मीडिया प्रभारी डॉ. प्रवेश कुमार सिंह ने बताया कि कुलपति ने अपने संबोधन में छात्रों से रक्तदान करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि रक्तदान आत्मिक खुशी देता है और शरीर में नई ऊर्जा उत्पन्न करता है। छात्र-छात्राओं को राष्ट्र सेवा का एक महत्वपूर्ण अवसर भी मिलता है। कुलपति ने कहा कि जैसे सरहद पर सैनिक देश की रक्षा करते हैं, वैसे ही रक्तदान करने वाले भी अप्रत्यक्ष रूप से राष्ट्र की सेवा करते हैं।
विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर कुलपति ने छात्रों से जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी परेशानियों से डरकर आत्महत्या करना उचित नहीं है। परिवार और समाज को भी युवाओं पर अनुचित दबाव न डालना चाहिए और उन्हें अपने क्षेत्र में उड़ान भरने की स्वतंत्रता देनी चाहिए।
मुख्य अतिथि डॉ. कमलेश कुमार ने कहा कि जीवन अमूल्य है और आत्महत्या केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं बल्कि सामाजिक प्रभाव भी डालती है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि अवसाद में किसी मित्र को सहयोग दें और उसे यह विश्वास दिलाएं कि समस्याओं का समाधान संभव है।
विशिष्ट अतिथि डॉ. सुमित कुमार सिंह ने रक्तदान की महत्ता बताई और कहा कि इससे कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं। उन्होंने छात्रों से बिना हिचक रक्तदान करने का आग्रह किया।
अंत में कुलसचिव डॉ. अंजनी कुमार मिश्र ने आयोजन समिति और सभी अतिथियों को कार्यक्रम की सफलता के लिए बधाई दी और कुलपति के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
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