दल की इस उपलब्धि पर आजमगढ़ लौटने के बाद डॉ. कृष्ण मोहन त्रिपाठी, रमाकांत वर्मा, संस्थान अध्यक्ष मनोज यादव, हेमंत श्रीवास्तव, अजेंद्र राय, सुनील अग्रवाल, प्रमोद कुमार सिंह, पंकज सिंह और गजराज प्रसाद सहित अन्य लोगों ने कलाकारों को बधाई दी।
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अंतिम दिन का उद्घाटन माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन कर चिल्ड्रेन कॉलेज के प्रबंधक कृष्णमोहन त्रिपाठी, भाजपा नेता अखिलेश मिश्रा गुड्डू, सर्वोदय ग्रुप ऑफ एजुकेशनल इंस्टिट्यूट के डायरेक्टर राजेंद्र प्रसाद यादव, रमाकांत वर्मा एवं गौरव अग्रवाल ने किया। अतिथियों का स्वागत स्वागताध्यक्ष अभिषेक जायसवाल ‘दीनू’ एवं संस्था अध्यक्ष मनोज यादव ने किया। कृष्णमोहन त्रिपाठी ने कहा कि यह महोत्सव आजमगढ़ को सांस्कृतिक पहचान दिलाने की दिशा में एक मजबूत कदम है।
महोत्सव के प्रथम सत्र में संदेश सांस्कृतिक मंच, फिरोजाबाद द्वारा प्रस्तुत नाटक “सम्बोधन” ने दर्शकों को भावनात्मक रूप से झकझोर दिया। बाप-बेटी के रिश्ते पर आधारित इस नाटक में प्रेम, शिकायत और अलगाव की जटिलताओं को वर्तमान और अतीत के समानांतर दृश्यों के माध्यम से प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। नाटक की विशेषता यह रही कि हर पात्र अपनी जगह सही प्रतीत होता है।
दूसरी प्रस्तुति मुंशी प्रेमचंद की कालजयी कृति “गोदान” रही, जिसे झारखंड सांस्कृतिक मंच, जमशेदपुर के कलाकारों ने शिवलाल सागर के निर्देशन में मंचित किया। इसके बाद नृत्य प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। नृत्य कला केंद्र, कोलकाता द्वारा लोकनृत्यों के साथ जनपद में पहली बार मदर्श डांस की प्रस्तुति दी गई। वहीं रॉकिंग डांस ग्रुप, कैमूर (बिहार) ने भूताकोलम और बॉलीवुड नृत्य से समां बांध दिया।
पुरस्कार वितरण के साथ महोत्सव का समापन भावुक क्षणों में हुआ। कलाकारों ने अगले वर्ष पुनः मिलने के वादे के साथ एक-दूसरे को गले लगाकर विदाई दी। इस अवसर पर अनूप अग्रवाल, सुनील अग्रवाल, प्रमोद कुमार सिंह, डॉ. पंकज सिंह, रिमझिम प्रजापति, आस्था दुबे, अभिषेक राय तोशी सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
रंगमंच एवं ललित कलाओं के क्षेत्र में समर्पित ‘हुनर’ सामाजिक, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था द्वारा पिछले 24 वर्षों से लगातार आयोजित हो रहे हुनर रंग महोत्सव के दूसरे दिन का उद्घाटन माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया।
व्यंग्य की तीखी धार: ‘ताजमहल का टेंडर’
द्वितीय सत्र में पहली नाट्य प्रस्तुति ड्रामाटरजी आर्ट एंड कल्चर सोसायटी, दिल्ली द्वारा मंचित ‘ताजमहल का टेंडर’ रही। अजय शुक्ला द्वारा लिखित यह व्यंग्यात्मक नाटक इस कल्पना पर आधारित है कि अगर मुग़ल बादशाह शाहजहाँ आज के दौर में ताजमहल बनवाने निकलें, तो सरकारी दफ्तरों, टेंडरों और लालफीताशाही के बीच उनका सपना कैसे उलझ कर रह जाएगा।
नाटक में दिखाया गया कि कैसे प्रेम की याद में बनना वाला स्मारक, काग़ज़ी कार्रवाई, भ्रष्टाचार और सरकारी देरी की भेंट चढ़ जाता है। चुटीले संवादों और तीखे हास्य के ज़रिये यह प्रस्तुति दर्शकों को हँसाती भी है और मौजूदा व्यवस्था पर सोचने को भी मजबूर करती है।
संघर्ष से रोमांस तक: ‘जंगली भालू’
दूसरी नाट्य प्रस्तुति विकेंड थिएटर एंड फ़िल्म्स, दिल्ली द्वारा प्रस्तुत ‘जंगली भालू’ रही। नाटक की कहानी गुलगुल रानी, एक युवा विधवा, के इर्द-गिर्द घूमती है, जो पति की याद में खुद को दुनिया से काट चुकी है।
कहानी तब मोड़ लेती है जब भोला सिंह, एक गुस्सैल और दबंग व्यक्ति, उधारी के पैसे मांगने उसके घर पहुँचता है। तंज़, टकराव और शब्दों की जंग के बीच मामला इतना बढ़ जाता है कि पिस्तौल से ड्यूएल का चैलेंज तक आ जाता है। लेकिन यहीं से कहानी नया रंग लेती है — गुस्सा धीरे-धीरे आकर्षण में बदलता है और अंत में प्रेम का अप्रत्याशित इज़हार दर्शकों को चौंका देता है।
कलाकारों का यथार्थ: ‘काल कोठरी’
तीसरी प्रस्तुति कला संगम, गिरिडीह (झारखंड) द्वारा मंचित स्वदेश दीपक लिखित नाटक ‘काल कोठरी’ रही। यह नाटक रंगमंच से जुड़े कलाकारों के जीवन संघर्ष को बेहद संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत करता है, जिसमें पारिवारिक दबाव, आर्थिक तंगी और व्यवस्था की उपेक्षा के बीच कलाकार अपनी कला को जीवित रखने की जद्दोजहद करता दिखाई देता है।
नृत्य प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में अष्टभुजा मिश्र (वाराणसी) एवं अशोक शर्मा (अलवर, राजस्थान) शामिल रहे।
इस अवसर पर हेमंत श्रीवास्तव सहित संस्थान के पदाधिकारी गौरव, मौर्या, सपना बनर्जी, प्रमोद कुमार सिंह, गजराज प्रसाद, कमलेश सोनकर, राज पासवान, रवि गोंड समेत बड़ी संख्या में रंगमंच प्रेमी मौजूद रहे।
रंगमंच एवं ललित कलाओं के क्षेत्र में समर्पित सामाजिक-सांस्कृतिक संस्था हुनर संस्थान ने 24 वर्षों से लगातार आयोजित हो रहे हुनर रंग महोत्सव को लेकर आयोजित प्रेस वार्ता में संस्था के सचिव एवं वरिष्ठ रंगकर्मी सुनील दत्त विश्वकर्मा ने बताया कि इस वर्ष महोत्सव का आयोजन 26 से 30 दिसंबर तक पूर्वांचल के शिक्षा जगत के पुरोधा मालवीय पंडित बजरंग त्रिपाठी की स्मृति में श्री अग्रसेन महिला महाविद्यालय के सभागार में किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि महोत्सव में देशभर से 14 नाटकों और 100 से अधिक लोक नृत्य प्रस्तुतियों का मंचन होगा। दिल्ली, राजस्थान, बंगाल, उड़ीसा, महाराष्ट्र, झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों ने अपने कलाकार भेजने की स्वीकृति दी है।
महोत्सव के प्रमुख आकर्षणों में बिहार सरकार के अम्बपाली पुरस्कार से सम्मानित लौंडा नाच व मुखौटा नृत्य कलाकार सुदामा पांडे, संगीत नाटक अकादमी यूपी से पुरस्कृत नौटंकी कलाकार अष्टभुजा मिश्र, वरिष्ठ नाट्य निर्देशक शिवलाल सागर, भारतेंदु नाटक अकादमी से प्रशिक्षित साक्षी चौहान और सुनील चौहान (दिल्ली) शामिल हैं।
इस आयोजन के प्रमुख संरक्षक डॉ. कृष्ण मोहन त्रिपाठी तथा स्वागत अध्यक्ष अभिषेक जायसवाल ‘दीनू’ हैं। इस अवसर पर संस्थान अध्यक्ष मनोज यादव सहित कई पदाधिकारी व गणमान्य लोग मौजूद रहे।
सुनील दत्त विश्वकर्मा ने कहा कि यह महोत्सव कला प्रेमियों के लिए यादगार साबित होगा और भारतीय कला-संस्कृति के संरक्षण को मजबूती देगा।