया और गिरफ्तार कर न्यायालय भेज दिया गया।
देवगांव थाना क्षेत्र के ग्राम मिर्जापुर निवासी आकाश चौहान पुत्र रामजियावन चौहान ने शिकायत दी कि ग्राम प्रधान सोनू प्रजापति व उनके साथियों ने पुरानी रंजिश में उनके साथ मारपीट की, जिसमें उन्हें चोटें आईं। शिकायत के आधार पर तीन नामजद अभियुक्तों के विरुद्ध मुकदमा पंजीकृत कर विवेचना उपनिरीक्षक लालबहादुर प्रसाद को सौंपी गई थी।
विवेचना के दौरान उ0नि0 द्वारा तीनों अभियुक्तों को जेल भेजने, चार्जशीट लगाने तथा त्वरित कार्रवाई करने के नाम पर पीड़ित से ₹5000 की अवैध धनराशि की मांग की गई। शिकायत मिलते ही एसएसपी डॉ. अनिल कुमार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए बड़ी कार्रवाई की और स्वतंत्र जांच के लिए क्षेत्राधिकारी लालगंज को निर्देशित किया।
जांच में उपनिरीक्षक लालबहादुर प्रसाद प्रथमदृष्टया दोषी पाए गए। रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि अवैध धनराशि मांगने की बात सत्य है, जो पुलिस विभाग की आचरण संहिता के विपरीत है।
जांच निष्कर्ष के आधार पर उनके विरुद्ध थाना देवगांव पर मु0अ0सं0 441/2025 धारा 7 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 में मुकदमा दर्ज कर हिरासत में लेकर विधिक कार्रवाई की जा रही है। साथ ही एसएसपी के आदेश पर उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
एसएसपी डॉ0 अनिल कुमार ने कहा है कि किसी भी प्रकार का भ्रष्टाचार, अवैध उगाही या अनैतिक मांग बिल्कुल अस्वीकार्य है। ऐसे कृत्यों पर शून्य सहनशीलता की नीति अपनाई गई है और दोषी पाए जाने वाले कर्मियों पर सख्त विभागीय व कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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आजमगढ़। राजकीय बालिका उच्चतर माध्यमिक विद्यालय देवगांव में फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी पाने के मामले में प्रशासनिक अधिकारी के बाद अब सहायक अध्यापिका पर भी मुकदमा दर्ज किया गया है।
मिली जानकारी के अनुसार, डीआईओएस उपेंद्र कुमार ने पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजकर आरोपी शिक्षिका पर एफआईआर दर्ज कराने का अनुरोध किया था। इसके बाद देवगांव थाने की पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
बताया गया कि वर्ष 2014-15 में संयुक्त शिक्षा निदेशक आजमगढ़ उत्तम गुलाटी ने 340 पदों पर सहायक अध्यापकों की नियुक्तियों के लिए विज्ञापन जारी किया था। वर्ष 2015-16 में संयुक्त शिक्षा निदेशक अखिलेश पांडेय और राम चेत के कार्यकाल में 252 शिक्षकों की तैनाती हुई थी।
वर्ष 2020 में तत्कालीन संयुक्त निदेशक ए.पी. वर्मा के पास आठ शिक्षकों के खिलाफ फर्जी मार्कशीट से नौकरी पाने की शिकायत पहुंची थी, जिनको बर्खास्त किया गया था। संयुक्त निदेशक की अध्यक्षता में गठित कमेटी की जांच में मंडल के 22 शिक्षकों के शैक्षणिक प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए । जिनमें आजमगढ़ के 10, मऊ के 8 और बलिया के 4 शिक्षक शामिल थे।
जांच में सामने आया कि इन शिक्षकों ने मोनार्ड यूनिवर्सिटी, हापुड़ और संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी की फर्जी मार्कशीट लगाकर नौकरी प्राप्त की थी। डीआईओएस के पत्र के आधार पर देवगांव कोतवाली पुलिस ने सहायक अध्यापिका प्रीति सिंह के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत किया है। देवगांव कोतवाल विमल प्रकाश राय ने बताया कि मामले की जांच जारी है।
चार दिन पूर्व इस प्रकरण में एक प्रशासनिक अधिकारी पर भी मुकदमा दर्ज किया गया था।
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