समापन समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शामिल होंगे। वह स्वच्छता कर्मियों, नाविकों व पुलिसकर्मियों को सम्मानित भी करेंगे। इसके अलावा वह नेत्र कुंभ में भी जाएंगे।
गुरुवार को मुख्यमंत्री पूरे दिन महाकुंभनगर में रहेंगे। वह दिन में लगभग 11 बजे हेलीकॉप्टर से डीपीएस हेलीपैड पर आएंगे। वहां से कार से परेड मैदान स्थित गंगा पंडाल में जाएंगे, जहां स्वच्छता कर्मियों, नाविकों, पुलिसकर्मियों समेत अन्य विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों का सम्मान होगा।
मुख्यमंत्री का दोपहर का भोज (बड़ा खाना) पुलिसकर्मियों के साथ होगा। एक साथ लगभग तीन हजार पुलिसकर्मी बड़ा खाना में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री सेक्टर 6 में नेत्र कुंभ में जाएंगे। इसके बाद वह मीडिया सेंटर जाएंगे। शाम को वह प्लेन से लखनऊ लौट जाएंगे।
समापन समारोह में कई मंत्री और उच्चाधिकारी शामिल होंगे
मुख्यमंत्री के इन कार्यक्रमों में कई मंत्री और शासन के उच्चाधिकारी भी शामिल होंगे। महाकुंभ मेलाधिकारी विजय किरन आनंद ने बताया कि महाकुंभ का समापन महाशिवरात्रि स्नान पर्व के साथ हो गया। समापन समारोह गुरुवार को होगा। उन्होंने बताया कि संगम पर वर्ष पर्यंत सुविधाएं रहेंगी। अगले माह तक तक संगम के पास के तीन पांटून पुल तथा दो थानों का संचालन किया जाएगा। बिजली, पानी के साथ टॉयलेट्स की भी सुविधा संगम पर रहेगी। चकर्ड प्लेटें भी बिछी रहेंगी।
]]>महाकुम्भ नगर। पौष पूर्णिमा 13 जनवरी से शुरू हुए महाकुम्भ का औपचारिक समापन 27 फरवरी को होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं समापन समारोह में आएंगे और इस दुनिया के सबसे बड़े आयोजन में अपनी भूमिका का निर्वहन करने वालों के प्रति आभार प्रकट करेंगे। समापन समारोह को लेकर मेला प्राधिकरण के अधिकारियों ने तैयारियां शुरू कर दी है। हालांकि उससे पहले तीन और वर्ल्ड रिकॉर्ड भी बनाने की तैयारी है। एक वर्ल्ड रिकॉर्ड सोमवार को स्वच्छता का बनाने की कोशिश होगी। इसमें 15 हजार से अधिक स्वच्छताकर्मी एक साथ स्वच्छता का महाभियान चलाएंगे। इसके अलावा दो अन्य रिकॉर्ड भी बनाए जाएंगे। महाकुम्भ शुरू होने से महीनों पहले मुख्यमंत्री तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे थे। महाकुम्भ में पुण्य की डुबकी का संदेश इतने बड़े पैमाने पर पूरे विश्व में गया कि महाशिवरात्रि के अंतिम स्नान पर्व से तीन दिन पहले ही 62 करोड़ से अधिक लोग डुबकी लगा चुके है। मेले में सनातन धर्म के शंकराचार्यों, संतों, नागाओं, कल्पवासियों से लेकर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यों के मुख्यमंत्रियों, राज्यपालों, शीर्ष उद्योगपतियों, सिने कलाकार से लेकर हर वर्ग के लोगों ने डुबकी लगाई। करोड़ों लोगों को निःशुल्क भोजन वितरण हुआ तो नेत्रकुम्भ, दंत कुम्भ, ग्रीन कुम्भ जैसे सामाजिक प्रकल्पों ने मानवकल्याण के संकल्प को दोहराने का काम किया। 45 दिन के महाकुम्भ के समापन पर मुख्यमंत्री मेले से जुड़े कर्मचारियों को सौगात की घोषणा कर सकते हैं।
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