जिलाधिकारी ने सभी जिला स्तरीय अधिकारियों से कहा कि समाधान दिवस के बाद अपने-अपने विभाग से संबंधित सर्वाधिक शिकायत वाले गांवों तथा आईजीआरएस पर अधिक शिकायत प्राप्त गांवों का भ्रमण करें। मौके पर शिकायतकर्ताओं को बुलाकर उनकी समस्याएं सुनें और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करें।
उन्होंने बताया कि एसआईआर, बोर्ड परीक्षा एवं फार्मर रजिस्ट्री में लगाए गए अधिकारी लंबे समय तक ड्यूटी करेंगे। यदि किसी अधिकारी की ड्यूटी दो स्थानों पर लगी हो तो तुरंत उच्चाधिकारियों या मुख्य विकास अधिकारी को अवगत कराएं।
जनसुनवाई में सामने आए कुछ मामलों पर नाराजगी जताते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि आदेश के बाद भी यदि सीमांकन के बावजूद कब्जा नहीं दिलाया जाता या सरकारी जमीन से अतिक्रमण नहीं हटाया जाता है, तो एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाए। सरकारी भूमि पर कब्जे की स्थिति में लेखपाल द्वारा तहरीर तथा निजी भूमि के मामलों में पीड़ित पक्ष की तहरीर पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए। पुलिस व राजस्व विभाग को संयुक्त टीम बनाकर मौके पर निरीक्षण करने को कहा गया।
जिलाधिकारी ने कहा कि शासन के निर्देशानुसार सरकारी जमीन पर रह रहे किसी गरीब व्यक्ति को तब तक न हटाया जाए, जब तक उसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था न हो। उल्लंघन की स्थिति में संबंधित पर सख्त कार्रवाई होगी।
कोटेदार नियुक्ति से जुड़े मामलों में ग्राम सभा की खुली बैठक कर प्रस्ताव तैयार कर उप जिलाधिकारी को भेजने तथा राशन वितरण सुचारु कराने के निर्देश दिए गए।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने राजस्व व पुलिस की संयुक्त कार्रवाई पर जोर देते हुए न्यायालय के आदेशों का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करने की बात कही।
जनसुनवाई में कुल 44 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें राजस्व की 36, पुलिस की 2, शिक्षा की 3, विकास की 2 और अन्य की 1 शिकायत शामिल रही। मौके पर 7 मामलों का निस्तारण किया गया, जबकि शेष मामलों को तय समय में निपटाने के निर्देश दिए गए।
आजमगढ़। ग्राम पंचायतों में विकास को लेकर आए दिन तमाम सवाल खड़े किए जाते हैं। इसी क्रम में सदर तहसील अंतर्गत पल्हनी विकासखंड के ग्राम पंचायत बेलागर ममरखापुर में विकास कार्यों को तो मानो ग्रहण लग चुका है। स्थानीय ग्राम वासियों की माने तो यहां पर बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है। इसके अलावा ग्रामीणों की शिकायत पर भी सुनवाई नहीं हो पा रही है। ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत के सेक्रेटरी से लेकर ब्लॉक व तहसील के साथ जिला मुख्यालय व लखनऊ तक यहां के विकास कार्यों में गड़बड़ी किए जाने की शिकायत की है और रजिस्ट्री कर सूचना भी मांगी है। लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं मिल सका है।

इसी क्रम में सोमवार को यहां के दर्जनों की संख्या में ग्रामीण लामबंद हो गए और ग्राम पंचायत के प्रधान पर कई सवाल खड़े कर दिए। चाहे बीडीसी शंकर राम हो या पूर्व प्रधान कमल चौहान या पिछले पंचायत में प्रधान पद पर दूसरे स्थान पर रहे सुनील गिरी व अन्य ग्रामीण सभी लोग, अपनी अपनी शिकायतों का पिटारा खोल दिए। लोगों का कहना है कि यहां पर इतने बड़े ग्राम पंचायत में करीब 100 की संख्या में सीमेंटेड कुर्सी प्रस्तावित थी और जिसका पैसा भी आ गया। लेकिन अभी तक एक भी कुर्सी नहीं लगी।जबकि अब कार्यकाल अंतिम दौर में है। जिले के कई ग्राम पंचायत में जाकर देखा जा सकता है कि वहां के ग्राम प्रधानों ने कितने विकास कार्य किये और वहां ग्राम पंचायत की तरफ से आम लोगों के लिए जगह-जगह कुर्सियां लगाई गई है। लेकिन इस ग्राम पंचायत में ऐसा कुछ नहीं है। वहीं चक मार्ग के निर्माण में भी गड़बड़ी की जा रही है और जहां पत्थर गड़ा है, जहां से मार्ग प्रस्तावित है, उसके उलट काम किया जा रहा है। इसके अलावा मिट्टी भी जहां से निकाली जानी है वहां से ना निकल कर पोखरे के किनारे से निकाली जा रही है और जेसीबी से इसका कार्य किया जा रहा है। जबकि यह कार्य मनरेगा के अंतर्गत मजदूरों द्वारा किया जाना है। यह कार्य रात के अंधेरे में किया जाता है। ताकि कोई देख न सके। वही स्ट्रीट लाइट भी यहां ग्राम पंचायत में डेढ़ सौ की संख्या में पास है लेकिन मात्र डेढ़ दर्जन लिए ही लग पाई हैं। वहीं दलित महापुरुषों के लिए प्रस्तावित स्थल पर जबरन ग्राम प्रधान व लेखपाल की साजिश से जल निगम के द्वारा पानी की टंकी लगवाई जा रही है। विरोध करने पर महिलाओं पर पुलिस कार्रवाई की गई।
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