इन 25 मामलों में संबंधित तहसीलों के एसडीएम ने कार्रवाई करते हुए 52,500 रुपये का जुर्माना लगाया। वहीं, राजस्व विभाग की टीम ने अब तक 17,500 रुपये की वसूली कर ली है। अधिकारियों का कहना है कि बाज़ारों और गांवों में लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, इसके बावजूद कुछ किसान पराली जलाने की आदत नहीं छोड़ रहे हैं। पिछले 15 दिनों से प्रतिदिन किसी न किसी क्षेत्र में पराली जलने की सूचना मिल रही है।
पराली जलाने पर रोक लगाने के लिए कृषि विभाग, राजस्व विभाग और जिला प्रशासन की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं। सेटेलाइट से प्राप्त लोकेशन के आधार पर टीमें तुरंत मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन कर रही हैं। सत्यापन में गड़बड़ी मिलने पर किसान के खिलाफ कार्रवाई अनिवार्य रूप से की जा रही है।
एक माह के भीतर सगड़ी, बूढ़नपुर, फूलपुर समेत अन्य तहसीलों में पराली जलाने की घटनाएं अधिक मिलीं। इन सभी घटनाओं की रिपोर्ट एडीएम (वित्त एवं राजस्व) की अध्यक्षता में गठित अनुश्रवण सेल को भेजी जा रही है। इस सेल में एसपी, जिला विकास अधिकारी, उप कृषि निदेशक, डीएओ, डीआईओएस, डीपीआरओ, गन्ना अधिकारी और क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी शामिल हैं। सेल की अभिलेखीय कार्यवाही की ज़िम्मेदारी उप कृषि निदेशक को दी गई है।
कृषि विभाग के अनुसार, खेत में पराली जलाने पर पांच से 30 हजार रुपये तक का जुर्माना निर्धारित है, जो खेत के क्षेत्रफल के आधार पर लगता है। दो एकड़ से कम पर 5000, दो से पाँच एकड़ पर 10,000, और पाँच एकड़ से अधिक पर 30,000 रुपये प्रति घटना जुर्माना लगाया जा सकता है।
उप कृषि निदेशक अशीष कुमार ने बताया किजनपद में पराली जलाने की 27 घटनाएं सेटेलाइट के जरिए पकड़ी गईं। इनमें से 25 घटनाओं में पराली जलती पाई गई और सभी में कार्रवाई की गई है। किसानों को लगातार जागरूक किया जा रहा है। अभी तक 25 किसानों पर 52,500 रुपये जुर्माना लगाया गया है।
]]>इसी क्रम में प्रभारी उप कृषि निदेशक डॉ. गगनदीप सिंह, सहायक विकास अधिकारी (कृषि) एवं क्षेत्रीय कर्मचारियों ने ग्राम पंचायत कबीरुद्दीनपुर, विकासखंड अतरौलिया में किसानों को फसल अवशेष न जलाने और वेस्ट डी-कम्पोजर से कम्पोस्ट खाद बनाने की विधि समझाई। किसानों से इस जानकारी को अन्य कृषकों तक पहुँचाने की अपील भी की गई।
प्रभारी उप कृषि निदेशक ने कम्बाइन हार्वेस्टर मालिकों को चेतावनी दी कि बिना फसल अवशेष प्रबंधन उपकरण जोड़े कटाई करने पर सीजर और अर्थदंड की कार्रवाई होगी। जिलाधिकारी ने तहसील, विकासखंड और ग्राम स्तर पर गठित समितियों को क्षेत्र में सतत चक्रमण कर किसानों को पराली जलाने से होने वाले नुकसान मृदा की गुणवत्ता में गिरावट तथा मानव स्वास्थ्य पर दुष्प्रभावके बारे में जागरूक करने के निर्देश दिए हैं।
कृषि विभाग द्वारा सभी विकासखंडों में फार्मर रजिस्ट्री कैंपों में बैनर लगाकर भी कृषकों को जागरूक किया जा रहा है।
]]>जिलाधिकारी ने तहसील, विकासखण्ड और ग्राम स्तर पर गठित समितियों को सक्रिय कर क्षेत्र में चक्रमण करने और किसानों को फसल अवशेष व कूड़ा जलाने से होने वाले हानिकारक प्रभावों के प्रति जागरूक करने के निर्देश दिए। कृषि विभाग ने समस्त विकासखण्डों में फार्मर रजिस्ट्री के कैम्पों में बैनर लगाकर किसानों को शिक्षित किया। जिला कृषि रक्षा अधिकारी हिमांचल सोनकर और सहायक विकास अधिकारी (कृषि) राजन कुमार ने ग्रामसभा जमालपुर, विकासखण्ड-पल्हनी में किसानों को फसल अवशेष जलाने के बजाय वेस्ट डी-कम्पोजर से कम्पोस्ट खाद बनाने की विधि बताई और उन्हें इसे अन्य किसानों के साथ साझा करने के लिए प्रेरित किया।
पराली जलाने पर जनपद के दो किसानों अद्या प्रसाद, ग्राम-रतुआपार, विकासखण्ड अतरौलिया को ₹2500 और श्सुरेश, ग्राम-त्रिलोक, विकासखण्ड-जहानागंज को ₹2500 का जुर्माना लगाया गया। कुल जुर्माना राशि ₹5000 है। यह कार्रवाई उप जिलाधिकारी बूढ़नपुर और सदर द्वारा अमल में लाई गई।
]]>मिली जानकारी के अनुसार बुधवार को अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व गंभीर सिंह की अध्यक्षता में जूम एप के माध्यम से बैठक आयोजित की गई। बैठक में खेतों में पराली जलाने की घटनाओं की समीक्षा की गई, जिसमें तहसील सगड़ी के तीन और बूढ़नपुर के एक किसान पर पराली जलाने का दोषी पाए जाने पर कुल 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।
एडीएम ने सभी कंबाइन हार्वेस्टर मालिकों को निर्देशित किया कि कंबाइन मशीनों के साथ सुपर एसएमएस या अन्य फसल अवशेष प्रबंधन यंत्रों का उपयोग अनिवार्य रूप से करें। साथ ही उप कृषि निदेशक कार्यालय से एनओसी लेना भी आवश्यक है, अन्यथा कंबाइन सीज करने की कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने बताया कि पराली जलाने पर कृषि भूमि के क्षेत्रफल के आधार पर 2500 से 15 हजार रुपये तक का जुर्माना निर्धारित है। चारों किसानों पर क्षेत्रफल के अनुसार 10 हजार रुपये अर्थदंड लगाते हुए तत्काल वसूली के निर्देश दिए गए।
]]>जिलाधिकारी ने प्रचार वाहनों के माध्यम से जनपद के सम्मानित कृषक बंधुओं से अपील की कि कटाई के समय कम्बाइन हार्वेस्टर से एस0एम0एस0, मल्चर, सुपर सीडर और अन्य कृषि यंत्रों का अनिवार्य रूप से प्रयोग करें, अन्यथा वाहन सीज कर दिए जाएंगे।
उप कृषि निदेशक आशीष कुमार ने बताया कि उत्तर प्रदेश शासन एवं राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा दिए गए निर्देशों के क्रम में, कृषि विभाग आजमगढ़ जनपद में धान की पराली, गन्ने की पत्ती और कूड़ा अपशिष्ट को जलाने से रोकने और उसका उचित प्रबंधन करते हुए इसे कम्पोस्ट खाद में परिवर्तित कर अगली फसल में उपयोग करने हेतु कृषकों को विभिन्न माध्यमों से जागरूक कर रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि खेत में फसल अवशेष जलाने से पर्यावरण को नुकसान के साथ-साथ मृदा की संरचना और खेत के मित्र कीटों की मृत्यु होती है, जिससे फसल की उत्पादकता और मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
उप कृषि निदेशक ने कृषकों से अपील की कि वे वेस्ट डी-कम्पोजर का उपयोग कर फसल अवशेष को कम्पोस्ट खाद के रूप में परिवर्तित करें और फसल अवशेष जलाने पर लगने वाले अर्थदंड से बचें। उन्होंने स्पष्ट किया कि फसल अवशेष जलाना दंडनीय अपराध है और इसके लिए 2,500 से 15,000 रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है।
इस अवसर पर जिला कृषि अधिकारी, भूमि संरक्षण अधिकारी (ऊ0सु0) और जिला कृषि रक्षा अधिकारी जनपद-आजमगढ़ भी उपस्थित रहे।
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