शोधार्थी इंजमाम उल हक साथियों के साथ चंद्रशेखर से मिलकर सवाल करना चाहता थे। वहां सुरक्षाकर्मी ने उसे रोका। नहीं माना तो उसे खींच लिया। इस पर अन्य छात्र भी नाराज हो गए। गार्डों से कहासुनी व धक्का-मुक्की तक हुई।
छात्र नेता ने कहा कि आजाद के एक पुराने बयान, जिसमें उन्होंने आस्था को संविधान से ऊपर होने की बात कही थी। उसको लेकर समाजवादी पार्टी के छात्रसभा के राष्ट्रीय सचिव अदनान हमीद और एएमयू छात्र नेता-रिसर्च स्कॉलर इंजमाम उल हक ने उनसे इस ब्यान पर जब स्पष्टीकरण मांगा तो वह आग बबूला हो उठे। पूछे गए सवाल पर साफ़ बचते हुए नजर आए और वहां मौजूद पुलिस प्रशासन ने उन्हें सभागार से बाहर निकालने का प्रयास किया।
सपा नेता अदनान हमीद ने कहा कि आजाद दोहरी राजनीति करते हैं। उन्हें केवल मुसलमानों से वोट लेना है और जब बात मुसलमानों के मुद्दे की आती है तो वो किनारे हो जाते हैं। लोगों को पार्टी में नेतृत्व क्यों नहीं दिया जा रहा। छात्र नेता आरोप लगाया है कि आजाद के साथ आए सुरक्षा कर्मियों ने उसकी शेरवानी पकड़ ली। जान से मारने की दी कि बाहर आकर देखेंगे।अमुटा के पदाधकारियों से कहा कि एएमयू को राजनीति का अखाड़ा नहीं बनने देंगे। आजाद शुक्रवार को एएमयू टीचर्स एसोसिएशन की ओर से आयोजित कार्यक्रम में भाग लेने आए थे।
एएमयू में अमुटा की ओर से आयोजित कार्यक्रम में आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष व नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद ने भाजपा निशाना साधा। साथ ही एएमयू को सर सैयद की जमीन बताते हुए तारीफ की। कहा कि मैं एएमयू के साथ हर समय खड़ा रहूंगा। भाजपा के लोग क्या कहते हैं, किस तरह मदद करते हैं। इस बात को समझना जरूरी है। जब मथुरा में मेरे साथियों पर पथराव हुआ, मैं बता नहीं सकता कि मैं किस हालात में हूं।
फिर भी यहां आया। मानवता को मानता हूं। सभी को अपना मानता हूं। सभी समता के रास्ते आए। मुल्क ने तरक्की की है। मुस्लिमों ने बहुत कोशिश की है। हमें हारना नहीं चाहिए। कोशिश और मजबूत करें। कहा कि लोकसभा में जो प्रश्न आप सुनते हो न, वो घंटों पहले सबमिट किए जाते हैं। किसी के पास जाने से बनते हैं। सत्ता में बैठे लोग कोशिश करते हैं कि हमारे भी सवाल आएं।सदन को गुमराह कर लोगों की बात करते हैं। मैं सबकी बात करने की कोशिश करता हूं। पिछले साल 85 सवाल रखे। गरीबों के हक के सवाल रखता हूं। लिस्ट में अपना नाम कभी डेढ़ सौ नंबर पर कभी दो सौ नंबर पर देखता हूं। कभी पचास। मैं सोचता हूं कुदरत मेरे साथ नाइंसाफी क्यों करे। मैं हारने वाला नहीं। मैं अवसर तलाशता हूं। कोशिश करता हूं कि अवसर मिले और कोई न कोई विषय उठाऊं। जितने सवाल कम समय में मैंने उठाए हैं। वे किसी ने नहीं उठाए हैं।
]]>कई पत्थर लगने से एक सिपाही और एक युवक को मामूली चोट आई है। समर्थकों ने हंगामा कर नारेबाजी की। दो युवकों को पकड़कर जमकर पीटा और पुलिस को सौंप दिया।
बता दें कि सांसद चंद्रशेखर आजाद शुक्रवार को मथुरा पहुंचे। दोपहर में वह अपने काफिले के साथ रिफाइनरी थाना क्षेत्र के एक गांव में पहुंचे। यहां पिछले दिनों दलित बहनों की शादी थी, दबंगों ने बहनों और बरातियों को पीटा, इससे बरात लौट गई। उन्होंने परिवार को ढांढस बंधाया और फिर उनका काफिला मांट के सिर्रेला गांव पहंचा।
यहां एक सप्ताह पहले वासुदेव बघेल का शव फंदे पर लटका मिला था, उन्होंने स्वजन से मुलाकात की और इसके बाद सुरीर के गांव भगत नगरिया जा रहे थे। इस गांव में भी एक सप्ताह पूर्व ब्राह्मण और जाटव समाज के बीच विवाद हुआ। कई लोग घायल हो गए थे।
]]>जिला कारागार से बाहर आने पर उन्होंने कहा कि चुनाव जीतने के बाद दो बार आजम खां से मिलने का प्रयास किया लेकिन सफल नहीं हुए। आज प्रयास किया तो सफल हो गया। काफी लंबी बात हुई। मेरा उनका राजनीति से अलग एक करीबी पारिवारिक रिश्ता है। मैं उनके मामलों को भी देख रहा हूं। जिस तरह से बकरी चोरी कराने में दस साल की सजा हुई। छोटे छोटे मामलों में बड़ी-बड़ी सजा हुई। जिस जज ने निर्दोष करार दिया उनका ट्रांसफर हो गया।
सांसद चंद्रशेखर ने कहा कि कहा कि मैं उनसे फांसी घर मे मिला। मेरा यह विश्वास है कि यह परेशानी के बादल जल्द छट जाएंगे। अगर मुझे किसी राजनीतिक नफा नुकसान की चिंता होती तो चुनाव से पहले आता। कहीं न कहीं चुनाव में बड़ा परिवर्तन हो जाता लेकिन मैं इसलिए चुनाव के बाद आया हूं कि ये मेरा रिश्ता परिवारिक रिश्ता है। जब मेरे ऊपर गोली चली तो बीमारी के बावजूद वो मेरे पास आये और साथ दिया। उन्होंने मेरे लिए अपनी पार्टी में भी लड़ाई लड़ी।
उन्होंने कहा कि मेरी राजनीतिज्ञों से गुजारिश है कि राजनीति में वैचारिक विरोध हो सकता है लेकिन कुछ समय से यह देखा गया है कि अपने राजनीतिक विरोधियों को सरकारी मशीनरी का प्रयोग कर ठिकाने लगाया जा रहा है। यह ठीक बात नहीं है। अगर आप कुछ अन्याय करोगे तो आने वाले समय मे आपको भी खामियाजा भुगतना पड़ेगा। कहा कि अंदर आजम खां की हालत ठीक नहीं है। उनकी आंख में इंफेक्शन है। उनकी सही देखभाल होनी चाहिए। बताया कि आजम खां ने कहा कि हम बदले में नहीं बदलाव में विश्वास रखते हैं।
]]>चंद्रशेखर ने पत्र नियुक्ति विभाग, गृह विभाग और डीजीपी को भी भेजा है, जिसमें इस बाबत जानकारी मुहैया कराने को कहा है। साथ ही, दलितों के साथ होने वाले भेदभाव और अन्याय का जिक्र करते हुए लिखा कि वर्तमान में इन अहम पदों पर काबिज अधिकारियों द्वारा दलितों के साथ होने वाले अन्याय को लेकर लचर रवैया अपनाने का भी आरोप लग रहा है। बता दें कि चंद्रशेखर ने बीते दिनों लखनऊ में पुलिस हिरासत में दलित युवक की मौत के बाद परिजनों से मुलाकात भी की थी जबकि बसपा का कोई भी कद्दावर नेता मिलने नहीं गया था।
चंद्रशेखर ने लिखा कि प्रदेश में दलितों की करीब 22 फीसद आबादी है, जिसके साथ जाति आधारित उत्पीड़न, शोषण और अत्याचार हो रहा है। उन्हें थाने से भगा दिया जाता है। पुलिस अभद्रता से पेश आती है। मुकदमा नहीं लिखा जाता है और मजबूर होने पर तहरीर बदल दी जाती है और कमजोर धाराएं लगाई जाती हैं।
इन पदों पर दलितों की तैनाती का मांगा हिसाब
मुख्य सचिव, अपर मुख्य सचिव, सचिव, मंडलायुक्त, डीजी, एडीजी, आईजी, डीआईजी, डीएम, एसएसपी, एसपी, एडीएम, थानेदार।