आज़मगढ़। किन्हीं कारणों से जो लोग प्रयागराज पहुंचकर महाकुंभ में स्नान नहीं कर सके, उन्हें संगम का जल जिले में ही उपलब्ध होगा। फायर ब्रिगेड के वाहन से आए इस जल का वितरण गुरुवार को सुबह साढ़े 9 बजे से पुलिस लाइन परिसर में होगा। इस दौरान सुरक्षा की भी व्यवस्था रहेगी।
प्रयागराज महाकुम्भ-2025 त्रिवेणी संगम के पवित्र अमृत जल का रिजर्व पुलिस लाइन्स, आजमगढ़ में श्रद्धालुओं को उपलब्ध कराए जाने के सन्दर्भ में। प्रयागराज महाकुम्भ-2025 के सफल समापन उपरान्त मा0 मुख्यमंत्री उ0प्र0 के निर्देशों के क्रम में जनपद आजमगढ़ के जो श्रद्धालु, महानुभाव एवं पुलिस तथा प्रशासन कर्मी विभिन्न कारणों से प्रयागराज महाकुम्भ में स्नान लाभ प्राप्त नहीं कर सके, उन श्रद्धालुओं के लिए त्रिवेणी संगम, महाकुंभ -2025 प्रयागराज का पवित्र अमृत जल अग्निशमन विभाग के फायर टेण्डर के माध्यम से जनपद आजमगढ़ लाया गया है। जिसका वितरण वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आजमगढ़ हेमराज मीना गुरुवार को सुबह साढ़े नौ बजे से करेंगे। पुलिस ने श्रद्धालुओं व आम जनमानस से अनुरोध किया है कि वे अपना-अपना जल पात्र साथ लाकर पुलिस लाइन्स, जनपद आजमगढ़ से त्रिवेणी संगम प्रयागराज का पवित्र अमृत जल प्राप्त कर, स्नान लाभ प्राप्त करें और संगम के पवित्र जल से आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त करें।
सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर
अंतिम स्नान पर्व के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को ध्यान में रखते हुए सभी सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। यह निर्देशित किया गया है कि मेला क्षेत्र और प्रमुख शिवालयों में सुरक्षा व्यवस्था के लिए विशेष प्रबंध किए जाएं।
भूख लगी थी तो बहन ने रोटी बनाने के लिए बर्तन, सब्जी और आटा का प्रबंध कर दिया। शैला ने पहली रोटी बनाई तब तक दुकान के सामने दो लोग आ गए। खाना मांगा तो मना नहीं कर पाए। कुछ मिनटों में दुकान के बाहर एक-एक की भीड़ दर्जनों में बदल गई। तवा की रोटी ने हर भूखे को अपनी ओर खींच लिया।
दुकान पर इतनी भीड़ आई की रोटी, सब्जी सब खत्म हो गई। इससे पहले पति-पत्नी ने कभी कोई दुकान नहीं चलाई थी, लेकिन बहनोई ने सलाह दी कि यहीं रुक जाओ, बिजनेस कर लो।
बात सही लगी और अगले दिन ठेले का प्रबंध हुआ, दुकान चल पड़ी। अब एक दिन में 15-20 हजार रुपये से अधिक की बिक्री कर रहे हैं। एक महीने से अधिक का समय दुकान खोले बीत गया है।सूचना पर छोटा बेटा पंकज भी प्रयागराज आ गया है। शैला बताती हैं कि हम काम करते-करते थक जाते हैं तो दुकान बंद कर देते हैं। पर भीड़ नहीं खत्म होती। इतनी दुकान चलेगी यह तो कभी सोचा ही नहीं था।
प्रयागराज महाराज ने तो हमारी झोली भर दी
सतीश गुप्ता कहते हैं कि वह लोगों के घरों में विशेष आयोजनों पर खाना बनाने का काम करते हैं, इसलिए इस काम में उन्हें कोई परेशानी नहीं हुई। प्रयागराज महाराज ने तो हमारी झोली भर दी। शैला की उम्र 52 व सतीश 54 साल है और पांच बच्चे हैं। इनमें से दो बेटियों की शादी कर चुकी हैं, जिनसे दो नाती भी हैं। अब दोनों के जीवन का दृष्टिकोण बदल गया है। वह कहते हैं कि यहां जब आए थे तो कभी यह नहीं सोचा कि हम पैसे कमाएंगे या बिजनेस करना सीख जाएंगे। यहां बिजनेस के साथ हम पुण्य भी कमा रहे हैं। अगर कोई पैसे नहीं दे पाता, तब भी भोजन करा ही देते हैं।
रोजगार के मुद्दे को लेकर युवा चिंतित रहते हैं, लेकिन संगम तट से 52 वर्षीय शैला क्या खूब संदेश देती हैं। कहती हैं कि वह पूरी तरह से गृहिणी हैं। उनकी घर में रोटी और खाना बनाने की कला ही उनका स्टार्टअप बन जाएगी यह तो कभी सोचा नहीं था। रोजगार के लिए पैसों की जरूरत नहीं होती अगर इच्छा शक्ति है तो कहीं से भी शुरुआत हो सकती है। रोजगार के लिए बस सोच चाहिए। काम अगर छोटा बड़ा नहीं मानते तो महाकुंभ आपको परिपक्व बिजनेसमैन बना देगा। अब हम जब अपने गांव जाएंगे तो वहां भी इसे आगे बढ़ाने पर विचार करेंगे।
]]>प्रयागराज। महाशिवरात्रि से दो दिन पहले सोमवार को भी श्रद्धालुओं का रेला उमड़ा और दिन में चार बजे तक एक करोड़ से अधिक लोग संगम में डुबकी लगा चुके थे। यह लगातार 10वां दिन रहा, जब रोजाना एक करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने महाकुंभ में स्नान किया। इसी के साथ कुल स्नानार्थियों की संख्या 63 करोड़ पार हो गई है। बुधवार को महाशिवरात्रि स्नान पर्व के साथ महाकुंभ का समापन हो जाएगा। ऐसे में इन दो दिनों में जैसे हर कोई संगम में पुण्य की डुबकी लगा लेने को आतुर दिख रहा है और हर कदम संगम की तरफ बढ़े जा रहे थे। सोमवार को भोर से ही श्रद्धालुओं का रेला लगा गया था और दिन बढ़ने के साथ भीड़ भी बढ़ती गई।
इसका नतीजा रहा कि दिन में चार बजे तक ही 1.05 करोड़ लोग स्नान कर चुके थे। मेला प्रशासन से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार 15 फरवरी से रोजाना हर रोज एक करोड़ से अधिक लोग स्नान कर रहे हैं। इस तरह से सोमवार को 10वां दिन रहा जब रोजाना स्नान करने वालों की संख्या एक करोड़ को पार रही। वहीं रविवार तक कुल 62.06 करोड़ लोग स्नान कर चुके थे। इस तरह से सोमवार को शाम चार बजे तक कुल 63.11 करोड़ लोग स्नान कर चुके थे। चूंकि अब मेला समाप्त होने में सिर्फ दो दिन शेष हैं। इसमें भी आखिरी दिन यानि, बुधवार को महाशिवरात्रि स्नान पर्व है। ऐसे में मंगलवार एवं बुधवार को और अधिक भीड़ के आसार हैं।
]]>दो दर्जन से अधिक ब्राजीली युवाओं का यह समूह विशेष रूप से महाशिवरात्रि स्नान के लिए यहां आया है। यह भक्त रियो डी जनेरियो और साओ पाउलो शहरों से जुड़े हैं, जहां भगवान शिव के कई मंदिर स्थित हैं।
सालों से शिवभक्ति में लीन हैं ब्राजील के ये युवा
ग्रुप के समन्वयक हेनरिक मोर ने बताया कि ये सभी युवा वर्षों से शिवभक्ति में लीन हैं और इस बार महाकुंभ में त्रिवेणी स्नान का संकल्प लेकर आए हैं। महाकुंभ की इस आध्यात्मिक यात्रा में विदेशी श्रद्धालुओं की सहभागिता भारतीय संस्कृति के वैश्विक प्रभाव को दर्शाती है, जिससे सनातन धर्म की व्यापकता और गहराई का पता चलता है।हाथों में ओम और रुद्राक्ष की माला धारण किए हैं शिव भक्त
ब्राजील के इन श्रद्धालुओं की भक्ति और समर्पण देखते ही बनती है। इनके शरीर पर भगवान शिव से जुड़े विभिन्न प्रतीकों के टैटू गुदे हुए हैं, जिनमें त्रिशूल, डमरू और महाकाल की आकृतियां प्रमुख हैं। पुरुषों के कानों में त्रिशूल के आकार की कुंडलियां और महिलाओं के हाथों में ओम व रुद्राक्ष की माला इनकी भक्ति को और विशेष बना रही हैं।
शरीर पर गुदवाया है धार्मिक टैटूग्रुप की सदस्य इसाबेला ने बताया कि ब्राजील में कयापो समुदाय के लोग शरीर पर धार्मिक प्रतीक का टैटू गुदवाने की परंपरा को मानते हैं, जिससे प्रेरित होकर उन्होंने शिवभक्ति का यह अनूठा स्वरूप अपनाया है। दल के सदस्य बताते हैं कि वह हर वर्ष महाशिवरात्रि के अवसर पर वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन और गंगा स्नान के लिए आते थे, लेकिन इस बार प्रयागराज में महाकुंभ के दिव्य आयोजन की ख्याति सुनकर यहां पहुंचे हैं।
जीवन में नई ऊर्जा का संचार
उनका कहना है कि इस अलौकिक अनुभव ने उनके जीवन में नई ऊर्जा का संचार किया है। हेनरिक मोर कहते हैं कि यह महाकुंभ न केवल एक धार्मिक आयोजन है, बल्कि जीवन को आध्यात्मिक रूप से समृद्ध करने का एक अनमोल अवसर भी है।
]]>उन्होंने एक सोशल मीडिया टिप्पणी के माध्यम से विपक्ष को जवाब देते हुए कहा कि महाकुंभ में जिसने जो तलाशा उसे वो मिला। गिद्घों को केवल लाश मिली। सुअरों को गंदगी मिली। संवेदनशील लोगों को रिश्तों की खूबसूरत तस्वीर मिली। आस्थावानों को पुण्य मिला। गरीबों को रोजगार मिला। अमीरों को धंधा मिला। श्रद्घालुओं को साफसुथरी व्यवस्था मिली। पर्यटकों को अव्यवस्था मिली। सद्भावना वाले लोगों को जातिरहित व्यवस्था मिली। एक ही स्थान पर सभी जाति के लोगों ने स्नान किया। उन्होंने कहा कि महाकुंभ को लेकर किए जाने वाले प्रश्न समाजवादियों और वामपंथियों की नीयत को दर्शाते हैं।
उन्होंने कहा कि महाकुंभ की व्यवस्थाओं को मैंने खुद देखा है। सपा सरकार में हुए कुंभ में एक गैर सनातनी को कुंभ का प्रभारी बना दिया गया था क्योंकि तब के मुख्यमंत्री के पास इसके लिए समय नहीं था।
मुख्यमंत्री योगी ने राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान सपा नेताओं के व्यवहार को लेकर भी विपक्ष को घेरा। उन्होंने कहा कि ये लोग संविधान की बात करते हैं। लोकतंत्र की बात करते हैं और महापुरुषों के सम्मान की बात करते हैं लेकिन राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान सपा के लोगों का जो आचरण था वो बताता है कि वो संविधान के बारे में क्या सोचते हैं।
16 लाख करोड़ के निवेश प्रस्तावों को जमीन पर उतारा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सनातन के आयोजनों से यूपी को नई पहचान मिली है। प्रदेश के बारे में लोगों की धारणा बदली है। प्रदेश की कानून व्यवस्था में सुधार हुआ है। यही कारण है कि लाखों करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव आ रहे हैं। हम लोगों ने अब तक 16 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारा है जिससे कि 60 लाख युवाओं को रोजगार मिला है। ये डबल इंजन की सरकार का ही परिणाम है कि आज दुनिया भर के देश यूपी में निवेश के लिए आ रहे हैं।
प्रयागराज महाकुंभ में डूबकी लगाने की आस लेकर चारबाग रेलवे स्टेशन पर ट्रेन पकड़ने पहुंचे श्रद्धालुओं को निराशा हाथ लगी। कुंभ स्पेशल ट्रेन आने की घोषणा हुई तो श्रद्धालु प्लेटफार्म नंबर दो पर पहुंचे। जब तक ट्रेन रूकती, तब तक लोग दौड़ लगाते हुए ट्रेन में चढ़ गए। ट्रेन रूकते-रूकते फुल हो गई। ऐसी स्थिति महिलाएं, बच्चें और बुजुर्ग ट्रेन निहारते रह गए। जब बोगी में चढ़ने के बाद जगह नहीं मिली तो महिलाएं और बुजुर्ग श्रद्धालुओं ने गलियारे में जमीन पर बैठने को मजबूर दिखे। चारबाग, आलम नगर, गोमती नगर से 14 स्पेशल ट्रेनें चलाई गई लेकिन श्रद्धालुओं के दबाव के आगे जगह कम पड़ गई।
ट्रेन नंबर 04076 महाकुंभ स्पेशल फाफामऊ तक जा रही थी। यह ट्रेन दिल्ली के आनन्द विहार टर्मिनल से चलकर लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन पर दोपहर बारह बजे के करीब प्लेटफार्म नंबर दो पर पहुंची। ट्रेन आने की घोषणा पर श्रद्धालु जब तक प्लेटफार्म पर ट्रेन रूकने का इंतजार करते तब तक ट्रेन की हर बोगी फुल हो गई। शाम को रवाना होने वाली गंगा गोमती व इंटरसिटी भी पूरी तरह खचाखच भर दिखी। वहीं लंबे समय बाद त्रिवेणी पटरी पर लौटी तो यात्रियों को थोड़ी राहत जरूर मिली।
चारबाग के अलावा आलमनगर, गोमतीनगर से 14 महाकुंभस्पेशल ट्रेनें प्रयागराज के लिए चलाई गईं। बावजूद श्रद्धालुओं को धक्का मुक्की करके ट्रेन में सवार होना पड़ा। चारबाग स्टेशन पर पिछले दिनों यात्रियों की भीड़ को संभालने में आरपीएफ व जीआरपी जवानों भी भीड़ के आगे नहीं चली। रविवार को प्लेटफार्म पर जुटने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ को कंट्रोल करने के लिए आरपीएफ जीआरपी के जवानों की सक्रियता नहीं दिखी।
चारबाग से रवाना हुई ट्रेनों के दिव्यांग व महिला कोच के हालात कुछ ऐसे थे कि भीड़ को जहां खाली बोगी मिली, वहीं घुस गए। जबकि दिव्यांग व महिलाएं बाहर खड़ी रह गईं। जीआरपी व आरपीएफ ने महिलाओं को उनकी बोगियों में बैठाने में मदद की। लगेजयान में सवार यात्रियों को भी नीचे उतारा गया।
बरेली प्रयागराज की आरक्षित बोगियां खाली करवाईं
बरेली प्रयागराज एक्सप्रेस की एसी बोगी से यात्री अमिता सिंह महाकुंभ जा रही थीं। चारबाग स्टेशन पर उनके कोच में श्रद्धालु प्रवेश कर गए और सीट पर काबिज हो गए। शिकायत पर आरपीएफ ने सीट खाली करवाई। ऐसे ही अन्य ट्रेनों की आरक्षित बोगियों से जनरल के टिकट पर सफर करने वाले श्रद्धालुओं को बाहर निकाला गया।
ट्रेन से मिली मायूसी रोडवेज बस ने दूर की
वंदे भारत, गंगा गोमती, त्रिवेणी, बरेली प्रयागराज, योगनगरी ऋषिकेश एक्सप्रेस जैसी नियमित ट्रेनों में लंबी वेटिंग 28 फरवरी तक बरकरार है। इससे महाकुंभ जाने वाले यात्रियों को मायूसी हाथ लगी। बड़ी संख्या में चारबाग से यात्री आलमबाग बस अड्डे पहुंचे, जहां उन्होंने बसों के जरिए महाकुंभ के लिए रवाना हुए। साधारण से लेकर लग्जरी बसों तक में आसानी से सीटें मिल गईं। रोडवेज प्रशासन की ओर से रविवार को 315 बसों से श्रद्धालुओं को प्रयागराज भेजा गया।
]]>महाकुम्भ नगर। पौष पूर्णिमा 13 जनवरी से शुरू हुए महाकुम्भ का औपचारिक समापन 27 फरवरी को होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं समापन समारोह में आएंगे और इस दुनिया के सबसे बड़े आयोजन में अपनी भूमिका का निर्वहन करने वालों के प्रति आभार प्रकट करेंगे। समापन समारोह को लेकर मेला प्राधिकरण के अधिकारियों ने तैयारियां शुरू कर दी है। हालांकि उससे पहले तीन और वर्ल्ड रिकॉर्ड भी बनाने की तैयारी है। एक वर्ल्ड रिकॉर्ड सोमवार को स्वच्छता का बनाने की कोशिश होगी। इसमें 15 हजार से अधिक स्वच्छताकर्मी एक साथ स्वच्छता का महाभियान चलाएंगे। इसके अलावा दो अन्य रिकॉर्ड भी बनाए जाएंगे। महाकुम्भ शुरू होने से महीनों पहले मुख्यमंत्री तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे थे। महाकुम्भ में पुण्य की डुबकी का संदेश इतने बड़े पैमाने पर पूरे विश्व में गया कि महाशिवरात्रि के अंतिम स्नान पर्व से तीन दिन पहले ही 62 करोड़ से अधिक लोग डुबकी लगा चुके है। मेले में सनातन धर्म के शंकराचार्यों, संतों, नागाओं, कल्पवासियों से लेकर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यों के मुख्यमंत्रियों, राज्यपालों, शीर्ष उद्योगपतियों, सिने कलाकार से लेकर हर वर्ग के लोगों ने डुबकी लगाई। करोड़ों लोगों को निःशुल्क भोजन वितरण हुआ तो नेत्रकुम्भ, दंत कुम्भ, ग्रीन कुम्भ जैसे सामाजिक प्रकल्पों ने मानवकल्याण के संकल्प को दोहराने का काम किया। 45 दिन के महाकुम्भ के समापन पर मुख्यमंत्री मेले से जुड़े कर्मचारियों को सौगात की घोषणा कर सकते हैं।
]]>यूपी रोडवेज के सहारनपुर, मेरठ, आगरा, अलीगढ़, मुरादाबाद, गाजियाबाद, बरेली परिक्षेत्र के लिए शनिवार को बसों की संख्या बढ़ा दी गई। शनिवार को भीड़ को देखते हुए वाराणसी, आजमगढ़, गोरखपुर, देवीपाटन परिक्षेत्र के लिए सर्वाधिक बसें चलाई गई।
यात्री प्रदेश के किसी भी हिस्से से आ रहे होंगे, उन्हें रोडवेज बसें प्रयागराज पहुंचाएंगी और वापसी की भी राह आसान करेंगी। इस बार महाशिवरात्रि पर रोडवेज ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है।
पूर्वी उत्तर प्रदेश से आने वाली भारी भीड़ के लिए झूंसी से सर्वाधिक बसों के संचालन की व्यवस्था की जा रही है। इसके अलावा, यहां पर सर्वाधिक संख्या में बसों को रिजर्व भी किया जा रहा है। बनारस-गोरखपुर की ओर की बसों का संचालन झूंसी से होगा।
लखनऊ के लिए बेला कछार से, कानपुर के लिए नेहरू पार्क और मीरजापुर-बांदा आदि के लिए लेप्रोसी में बसें 24 घंटे उपलब्ध रहेंगी। यूपी के सभी जिले के अलावा यूपी से सटे आठ राज्यों की सीमाओं से भी बसों का संचालन होगा। जैसे ही भीड़ बढ़ेगी आरक्षित बसों को भी मैदान में उतार दिया जाएगा। कोशिश यही होगी कि किसी भी स्थिति में तेजी के साथ श्रद्धालुओं को शहर से बाहर निकाला जाए और उन्हें गंतव्य तक पहुंचाया जाए। शनिवार को दिन भर रोडवेज अधिकारी अपनी तैयारियों को परखते रहे। महाशिवरात्रि के लिए रोडवेज की नौ पार्किंग शहर के बाहर बनाई गई है। इसमें तीन पार्किंग यथा बेला कछार प्रथम, द्वितीय व रिजर्व के नाम से रखी गई हैं। नेहरू पार्क बस स्टेशन, झूंसी, दुर्जनपुर, सरस्वती द्वार, लेप्रोसी व सरस्वती हाईटेक सिटी पार्किंग बनाई गई है।
झूंसी, सरस्वती गेट, नेहरू पार्क, बेला कछार, सरस्वती हाईटेक सिटी नैनी, लेप्रोसी मिशन बस स्टेशन से रोडवेज बसें यात्रियों को संबंधित रूट के लिए मिलेंगी।
]]>प्रयागराज। ये आस्था का ज्वार है। महाकुंभ की दिव्यता और मोक्ष का सुगम पथ। प्रचंड धूप और गर्मी से तपती जमीन फिर भी संगम स्नान के लिए लालायित लोगों का तांता टूटने का नाम नहीं ले रहा है। नंगे पांव कई किलोमीटर की यात्रा, जुबां पर बस इतना ही ””अब कितनी दूर है संगम””।धर्म और अध्यात्म के सबसे बड़े महोत्सव ””महाकुंभ”” के आकर्षण में खिंचे चले आ रहे लाखों लोगों को न परेशानी दिख रही है न दूरी। पांव में चाहे छाले पड़ जाएं लेकिन लक्ष्य केवल एक है संगम स्नान।
सीएमपी महाविद्यालय से संगम मार्ग पर बढ़ रहे झांसी के बंगरा कस्बा निवासी रामजी द्विवेदी बच्चे को कंधे पर बैठाए और स्वयं नंगे पांव थे। सिविल लाइंस हनुमान मंदिर से श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच पैदल चल रहे थे। मां गंगा के प्रति श्रद्धा कूट-कूट कर भरी थी। जमीन गर्म लग रही होगी, कोई साधन कर लीजिए…. यह कहते ही रामजी हंसे और बोल पड़े, साधन तो हमारी गंगा मां ही हैं। चल रहे हैं पैदल जहां तक गंगा मइया चाहेंगी, नहीं तो मांग लेंगे किसी से सहायता। बताया कि स्नान पर्वों पर नहीं आ सके थे, अब तो डुबकी लगाकर ही जाएंगे। मेला क्षेत्र में अब लगातार भीड़ बढ़ रही है।
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