नवंबर माह में जनपद में कुल 88 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें करीब 49 लोगों की मौत हो गई, जबकि 54 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। वहीं बीते 11 महीनों में सड़क हादसों में कुल 350 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि सैकड़ों लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
ये आंकड़े न सिर्फ चौंकाने वाले हैं, बल्कि प्रशासन और आम जनता दोनों के लिए गंभीर चेतावनी भी हैं। जानकारों के अनुसार सड़क दुर्घटनाओं की मुख्य वजह तेज रफ्तार, यातायात नियमों की अनदेखी, ओवरलोडिंग, खराब सड़कों की स्थिति और पर्याप्त ट्रैफिक व्यवस्था का अभाव है।
कई प्रमुख मार्गों पर न तो स्पीड ब्रेकर हैं और न ही चेतावनी संकेतक लगे हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा और बढ़ जाता है। बार-बार हादसों के बावजूद ठोस और स्थायी कदम न उठाए जाने से आमजन में नाराजगी भी बढ़ रही है।
शासन के निर्देश पर जिले में यातायात व्यवस्था को मजबूत करने और सड़क हादसों की रोकथाम के उद्देश्य से गठित क्रिटिकल कॉरिडोर (सीसी) टीम भी अभी तक पूरी तरह कारगर साबित नहीं हो पा रही है।
सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर सुधारने के लिए पीडब्ल्यूडी और एनएचएआई को ठोस पहल करनी होगी। सड़कों पर सफेद पट्टी, चेतावनी संकेतक, अंधे मोड़ों और घुमावदार मार्गों पर झाड़ियों की कटाई-छंटाई जैसे कार्य जल्द से जल्द पूरे कराए जाने की आवश्यकता है।
हादसों में जनहानि को न्यूनतम करने के लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की शून्य मृत्यु जिला कार्यक्रम (जेडएफडी) योजना के तहत इंटीग्रेटेड रोड एक्सीडेंट डेटाबेस के माध्यम से वर्ष 2023 व 2024 में घटित सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़ों के आधार पर आजमगढ़ को एक्सीडेंटल डेथ रिडक्शन डिस्ट्रिक्ट के रूप में चिह्नित किया गया है।
एसपी यातायात विवेक त्रिपाठी ने बताया कि विगत दो माह में हुई सभी दुर्घटनाओं के कारणों की विवेचना की जा रही है। दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए यातायात पुलिस शून्य मृत्यु जिला कार्यक्रम के तहत लगातार कार्रवाई कर रही है। अब तक 50 हजार से अधिक वाहनों पर रिफ्लेक्टर टेप लगाया जा चुका है और अभियान चलाकर लोगों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
]]>आज़मगढ़। जिले को जीरो फेटैलिटी डिस्ट्रिक्ट (शून्य मृत्यु दर वाला जिला) बनाने के लक्ष्य के तहत सात प्रमुख सड़कों को क्रिटिकल कॉरिडोर घोषित किया गया है। इन मार्गों को सबसे अधिक दुर्घटना-प्रवण माना गया है, जिनमें आजमगढ़–दोहरीघाट, आजमगढ़–वाराणसी, आजमगढ़–जौनपुर राजमार्ग तथा पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे प्रमुख हैं। इन सड़कों पर होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु दर को न्यूनतम करना प्रशासन की प्राथमिकता है।
इसी के तहत कुल 24 क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों (सीसी टीम) का गठन किया गया है। हर टीम में एक उपनिरीक्षक और चार मुख्य आरक्षी/आरक्षी शामिल होंगे, जो 15 थानों के क्रिटिकल पॉइंट्स पर लगातार निगरानी रखेंगे। गुरुवार को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार के निर्देशन में एएसपी ट्रैफिक विवेक त्रिपाठी ने पुलिस लाइन सभागार में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें 24 उपनिरीक्षकों और 24 आरक्षियों को दुर्घटना रोकथाम और प्रवर्तन से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रशिक्षण दिया गया।
क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों की प्रमुख जिम्मेदारियां
दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में, खासकर शाम के समय, एआरओ द्वारा गहन चेकिंग।
क्रिटिकल कॉरिडोर पर होने वाली दुर्घटनाओं के अभियोगों की विशेष विवेचना।
प्रवर्तन कार्यवाही के तहत रात में भारी वाहनों की आकस्मिक चेकिंग, चालक की थकान व नींद की स्थिति की जांच।
टी-पॉइंट, वाई-पॉइंट और चौराहों पर अतिक्रमण पर रोकथाम।
सड़क किनारे खड़े खराब व बाधक वाहनों को तुरंत हटवाना।
बॉडीवॉर्न कैमरा, सेफ्टी टॉर्च, पीए सिस्टम, इंटरसेप्टर, कोन आदि उपकरणों का उचित उपयोग।
ढाबों, होटलों, मैरिज हॉल और पेट्रोल पंपों के बाहर अवैध पार्किंग रोकना और सुनिश्चित करना कि इससे मुख्य सड़क अवरुद्ध न हो।
क्रिटिकल कॉरिडोर पर होने वाली दुर्घटनाओं की जांच उसी कॉरिडोर पर नियुक्त उपनिरीक्षक द्वारा की जाएगी, ताकि जांच त्वरित और सटीक हो सके।
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