हालांकि, कई उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट मीटर लगने के बाद भी बिजली बिल गलत आ रहा है। इससे उन्हें बार-बार विभाग के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक प्रतिदिन प्रत्येक वितरण खंड में बिजली बिल से जुड़ी दो से तीन शिकायतें आ रही हैं, जिससे महीने में यह संख्या 450 से 500 तक पहुंच रही है।
पहले शिकायत मिलते ही बिजली बिल संशोधित हो जाता था, लेकिन अब स्मार्ट मीटर वाले उपभोक्ताओं का बिल तभी सुधरेगा जब जेई और एसडीओ मौके पर जाकर सेंक्शन लोड और इस्तेमाल हो रहे उपकरणों के लोड की जांच करेंगे। इसके बाद साइट इंस्पेक्शन रिपोर्ट तैयार होगी और उसी के आधार पर बिल में संशोधन किया जाएगा।
अधिशासी अभियंता पीके गुप्ता के अनुसार, जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि उपभोक्ता के पास कितने भार का कनेक्शन है और वास्तविक खपत कितनी है। इससे एक तरफ लाइन लॉस और बिजली चोरी पर रोक लगेगी, वहीं दूसरी ओर उपभोक्ताओं को सही बिजली बिल मिल सकेगा।
स्मार्ट मीटर लगाने की जिम्मेदारी हैदराबाद की जीएमआर कंपनी को सौंपी गई है। कंपनी द्वारा लगाए गए मीटरों में से बड़ी संख्या को प्रीपेड मोड में भी बदला जा रहा है। इससे विभाग को यह सुविधा मिल रही है कि बिजली बिल जमा न करने वाले उपभोक्ताओं की आपूर्ति कार्यालय से ही काटी जा सकती है।
मुख्य अभियंता इंजीनियर रामबाबू ने बताया कि अब तक लगाए गए 2.77 लाख स्मार्ट मीटरों में से 1.66 लाख मीटर प्रीपेड किए जा चुके हैं। आंकड़ों के अनुसार आजमगढ़ प्रथम सर्किल में 39,626, आजमगढ़ द्वितीय में 7,119, बलिया में 64,605 और मऊ सर्किल में 55,073 स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं। उन्होंने बताया कि शेष उपभोक्ताओं के यहां भी चरणबद्ध तरीके से स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं।