आजमगढ़। लोकसभा चुनाव में जनपद की दोनों लोकसभा सीटों आजमगढ़ और लालगंज सुरक्षित के लिए नामांकन का कार्य चल रहा है। सपा और भाजपा ने जहां तीसरे दिन ही नामांकन दाखिल कर लिया था। वहीं पांचवें दिन शुक्रवार को दोनों लोकसभा सीटों से बसपा प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल किया।
शुक्रवार को नामांकन के पांचवें दिन जुमे की नमाज के बाद आजमगढ़ लोकसभा सीट से बसपा प्रत्याशी मसहूद अहमद अपनी पत्नी सबीहा अंसारी और समर्थकों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे। इस दौरान उनके साथ लालगंज की बसपा प्रत्याशी डा. इंदू चौधरी भी थी । दोंनो प्रत्याशियों ने अपना अपना नामांकन पत्र दाखिल किया।नामांकन के बाद दोनों प्रत्याशियों ने अपनी अपनी जीत का दावा किया
आज़मगढ़ लोकसभा सीट से प्रत्याशी मसहूद अहमद ने जहां भाजपा और सपा प्रत्याशियों के बाहरी होने की बात कही तो वहीं लालगंज सुरक्षित सीट से प्रत्याशी डा. इंदू चौधरी ने सपा को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि सपा बसपा को हमेशा भाजपा की बी टीम कहती है लेकिन मुसलमानों पर जुल्म हो रहा है और सपा कुछ नहीं बोल रही है। जबकि हमारी बहन जी ने कहा है कि जब बाबरी मस्जिद बनेगी तो बसपा उसमें सबसे आगे रहेगी। आज बसपा ने 27 मुस्लिम प्रत्याशी उतारे हैं। ऐसे में भाजपा की बी टीम बसपा नहीं बल्कि समाजवादी पार्टी है। नामांकन के दौरान कलेक्ट्रेट पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा और अधिकारी लगातार चक्रमण कर स्थिति पर नजर बने हुए थे।
आजमगढ़ । कभी बसपा का भी गढ़ माना जाता रहा आज़मगढ़ जिले को अब बसपा सुप्रीमो मायावती ने आजमगढ़ लोकसभा सीट को प्रयोगशाला बना दिया है। यही कारण है कि तीन सप्ताह के अंदर अब तक तीन बार बसपा प्रत्याशियों के टिकट बदले जा चुके हैं।
वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव से पूर्व बसपा के प्रत्याशी रहे शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली के समाजवादी पार्टी में चले जाने के बाद से बसपा को आजमगढ़ जिले में प्रत्याशी नहीं मिल रहे हैं। बसपा ने 12 अप्रैल को प्रत्याशियों की घोषित चौथी लिस्ट में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रहे भीम राजभर को आजमगढ़ लोकसभा सीट से प्रत्याशी बनाया था। 12 दिन आजमगढ़ के प्रत्याशी रहे भी राजभर को 24 अप्रैल को आजमगढ़ से बलिया जिले के सलेमपुर लोकसभा सीट पर शिफ्ट कर दिया गया। इसके बाद आजमगढ़ लोकसभा सीट खाली हो गई। आजमगढ़ लोक सभा सीट से बसपा माइनॉरिटी प्रत्याशी की तलाश में लगी थी । इसी क्रम में 28 अप्रैल को बसपा की नौवीं लिस्ट में आज़मगढ़ शहर की रहने वाली औ कांग्रेस की नेत्री सबीहा अंसारी को प्रत्याशी बनाया गया। 28 अप्रैल को बसपा की प्रत्याशी बनी सबीहा अंसारी अपनी चुनावी तैयारियां कर रही थी। इसी बीच दो मई को बसपा ने उनके पति मसहूद अहदम को बसपा का प्रत्याशी बना दिया। मसहूद अहमद को कांग्रेस ने अपनी नई कार्यकारिणी में उपाध्यक्ष बनाया हुआ था। इंडिया गठबंधन और एनडीए गठबंधन से चुनौती के सवाल पर मसहूद अहमद का कहना है कि किसी भी दल से कोई चुनौती नहीं है। मसहूद अहमद ब्राइट एजूकेशनल एंड सोशल नाम से एक संगठन चलाकर गरीबों की सेवा करते हैं।
]]>
आजमगढ़। सदर लोकसभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी धर्मेंद्र यादव ने परानापुर (हरिवंशपुर) स्थित अपने स्थाई निवास में मंगलवार 30 अप्रैल को विधिवत हवन पूजन के साथ गृह प्रवेश किया। इस अवसर पर उन्होंने नेताजी मुलायम सिंह यादव को याद करते हुए कहाकि उनका आजमगढ़ से विशेष लगाव था और वह इसे अपना दूसरा घर मानते थे, वह जब भी राजनीति में कोई नया कदम उठाते थे तो आजमगढ़ की जनता से पहला आशीर्वाद लेते थे। सपा प्रत्याशी ने बताया कि 01 मई बुधवार को अपना नामांकन करेंगे, प्रातः 10.30 बजे नामांकन जुलूस उनके परानापुर आवास से निकलेगा। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों और आम जनमानस से नामांकन कार्यक्रम में अधिकाधिक संख्या में सम्मिलित होने का आग्रह किया है।
]]>
आजमगढ़। नामांकन प्रक्रिया के एक दिन पहले आजमगढ सदर सीट से बसपा प्रत्याशी के नाम की घोषणा हो गई। यादव-मुस्लिम बाहुल्य सीट पर बसपा ने भी मुस्लिम प्रत्याशी पर भरोसा जताया है। बसपा ने शबीहा अंसारी को अपना प्रत्याशी घोषित किया गया है। लखनऊ से आजमगढ़ आने पर पार्टी कार्यालय में बसपा नेताओं द्वारा शबीहा अंसारी का स्वागत किया गया। बता दें 2018 से 2022 तक कांग्रेस अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ की प्रदेश महासचिव रहीं शबीहा अंसारी शहर के पहाड़पुर की रहने वाली हैं। एमए शिक्षा शास्त्र की डिग्री है। शबीहा पहाड़पुर में एक कोचिंग सेेंटर भी चलाती हैं। 32 वर्षीय शबीहा अंसारी के पति मसूद अंसारी भी एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं। बसपा से टिकट मिलने की बात पर उन्होंने कहा कि समाज के लिए विभिन्न माध्यमों व बसपा कैडर से जुड़ीं रहीं। बसपा के मंडलीय व जिला स्तरीय अधिकारियों से भी संपर्क रहा। बसपा के जिलाध्यक्ष अरविंद कुमार ने शबीहा अंसारी के टिकट मिलने की बात की पुष्टि करते हुए कहा कि यह पार्टी मुखिया का फैसला है।
इससे पहले बसपा ने मऊ के रहने वाले व बसपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भीम राजभर को टिकट दिया था लेकिन बाद में उनका टिकट काट दिया गया था।
]]>बलिया से लल्लन सिंह यादव और जौनपुर से श्रीकला रेड्डी (पत्नी- धनंजय सिंह) को चुनाव मैदान में उतारा है। गाजीपुर से सपा प्रत्याशी और सांसद अफजाल अंसारी के सामने उमेश कुमार सिंह चुनाव लड़ेंगे, वाराणसी सीट से पीएम मोदी के सामने अतहर जमाल लारी को उतारा गया है।मैनपुरी सीट से सपा प्रत्याशी और सांसद डिंपल यादव के खिलाफ बसपा ने अपना उम्मीदवार बदला है। गुलशन देव शाक्य का टिकट काट दिया है। उनकी जगह शिव प्रसाद यादव को टिकट दिया गया है।
दरअसल, धनंजय सिंह जौनपुर लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे। इसी बीच जौनपुर की अदालत ने एक मामले में सात वर्ष की सजा सुना दी। इसके बाद धनंजय को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया। सजा मिलने के बाद धनंजय चुनाव नहीं लड़ सकते हैं, इसलिए श्रीकला ने चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया है। श्रीकला वर्ष 2021 में जौनपुर की जिला पंचायत अध्यक्ष चुनीं गईं। उन्होंने निर्दलीय चुनाव जीता था। अध्यक्ष पद के लिए हुए चुनाव में उन्हें 43 वोट मिले थे। इसके बाद राजनीति में सक्रियता बढ़ी और पति धनंजय के साथ विभिन्न सामाजिक कार्यक्रमों में शिरकत करने लगीं। 2022 के विधानसभा चुनाव में भी सक्रिय भूमिका निभाई थी।श्रीकला रेड्डी मूल रूप से तेलंगाना की रहने वाली हैं। बड़े कारोबारी घराने से ताल्लुक रखती हैं। उनके पिता जितेंद्र रेड्डी भी विधायक रह चुके हैं, जबकि मां ललिता रेड्डी अपने गांव की सरपंच रह चुकी हैं। श्रीकला का विवाह जौनपुर के पूर्व सांसद धनंजय सिंह से हुआ है। वह धनंजय की तीसरी पत्नी हैं। बीते एक सप्ताह से श्रीकला जौनपुर में हैं। लगातार लोगों से जनसंपर्क भी कर रही हैं।
]]>आज़मगढ़। आज़मगढ़ लोकसभा सीट पर बसपा मुखिया मायावती ने राजनीतिक पंडितों को चौकाते हुए अपने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व आज़मगढ़ मंडल के जोनल कोआर्डिनेटर रहे भीम राजभर को पार्टी का प्रत्याशी बनाया है। टिकट की घोषणा होते ही बसपा खेमे में जहां खुशी की लहर है वही भाजपा और सपा खेमे में नए सिरे से जीत की रणनीति बनाई जा रही है। इसी के साथ ही आज़मगढ़ लोकसभा सीट से भाजपा, बसपा और सपा तीनों दलों के प्रत्याशी पैरासूट प्रत्याशी ही चुनावी मैदान में ताल ठोकेंगे।
भीम राजभर का जन्म 3 सितंबर 1968 में मऊ जनपद के कोपगंज ब्लॉक के मोहम्मदपुर बाबूपुर गांव में हुआ था। भीम राजभर ने अपनी प्राथमिक शिक्षा-दीक्षा महाराष्ट्र से और सेकेंड्री शिक्षा नागपुर से किया। भीम राजभर की एक बहन है। इनके पिता रामबली राजभर कोल्ड फील्ड में सिक्योरिटी इंचार्ज के पद पर कार्यरत रहे हैं। भीम राजभर ने 1985 में ग्रेजुएशन किया और 1987 में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। एलएलबी पास भीम राजभर एक अधिवक्ता होने के साथ बसपा से ही अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत वर्ष 1985 में की । वे बसपा के मऊ जिलाध्यक्ष भी रहे हैं। वर्ष 2012 में भीम राजभर ने बसपा से मऊ सदर विधानसभा सीट से चुनाव भी लड़े थे, इस चुनाव में उन्हें बाहुबली मुख्तार अंसारी से हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद भीम राजभर को आजमगढ़ मंडल का जोनल कोआर्डिनेटर बनाया गया था। वर्ष
2017 में भाजपा के प्रचंड बहुमत के बाद जब बसपा के बड़े नेता दूसरे दलों में चले गए तो बसपा मुखिया मायावती ने वर्ष 2020 में भीम राजभर को प्रदेश अध्यक्ष बनाया। और अब भीम राजभर को आज़मगढ़ लोकसभा का प्रत्याशी बनाया गया है।
आज़मगढ़ लोकसभा चुनाव में भाजपा ने निवर्तमान सांसद दिनेश लाल यादव को प्रत्याशी बनाया तो समाजवादी पार्टी ने धर्मेंद्र यादव को प्रत्याशी बनाया है। बसपा का टिकट घोषित नहीं होने से कयासों का बाज़ार भी गर्म था अधिकांश राजनीतिक पंडित यह मान रहे थे कि बसपा किसी मजबूत मुस्लिम प्रत्याशी को मैदान में उतरेगी लेकिन बसपा प्रमुख ने सबको चौकाते हुए शुक्रवार को भीम राजभर के नाम की घोषणा की। भीम राजभर के नाम की घोषणा के साथ ही अब सपा और भाजपा ने नए सिरे से जीत की रणनीति बनाने में जुट गई है।
]]>
लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी ने शनिवार को 9 प्रत्याशियों की सूची जारी की है। इसमें गोरखपुर, बस्ती समेत कुल 9 सीटों पर नाम हैं। बसपा ने आजमगढ़ से भीम राजभर, घोसी से बालकृष्ण चौहान, एटा मो. इरफान, धौरहरा से श्याम किशोर अवस्थी, फैजाबाद से सच्चिदानंद पांडेय, बस्ती से दयाशंकर मिश्रा, गोरखपुर से जावेद सिमनानी, चंदौली से सत्येंद्र कुमार मौर्य और रॉबर्टगंज से धनेश्वर गौतम को प्रत्याशी बनाया है। बसपा ने अभी तक 45 प्रत्याशियों का ऐलान कर दिया है। लोकसभा चुनाव 2024 में बसपा अकेले चुनाव लड़ रही है। वह न तो भारतीय जनता पार्टी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का हिस्सा है और न ही समाजवादी पार्टी और कांग्रेस नीत भारतीय राष्ट्रीय विकासात्मक समावेशी गठबंधन यानी INDIA अलायंस का. बसपा ने इस चुनाव में शुरू से ही एकला चलो का सुर साधे रखा. बीच में कई मौकों पर यह दावा किया जाता रहा कि बसपा, किसी गठबंधन के साथ जा सकती है लेकिन मायावती ने हमेशा इससे इनकार किया।
]]>