अतरौलिया (आजमगढ़)। रमजान उल मुबारक के आखिरी अशरे में की जाने वाली अहम इबादत एतेकाफ का विशेष महत्व बताया गया है। एतेकाफ के जरिए इंसान दुनिया की व्यस्तताओं से अलग होकर अल्लाह की इबादत और जिक्र में मशगूल रहता है, जिससे अल्लाह से उसका रिश्ता और मजबूत होता है।
मिली जानकारी के अनुसार जामा मस्जिद अतरौलिया के पेश इमाम एवं मदरसा अरबिया फैज-ए-नईमी सरैया पहाड़ी के उस्ताद मौलाना मोहम्मद अब्दुल बारी नईमी आजमी ने कहा कि रमजान उल मुबारक की मुकद्दस तरीन इबादतों में से एक अहम इबादत एतेकाफ भी है, जो रमजान के आखिरी दस दिनों में अदा की जाती है। कुरान और हदीस में इसका विस्तार से जिक्र मिलता है। उन्होंने बताया कि एतेकाफ का मतलब मस्जिद में अल्लाह की खुशी के लिए ठहरना होता है, ताकि इंसान अपनी तमाम मसरूफियत से अलग होकर अल्लाह के जिक्र और इबादत में लग सके।
उन्होंने कहा कि एतेकाफ का मकसद दुनिया और उसके झमेलों से अलग होकर अल्लाह से अपना रिश्ता मजबूत करना है। जब इंसान दिल और जुबान से अल्लाह की मोहब्बत में डूब जाता है तो दुनिया की मोहब्बत और चाहत कम हो जाती है। यही मोहब्बत इंसान के लिए कब्र की अंधेरी कोठरी में सहारा बनती है।
मौलाना ने बताया कि पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम रमजान के आखिरी अशरे में एतेकाफ किया करते थे और यदि किसी वजह से छूट जाता तो ईद के बाद उसकी कजा अदा करते थे। एतेकाफ के लिए आकिल-बालिग मुसलमान मर्द और औरत का हैज व निफास से पाक होना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि जो लोग मस्जिदों में एतेकाफ में बैठते हैं, वे खुशकिस्मत होते हैं। उनके जरिए अल्लाह तआला पूरे मोहल्ले पर अपनी रहमत और बरकत नाजिल फरमाता है। अगर किसी मोहल्ले में कोई भी शख्स एतेकाफ में नहीं बैठता तो पूरे मोहल्ले के लोग गुनहगार माने जाते हैं।
]]>आजमगढ़। जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार की अध्यक्षता में हरिऔध कला केंद्र में जनपद स्तरीय शांति समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में आगामी त्योहारों महाशिवरात्रि, रमजान, होलिका दहन, होली, नवरात्रि, रामनवमी आदि के दृष्टिगत शांति एवं सुरक्षा सुनिश्चित करने पर चर्चा हुई।
जिलाधिकारी ने कहा कि होलिका दहन एवं होली के दौरान किसी भी प्रकार का विवाद, जबरदस्ती रंग डालना या शराब पीकर अभद्रता न हो। उन्होंने पुरानी रंजिश के मामलों में सख्त कार्रवाई करने और मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार सभी त्योहारों को शांतिपूर्ण संपन्न कराने पर जोर दिया। शिवरात्रि पर तमसा नदी के घाटों में जलाभिषेक स्थल पर साफ-सफाई, साइन बोर्ड, बैरिकेटिंग और सीसीटीवी की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। मंदिरों में प्रवेश एवं निकास अलग-अलग बनाना, मेले में महिलाओं की सुरक्षा और लाइव किचन दूरी पर रखना आवश्यक बताया गया।
जिलाधिकारी ने सड़कों पर गड्ढों की मरम्मत, नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में साफ-सफाई, पार्किंग में अवैध वसूली रोकने, शोभायात्रा में डीजे की आवाज कानूनी सीमा में रखने और रमजान के दौरान नमाज स्थलों की सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। फायर विभाग कर्मचारियों की उपलब्धता, मोबाइल नंबर और गौशालाओं में चौकसी सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने सोशल मीडिया अफवाहों पर ध्यान न देने, शहरी भीड़भाड़ वाले इलाकों में भारी वाहनों का प्रवेश रोकने, शराब पीकर वाहन चलाने वालों का चालान करने और शरारती तत्वों पर नियंत्रण रखने के निर्देश दिए।
बैठक में अपर जिलाधिकारी प्रशासन, अपर जिलाधिकारी वित्त/राजस्व, मुख्य राजस्व अधिकारी, पुलिस अधीक्षक नगर और ग्रामीण, जिला विकास अधिकारी तथा अन्य जनपद स्तरीय अधिकारी और नागरिक उपस्थित रहे। सभी को त्योहारों को शांतिपूर्ण, सौहार्दपूर्ण और सुरक्षित रूप से संपन्न कराने का भरोसा दिया गया।
आजमगढ। । रमजान मुबारक का तीसरा अशरा शनिवार से शुरू हो जाएगा। तीसरे अशरे की 27वीं रात को शब-ए-कद्र के रूप में मनाया जाता है। इसी मुकद्दस रात में कुराने मजीद भी मुकम्मल हुआ था। सरायमीर के मौलाना अजफल ने कहा कि रमजान के तीसरे अशरे की पांच ताक रातों में शब-ए-कद्र को तलाश किया जाता है। ये 21वीं, 23वीं, 25वीं 27 वीं और 29वीं रात है। 27 वीं इबादत की रात होती है। 27 वीं शब को उन अधिकतर मसाजिद में जहां तरवीह की नमाज अदा की गई, वहां कुरान हाफिजों का सम्मान किया जाता है। शब ए कद्र की रात अल्लाह की इबादत करने वाले मोमिन के दर्जे बुलंद होते हैं। गुनाह बक्श दिए जाते हैं। दोजख की आग से निजात मिलती है। वैसे तो पूरे माहे रमजान में बरकतों और रहमतों की बारिश होती है। ये अल्लाह की रहमत का ही सिला है कि रमजान में एक नेकी के बदले 70 नेकियां नामे आमाल में जुड़ जाती हैं, लेकिन शब-ए-कद्र की विशेष रात में इबादत, तिलावत और दुआएं कुबूल होती हैं।
]]>मुकद्दस रमजान माह का चांद देखने के लिए शुक्रवार की देर शाम दारुल उलूम के अहतमाम (मोहतमिम कार्यालय) में रुयत-ए-हिलाल कमेटी की बैठक का आयोजन हुआ। इसमें शामिल उलमा ने दिल्ली, कोलकाता, मुंबई, बिहार, लखनऊ सहित देश के अलग-अलग हिस्सों में संपर्क साधा। लेकिन कहीं से भी रमजान का चांद दिखाई देने की पुष्टि नहीं हुई।
दारुल उलूम के नायब मोहतमिम मौलाना अब्दुल खालिक मद्रासी ने बताया कि शुक्रवार को रमजान का चांद दिखाई नहीं दिया, इसलिए शनिवार की रात तरावीह की नमाज होगी और रविवार को पहला रोजा रखा जाएगा। बैठक में मुफ्ती राशिद आजमी, मुफ्ती जैनुल इस्लाम, मुफ्ती वक्कार कासमी, मुफ्ती फखरुल इस्लाम, मुफ्ती मोहम्मदउल्लाह आदि मौजूद रहे।
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