जिलाधिकारी ने तहसील, विकासखण्ड और ग्राम स्तर पर गठित समितियों को सक्रिय कर क्षेत्र में चक्रमण करने और किसानों को फसल अवशेष व कूड़ा जलाने से होने वाले हानिकारक प्रभावों के प्रति जागरूक करने के निर्देश दिए। कृषि विभाग ने समस्त विकासखण्डों में फार्मर रजिस्ट्री के कैम्पों में बैनर लगाकर किसानों को शिक्षित किया। जिला कृषि रक्षा अधिकारी हिमांचल सोनकर और सहायक विकास अधिकारी (कृषि) राजन कुमार ने ग्रामसभा जमालपुर, विकासखण्ड-पल्हनी में किसानों को फसल अवशेष जलाने के बजाय वेस्ट डी-कम्पोजर से कम्पोस्ट खाद बनाने की विधि बताई और उन्हें इसे अन्य किसानों के साथ साझा करने के लिए प्रेरित किया।
पराली जलाने पर जनपद के दो किसानों अद्या प्रसाद, ग्राम-रतुआपार, विकासखण्ड अतरौलिया को ₹2500 और श्सुरेश, ग्राम-त्रिलोक, विकासखण्ड-जहानागंज को ₹2500 का जुर्माना लगाया गया। कुल जुर्माना राशि ₹5000 है। यह कार्रवाई उप जिलाधिकारी बूढ़नपुर और सदर द्वारा अमल में लाई गई।
]]>जिलाधिकारी ने प्रचार वाहनों के माध्यम से जनपद के सम्मानित कृषक बंधुओं से अपील की कि कटाई के समय कम्बाइन हार्वेस्टर से एस0एम0एस0, मल्चर, सुपर सीडर और अन्य कृषि यंत्रों का अनिवार्य रूप से प्रयोग करें, अन्यथा वाहन सीज कर दिए जाएंगे।
उप कृषि निदेशक आशीष कुमार ने बताया कि उत्तर प्रदेश शासन एवं राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा दिए गए निर्देशों के क्रम में, कृषि विभाग आजमगढ़ जनपद में धान की पराली, गन्ने की पत्ती और कूड़ा अपशिष्ट को जलाने से रोकने और उसका उचित प्रबंधन करते हुए इसे कम्पोस्ट खाद में परिवर्तित कर अगली फसल में उपयोग करने हेतु कृषकों को विभिन्न माध्यमों से जागरूक कर रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि खेत में फसल अवशेष जलाने से पर्यावरण को नुकसान के साथ-साथ मृदा की संरचना और खेत के मित्र कीटों की मृत्यु होती है, जिससे फसल की उत्पादकता और मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
उप कृषि निदेशक ने कृषकों से अपील की कि वे वेस्ट डी-कम्पोजर का उपयोग कर फसल अवशेष को कम्पोस्ट खाद के रूप में परिवर्तित करें और फसल अवशेष जलाने पर लगने वाले अर्थदंड से बचें। उन्होंने स्पष्ट किया कि फसल अवशेष जलाना दंडनीय अपराध है और इसके लिए 2,500 से 15,000 रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है।
इस अवसर पर जिला कृषि अधिकारी, भूमि संरक्षण अधिकारी (ऊ0सु0) और जिला कृषि रक्षा अधिकारी जनपद-आजमगढ़ भी उपस्थित रहे।
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