रिपोर्ट____अरुण यादव
आजमगढ़। जिले के महराजगंज क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालयों में लगातार हो रही चोरी की घटनाओं ने शिक्षा विभाग, विद्यालय प्रशासन और ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। बीते कुछ दिनों में अलग-अलग विद्यालयों को चोरों ने निशाना बनाया है, जिससे सरकारी विद्यालयों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मिली जानकारी के अनुसार, प्राथमिक विद्यालय नेवादा-I में 28 जून 2026 की रात अज्ञात चोर विद्यालय की चहारदीवारी फांदकर परिसर में घुस गए। चोरों ने भंडार गृह का कुंडा काटकर आंगनबाड़ी किट, टीएलएम किट और वाटवाटिका किट चोरी कर ली। विद्यालय के प्रधानाध्यापक संजय कुमार ने बताया कि इससे पहले 15 जून 2026 की रात भी इसी विद्यालय में चोरी हुई थी, जिसकी एफआईआर दर्ज कराई गई थी। लगातार दूसरी बार एक ही विद्यालय को निशाना बनाए जाने से शिक्षकों और ग्रामीणों में नाराजगी है। वहीं प्राथमिक विद्यालय कुम्हवट में भी 28 जून की रात रसोईघर का ताला तोड़कर चोर दो गैस सिलेंडर, एक बोरी गेहूं, एक बोरी चावल और दो बड़े भगौने उठा ले गए। विद्यालय प्रशासन ने मामले में पुलिस से जल्द कार्रवाई की मांग की है। इसके अलावा प्राथमिक विद्यालय चौरासी में भी ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान चोरी की घटना सामने आई थी। चोरों ने रसोईघर का ताला तोड़कर बड़े बर्तन, मिड-डे मील (एमडीएम) सामग्री, आंगनबाड़ी के बर्तन, समरसेबल पाइप सहित अन्य सामान चोरी कर लिया। सूचना मिलने पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी थी। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं से विद्यालय परिसरों में रखी शैक्षिक सामग्री, विभागीय अभिलेख और अन्य आवश्यक संसाधनों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। शिक्षकों का कहना है कि यदि चोरी की घटनाओं पर जल्द अंकुश नहीं लगाया गया तो विद्यालयों की शैक्षणिक व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है। वहीं इस संबंध में कप्तानगंज थाना प्रभारी जब प्रकाश ने बताया कि नेवादा विद्यालय में लगातार हुई चोरी की घटनाओं को गंभीरता से लिया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और घटना में शामिल लोगों की पहचान कर जल्द कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ सख्त विधिक कार्रवाई की जाएगी। उधर, शिक्षकों और ग्रामीणों ने प्रशासन से विद्यालय परिसरों की सुरक्षा मजबूत करने, रात्रि गश्त बढ़ाने तथा चोरी की घटनाओं का शीघ्र खुलासा करने की मांग की है।
]]>एक बयान जारी करते हुए कंचन वर्मा ने कहा कि 27000 प्राथमिक विद्यालयों को निकटवर्ती विद्यालयों में विलय करते हुए बंद करने की बात कही जा रही है। यह बिल्कुल भ्रामक एवं निराधार है। प्रदेश में किसी भी स्कूल को बंद नहीं किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश का प्राथमिक शिक्षा विभाग विद्यालयों में मानव संसाधन और आधारभूत सुविधाओं के विकास, शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर करने तथा छात्रों, विशेषकर बालिकाओं के, ड्राप आउट दर को कम करने के लिए सतत प्रयत्नशील है। इस दृष्टि से समय-समय पर विभिन्न अध्ययन किए जाते हैं। हमारा उदेश्य शिक्षा की गुणवत्ता को और बेहतर करना है।
प्रियंका व मायावती हुई थी हमलावर
उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार ने 27,764 प्राइमरी और जूनियर स्कूलों को बंद करने का फैसला लिया है। यह कदम शिक्षा क्षेत्र के साथ-साथ दलित, पिछड़े, गरीब और वंचित तबकों के बच्चों के खिलाफ है। यूपीए सरकार शिक्षा का अधिकार कानून लाई थी जिसके तहत व्यवस्था की गई थी कि हर एक किलोमीटर की परिधि में एक प्राइमरी विद्यालय हो ताकि हर तबके के बच्चों के लिए स्कूल सुलभ हो।कल्याणकारी नीतियों और योजनाओं का मकसद मुनाफा कमाना नहीं बल्कि जनता का कल्याण करना है। भाजपा नहीं चाहती कि कमजोर तबके के बच्चों के लिए शिक्षा सुलभ हो।
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