कला विषय में ललित कला में स्नातक (बीएफए) के अभ्यर्थियों के लिए भी बीएड की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। इससे कंप्यूटर और कला विषय के अभ्यर्थियों को काफी राहत मिलेगी।
अभ्यर्थी काफी समय से इसकी मांग भी कर रहे थे। पहले कंप्यूटर विषय में सहायक अध्यापक भर्ती के लिए शिक्षा स्नातक (बीएड) या समकक्ष उपाधि की अनिवार्यता थी।
इसके साथ कंप्यूटर विज्ञान में बीटेक या बीई या कंप्यूटर विज्ञान में विज्ञान स्नातक या कंप्यूटर अप्लीकेशन में स्नातक या एआईईएलआईटी से ‘ए’ स्तरीय पाठ्यक्रम के साथ स्नातक की उपाधि होनी चाहिए थी।
नई व्यवस्था में कंप्यूटर विषय के लिए बीएड की अनिवार्यता को पूरी तरह खत्म
नई व्यवस्था में कंप्यूटर विषय के लिए बीएड की अनिवार्यता को पूरी तरह से समाप्त करते हुए इसे अधिमानी अर्हता के रूप में शामिल किया गया है।अभ्यर्थी के पास बीएड की डिग्री है तो अधिमानी अर्हता के रूप में उसे वेटेज दिया जाएगा। यदि बीएड की डिग्री नहीं है, तब भी वह सहायक अध्यापक कंप्यूटर भर्ती के लिए अर्ह माना जाएगा, लेकिन अलग से वेटेज नहीं मिलेगा।
वहीं, सहायक अध्यापक कला के लिए अभ्यर्थी ललित कला में स्नातक (बीएफए) है तो बीएड की उपाधि अधिमानी अर्हता होगी। यानी बीएफए की उपाधि वाले अभ्यर्थी को सहायक अध्यापक कला की भर्ती में बीएड की डिग्री होने पर वेटेज मिलेगा, लेकिन बीएड की डिग्री न होने पर भी अभ्यर्थी आवेदन के लिए पात्र होगा। अभ्यर्थी के पास एक विषय के रूप में कला के साथ स्नातक की उपाधि है तो उसके लिए एनसीटीई से मान्यता प्राप्त किसी कोर्स में बीएड की डिग्री अनिवार्य होगी।
पिछली भर्ती में कंप्यूटर विषय में 98 फीसदी पद रह गए थे खाली
एलटी ग्रेड शिक्षक की पिछली भर्ती का विज्ञापन मार्च 2018 में आया था, जिसमें सहायक अध्यापक कंप्यूटर के 1673 पदों में से 1637 पद खाली रह गए थे। कुल पदों में पुरुष वर्ग के 898 और महिला वर्ग के 775 पद शामिल थे। इनमें पुरुष वर्ग के 36 व महिला वर्ग के छह पदों पर अभ्यर्थियों का चयन हुआ था। नई नियमावली में कंप्यूटर व कला विषय में लागू की गई व्यवस्था से छात्रों को राहत मिलेगी और उनके लिए चयन के अवसर बढ़ेंगे।
हालांकि, इससे पहले भी शिक्षा सेवा चयन आयोग ने चार जनवरी 2025 को बेसिक, माध्यमिक व उच्च शिक्षा के अफसरों के साथ बैठक की थी। उस वक्त भी एक सप्ताह में अधियाचन मांगा था। लेकिन, विभागों ने कोई अधियाचन उपलब्ध नहीं कराया। ऐसे में आयोग को शिक्षा विभाग के अफसरों के साथ दोबारा बैठक करनी पड़ी।
अफसरों ने आयोग को बताया कि पदों का विवरण इकट्ठा किया जा रहा है। जल्द ऑनलाइन अधियाचन भेज दिया जाएगा। एडेड माध्यमिक विद्यालयों में टीजीटी-पीजीटी के तकरीबन 20 हजार पद खाली हैं। वहीं, एडेड महाविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर के एक हजार से अधिक पद खाली हैं।
बेसिक शिक्षा में भी सहायक अध्यापक के 50 हजार से अधिक पद रिक्त पड़े हैं। वर्ष 2019 के बाद से कोई नई भर्ती नहीं आई है। इसके के लिए अभ्यर्थी शिक्षा सेवा चयन आयोग में कई बार धरना-प्रदर्शन भी कर चुके हैं। आयोग पर भी शिक्षक भर्ती जल्द शुरू करने का दबाव है।
बैठक में तय हुआ कि संबंधित विभाग एक सप्ताह के भीतर शासन के पोर्टल पर ऑनलाइन अधियाचन प्रेषित करेंगे। वहीं, शासन के माध्यम से अधियाचन शिक्षा सेवा चयन आयोग को मिलेगा, जिसके बाद विज्ञापन जारी किया जाएगा। अफसरों ने आयोग को अधियाचन प्रक्रिया से संबंधित कुछ सुझाव भी दिए। बैठक में आयोग के सचिव मनोज कुमार, उपसचिव शिवजी मालवीय, उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमित भारद्वाज रहे।
अटल आवासीय विद्यालयों के लिए तैयार हो रही सेवा नियमावली
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को अटल आवासीय विद्यालयों में भी शिक्षक भर्ती करनी है। बैठक में शामिल श्रम विभाग के प्रतिनिधियों ने बताया कि शिक्षकों की सेवा नियमावली तैयार की जा रही है। नियमावली तैयार होने के बाद रिक्त पदों का अधियाचन ऑनलाइन प्रेषित कर दिया जाएगा।
]]>अमरेंद्र पटेल का कहना है कि 69000 शिक्षक भर्ती मामले में लखनऊ हाईकोर्ट की डबल बेंच ने आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के पक्ष में फैसला सुनाया था और सरकार को तीन महीने के अंदर फैसले का पालन किए जाने का आदेश दिया था लेकिन सरकार की लापरवाही की वजह से अभी तक फैसला का पालन नहीं हो सका और यह मामला सुप्रीम कोर्ट में चला गया। सुप्रीम कोर्ट में भी सरकार अपना पक्ष रखने में देरी कर रही है, जिसकी वजह से मामला लटकता चला जा रहा है।
25 जनवरी के आंदोलन के माध्यम से हम सरकार से यही मांग करेंगे कि वह सुप्रीम कोर्ट में जल्द से जल्द सुनवाई कराये और मामले को निस्तारित करें क्योंकि हम आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी पिछले 4 साल से दर-दर की ठोकर खा रहे हैं और मानसिक अवसाद से गुजर रहे हैं।
]]>सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसलिए अब हाई कोर्ट के आदेश के अनुरूप बेसिक शिक्षा विभाग को भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ानी पड़ेगी। वर्ष 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में सहायक अध्यापक पद पर समायोजित किए गए शिक्षामित्रों का समायोजन रद कर दिया था।
इससे करीब 1.37 लाख पद रिक्त हो गए थे। उसके बाद प्रदेश सरकार ने वर्ष 2018 में दो चरणों में 68,500 तथा 69,000 शिक्षक भर्ती निकाली थी। इसकी परीक्षा कराई गई। इसमें अनारक्षित श्रेणी में कटआफ अंक 45 प्रतिशत तथा ओबीसी और अन्य का कटआफ अंक 40 प्रतिशत निर्धारित करते हुए परिणाम घोषित किया।
योग्य अभ्यर्थी न मिलने पर इसमें 27,000 से ज्यादा पद रिक्त रह गए थे। इधर, कुछ अभ्यर्थियों ने भर्ती परीक्षा में कापी बदले जाने का आरोप लगाने के साथ कटआफ अंक कम कर रिक्त पदों पर भर्ती की मांग को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में याचिका लगाई। हाई कोर्ट ने मामले में सीबीआइ जांच के आदेश दिए।
इसके बाद सरकार डबल बेंच में गई। दो न्यायाधीशों की पीठ ने आदेश दिया कि सरकार रिक्त पदों पर भर्ती करे। इधर, सरकार की ओर से कटआफ अंक न घटाए जाने पर कटआफ अंक कम करके नियुक्ति दिए जाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट गए अभ्यर्थियों की याचिका वहां से खारिज हो गई।
]]>माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेंद्र देव ने बताया कि सहायक अध्यापक एलटी ग्रेड व प्रवक्ता के अवशेष सूची के अभ्यर्थियों की नियुक्ति व पदस्थापन की प्रक्रिया इसी माह एनआईसी के जरिये की जाएगी। अभ्यर्थियों से पांच विकल्प लेकर उनकी नियुक्ति व पदस्थापन किया जाएगा।
विस्तृत कार्यक्रम जल्द जारी किया जाएगा। गौरतलब है कि वर्ष 2018 और 2020 से चल रही इस भर्ती में खाली पदों पर अवशेष सूची के अभ्यर्थी नियुक्ति के लिए काफी समय से संघर्ष कर रहे हैं। पिछले दिनों लोक सेवा आयोग ने शासन को इसके लिए सूची भेजी थी। शासन ने विभाग को इसकी औपचारिकता पूरी कर नियुक्ति करने के निर्देश दिए हैं। विभाग की ओर से नियुक्ति संबंधित सूचना जारी करने पर अभ्यर्थियों ने राहत की सांस ली है।
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