मिली जानकारी के अनुसार, कोडीनयुक्त कफ सिरप की अवैध खरीद-फरोख्त के इस नेटवर्क में आजमगढ़, बलिया और मऊ की कुल 13 फर्में संलिप्त पाई गई हैं। जांच में सामने आया है कि इन फर्मों से करीब 12 लाख सिरप की शीशियां खरीदी गई थीं, जिन्हें आजमगढ़ की एक फर्म को बेचा गया। शेष सिरप अन्य जनपदों में खपाई गई, जबकि बड़ी खेप बांग्लादेश तक पहुंचाई गई।
पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड आरोपी विकास सिंह है, जो फिलहाल फरार चल रहा है। पुलिस को उसकी लोकेशन दुबई में मिलने की सूचना मिली है। वहीं, एक अन्य आरोपी विपेंद्र भी लगातार ठिकाने बदलकर गिरफ्तारी से बच रहा था। देश छोड़कर भागने की आशंका के चलते पुलिस ने उसके खिलाफ पहले ही सख्त कदम उठाते हुए लुकआउट सर्कुलर जारी कर दिया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए तीन विशेष टीमें गठित की गई हैं। पुलिस कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) निकाल रही है, जबकि साइबर सेल बैंक खातों और लेन-देन की गहन जांच में जुटी है। पुलिस संबंधित केंद्रीय एजेंसियों से समन्वय स्थापित कर आगे की कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रही है।
एसपी ग्रामीण चिराग जैन ने बताया कि कोडीनयुक्त कफ सिरप की तस्करी के मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए तीन टीमें गठित की गई हैं। साथ ही उनके सीडीआर निकाले जा रहे हैं। साइबर सेल बैंक स्टेटमेंट खंगाल रही है। अभी तक की जांच में विकास की लोकेशन दुबई में मिल रही है तो विपेंद्र का पासपोर्ट निरस्त करते हुए उसके विरुद्ध लुकआउट नोटिस जारी किया गया है।
वहीं, आजमगढ़ की एक अन्य मेडिकल फर्म का लाइसेंस नोटिस के बाद संतोषजनक जवाब न मिलने पर निलंबित किया गया है।
सहायक आयुक्त औषधि गोविंद गुप्ता के अनुसार, बलिया की तीन और आजमगढ़ की दो फर्मों ने रांची के तुपूदाना इंडस्ट्री एरिया स्थित मेसर्स शैली ट्रेडर्स से करीब चार लाख शीशी कोडीनयुक्त कफ सीरप की खरीद-बिक्री की थी। अभिलेखों की जांच में कफ सीरप मंगाने से संबंधित कोई वैध दस्तावेज नहीं मिले, जिसके आधार पर नोटिस जारी किए गए थे।
आजमगढ़ की पूर्वांचल मेडिकल एजेंसी ने 82 हजार, प्रभात मेडिकल स्टोर मार्टीनगंज ने 1 लाख 28 हजार, जबकि बलिया की श्री सेवाएं मेडिकल ने 79 हजार, ओम साईं ड्रग एजेंसी ने 65 हजार और एनबी मेडिकल एजेंसी ने 46 हजार शीशी कोडीनयुक्त कफ सीरप रांची से मंगाया था।
मिली जानकारी के अनुसार, यह कफ सिरप आजमगढ़, बलिया और मऊ की फर्मों के माध्यम से वाराणसी, चंदौली, प्रतापगढ़, गाजीपुर, भदोही समेत अन्य जिलों तक पहुंचाया गया। जांच में यह भी सामने आया कि कुल 12 फर्म इस नेटवर्क में शामिल थीं, जबकि एक फर्म केवल खरीद में संलिप्त पाई गई, जिसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है।
औषधि प्रशासन ने मामले के उजागर होने के बाद सभी 12 फर्मों को नोटिस जारी किया। आजमगढ़ और बलिया की फर्मों ने अपने जवाब विभाग को सौंप दिए हैं, लेकिन प्रशासन उनके स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं है। वहीं, मऊ की दो फर्मों की ओर से अब तक जवाब नहीं दिया गया है। विभाग अब सभी संबंधित फर्मों के लाइसेंस निलंबित करने की तैयारी कर रहा है।
जांच में यह भी जानकारी हुई कि वित्तीय वर्ष 2023-24 और 2024-25 के दौरान रांची से आई कुल 12 लाख शीशी में से करीब 9.28 लाख शीशी केवल आजमगढ़ और बलिया में आई थीं, जबकि शेष मऊ की फर्मों को सप्लाई की गई थीं। इस पूरे प्रकरण को गंभीर मानते हुए औषधि प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है।
सहायक आयुक्त औषधि गोविंद लाल गुप्ता ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2023-24 और 2024-25 में आजमगढ़ मंडल की 12 फर्म ने रांची की शैली ट्रेडर्स से 12 लाख शीशी कोडीनयुक्त सिरप मंगाया था। इसकी विवरण निकालकर सभी फर्म को नोटिस जारी किया गया है। इसमें आजमगढ़ और बलिया की फर्म के जवाब आ गए हैं, जो असंतोषजनक हैं। वहीं, मऊ की दो फर्म के जवाब का इंतजार है। सभी फर्म के लाइसेंस निलंबित किए जाएंगे।
]]>जानकारी के अनुसार, आज़मगढ़ और बलिया की पांच-पांच फर्मों तथा मऊ की दो फर्मों के यहां झारखंड के रांची से कोडीनयुक्त कफ सिरप की बड़ी खेप भेजी गई थी। इन फर्मों ने वाराणसी, चंदौली, प्रतापगढ़, गाजीपुर, भदोही सहित प्रदेश के कई जिलों में करोड़ों रुपये का अवैध माल खपाया। जांच में यह भी सामने आया कि सिरप की सप्लाई को फैलाने के लिए फर्मों ने अलग-अलग जनपदों का चयन किया, जिससे संदेह कम हो और नेटवर्क लंबे समय तक सक्रिय रह सके।
वित्तीय वर्ष 2023–24 और 2024–25 के दौरान रांची से लगातार बड़ी मात्रा में सिरप मंगाया गया। इसी अवधि में आजमगढ़ की दो फर्मों द्वारा एएस फार्मा को भी कोडीनयुक्त सिरप की सप्लाई की गई थी। बलिया, मऊ और आजमगढ़ की अन्य फर्मों ने भी दो वर्षों में अलग-अलग जिलों में लाखों बोतलों की सप्लाई कर तस्करी के इस नेटवर्क को मजबूत किया।
जैसे ही मामला प्रकाश में आया, औषधि एवं ड्रग विभाग ने विस्तृत जांच शुरू की। रिकार्ड खंगालने पर 12 फर्मों की संलिप्तता पक्की मिली, जिनमें से दो फर्मों को नोटिस जारी कर दिया गया है, जबकि शेष फर्मों को भी नोटिस भेजे जाने की प्रक्रिया जारी है। विभाग का दावा है कि एक-एक फर्म के बिल, स्टॉक रजिस्टर और सप्लाई रूट की जांच की जा रही है, ताकि पूरे नेटवर्क को खत्म किया जा सके। जांच पूरी होते ही सभी फर्मों के विरुद्ध लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई की जाएगी।
गोविंद लाल गुप्ता, सहायक आयुक्त औषधि ने बताया कि कार्रवाई सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत की जा रही है, ताकि कोडीनयुक्त प्रोडक्ट्स की अवैध बिक्री और दुरुपयोग को कड़ाई से रोका जा सके। इसके बाद लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई की जाएगी।
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